1961 Hindi-language musical comedy film that became a box office hit. It was written, produced, and directed by Nasir Hussain.
यह कहानी एक सुंदर, रंगीन और मनोरंजक फिल्म की है जिसका नाम है Jab Pyar Kisi Se Hota Hai। इस फिल्म को प्रसिद्ध फिल्मकार Nasir Hussain ने बनाया था। यह उनकी पहली फिल्म थी जिसे उन्होंने खुद बनाया और निर्देशित किया। फिल्म में मुख्य भूमिका में थे Dev Anand और Asha Parekh। खलनायक की भूमिका में थे Pran और सहायक भूमिका में थे Rajindernath। यह फिल्म प्रेम, विश्वास, गलतफहमी और सच्चाई की कहानी है, जिसमें हंसी भी है, दुख भी है और अंत में सच्चे प्रेम की जीत भी है।
कहानी शुरू होती है नीलगांव नाम के एक समृद्ध स्थान से। वहां एक बहुत अमीर और सम्मानित व्यापारी रहते हैं जिनका नाम है सरदार रूप सिंह। वे बहुत सख्त स्वभाव के हैं, लेकिन अपनी इकलौती बेटी निशा से बहुत प्रेम करते हैं। निशा बहुत सुंदर, समझदार और आधुनिक विचारों वाली लड़की है। वह पढ़ी-लिखी है, संगीत और नृत्य में रुचि रखती है और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती है।
निशा अब विवाह योग्य हो चुकी है। उसके पिता चाहते हैं कि उसका विवाह उनके पुराने मित्र के बेटे सोहन से हो जाए। सोहन भी अमीर परिवार से है, पर उसका स्वभाव घमंडी और रूखा है। वह निशा को एक वस्तु की तरह देखता है, न कि एक इंसान की तरह। निशा को उसका व्यवहार बिल्कुल पसंद नहीं आता। वह अपने पिता से कहती है कि वह सोहन से विवाह नहीं करना चाहती। लेकिन सरदार रूप सिंह अपनी जिद पर अड़े रहते हैं। उनके लिए परिवार की प्रतिष्ठा और पुराना वादा बहुत मायने रखता है।
इसी बीच निशा को एक नृत्य मंडली के साथ दार्जिलिंग जाने का अवसर मिलता है। वह अपने पिता से अनुमति लेकर वहां जाती है। दार्जिलिंग का सुंदर वातावरण, पहाड़, ठंडी हवा और हरी-भरी वादियां उसके मन को बहुत भाती हैं। वहीं उसकी मुलाकात होती है एक चंचल और हंसमुख युवक से जिसका नाम है पोपट लाल। पोपट लाल बहुत मजाकिया स्वभाव का है। वह बात-बात पर हंसी-मजाक करता है और लोगों का मन जीत लेता है।
पहली मुलाकात में ही दोनों के बीच थोड़ी नोक-झोंक होती है। पोपट लाल कभी गलत नाम से बुलाता है, कभी शरारत करता है। निशा पहले तो नाराज होती है, पर धीरे-धीरे उसे उसका सरल और सच्चा स्वभाव अच्छा लगने लगता है। पोपट लाल असल में एक व्यापारी का बेटा है और वह भी दार्जिलिंग अपने पिता के काम से आया है। दोनों की मुलाकातें बढ़ती जाती हैं। कभी वे साथ घूमते हैं, कभी गाने गाते हैं, कभी हंसी-मजाक करते हैं। धीरे-धीरे दोनों के दिल में एक-दूसरे के लिए प्रेम जाग उठता है।
पोपट लाल का असली नाम सुंदर है, लेकिन वह मजाक में खुद को पोपट लाल कहता है। वह निशा से सच्चा प्रेम करने लगता है। निशा भी उसके बिना रह नहीं पाती। दोनों एक-दूसरे से वादा करते हैं कि वे जीवन भर साथ रहेंगे।
जब निशा दार्जिलिंग से लौटती है तो वह अपने पिता को सब कुछ बताने का निश्चय करती है। वह चाहती है कि उसका विवाह उसी युवक से हो जिससे वह प्रेम करती है। उधर सुंदर भी अपने पिता के कहने पर नीलगांव आता है क्योंकि उसका परिवार भी सरदार रूप सिंह के साथ व्यापारिक संबंध रखता है।
निशा बहुत खुश होती है जब उसे पता चलता है कि पोपट लाल नीलगांव आ रहा है। वह सोचती है कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा। वह उसे अपने घर बुलाती है ताकि वह अपने पिता से मिल सके और साथ ही व्यापार की बात भी हो सके। लेकिन जब सुंदर घर के अंदर जाता है, तो अचानक एक अजीब घटना घटती है।
सरदार रूप सिंह कमरे में आते हैं और देखते हैं कि वहां एक दूसरा आदमी खड़ा है जो खुद को असली पोपट लाल बता रहा है। वह कहता है कि वही असली व्यापारी का बेटा है। सुंदर वहां से गायब हो जाता है। निशा यह देखकर हैरान रह जाती है। उसे लगता है कि जिस युवक से वह प्रेम करती थी, वह झूठा निकला। उसका दिल टूट जाता है।
निशा अपने कमरे में जाकर रोती है। वह सोचती है कि उसने गलत आदमी पर भरोसा किया। उसे लगता है कि सुंदर ने उसे धोखा दिया। उसके मन में गुस्सा और दुख भर जाता है। वह उससे नफरत करने लगती है।
कुछ दिनों बाद सुंदर किसी तरह निशा से मिलने आता है। वह उसे सच्चाई बताता है। वह कहता है कि उसका असली नाम सुंदर है और बचपन में ही उनके माता-पिता ने उनका रिश्ता तय कर दिया था। लेकिन बाद में किसी कारण से सरदार रूप सिंह ने अपना मन बदल लिया। इसलिए उसने पोपट लाल नाम से खुद को छिपाया। वह कहता है कि उसने कभी धोखा देने की नीयत नहीं रखी। वह केवल अपने प्रेम को पाने के लिए यह सब कर रहा था।
निशा पहले तो विश्वास नहीं करती, लेकिन सुंदर की आंखों में सच्चाई देखकर उसका दिल पिघल जाता है। वह समझ जाती है कि वह सच कह रहा है। वह उससे कहती है कि वह उसके साथ विवाह करने को तैयार है, चाहे उसके पिता आशीर्वाद दें या न दें।
दोनों गुपचुप विवाह करने का निश्चय करते हैं। विवाह की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। निशा अपने पिता के विरोध के बावजूद अपने निर्णय पर अड़ी रहती है। सरदार रूप सिंह बहुत नाराज होते हैं, लेकिन वह अपनी बेटी की जिद के आगे कुछ नहीं कर पाते।
जब विवाह का दिन आता है, तभी एक व्यक्ति वहां आता है जिसका नाम है खन्ना। वह सबके सामने एक सनसनीखेज खबर सुनाता है। वह कहता है कि सुंदर पहले से विवाहित है। उसकी पत्नी का नाम शांति था और उसकी मृत्यु हो चुकी है। खन्ना आरोप लगाता है कि सुंदर ने ही शांति की हत्या की थी और पुलिस उसे इस मामले में ढूंढ रही है।
यह सुनकर वहां मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह जाते हैं। निशा के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। वह सुंदर की ओर देखती है। उसके मन में फिर से शक और डर पैदा हो जाता है। क्या वह फिर से धोखा खा रही है। क्या वह एक अपराधी से विवाह करने जा रही थी।
सरदार रूप सिंह को यह मौका मिल जाता है अपनी बेटी को समझाने का। वे कहते हैं कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी। वे सुंदर को अपराधी कहते हैं और विवाह रोक देते हैं।
सुंदर खुद को निर्दोष बताता है। वह कहता है कि शांति उसकी पत्नी नहीं थी। वह केवल एक गलतफहमी का शिकार है। वह बताता है कि असली साजिश किसी और ने रची है। खन्ना और सोहन मिलकर उसे फंसाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि निशा का विवाह सोहन से हो सके और व्यापार पर उनका कब्जा हो जाए।
धीरे-धीरे सच्चाई सामने आने लगती है। पता चलता है कि शांति की मृत्यु एक दुर्घटना थी और सुंदर को झूठा फंसाया गया था। खन्ना का असली चेहरा सामने आता है। सोहन की साजिश भी उजागर हो जाती है। पुलिस सच्चाई की जांच करती है और सुंदर को निर्दोष साबित करती है।
निशा को अपनी गलती का एहसास होता है कि उसने एक बार फिर उस पर शक किया। वह सुंदर से माफी मांगती है। सरदार रूप सिंह भी सच्चाई जानकर शर्मिंदा होते हैं। वे समझ जाते हैं कि सच्चा प्रेम ही सबसे बड़ा धन है। वे अपनी बेटी की खुशी को स्वीकार कर लेते हैं।
अंत में सुंदर और निशा का विवाह धूमधाम से होता है। परिवार के लोग खुश होते हैं। सोहन और खन्ना को उनके कर्मों की सजा मिलती है। फिल्म यह संदेश देती है कि प्रेम में विश्वास बहुत जरूरी है। गलतफहमियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सच्चाई एक दिन जरूर सामने आती है।
यह कहानी केवल प्रेम की नहीं, बल्कि भरोसे और साहस की भी है। निशा ने अपने दिल की आवाज सुनी। सुंदर ने हर मुश्किल में सच्चाई का साथ दिया। अंत में दोनों का प्रेम जीत गया और सब कुछ अच्छा हो गया।
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