"EK PAHELI" - HINDI CLASSIC THRILLER DRAMA FILM / SANJEEV KUMAR / FEROZ KHAN / TANUJA MOVIE




Ek Paheli is a 1971 Bollywood thriller drama film directed by Naresh Kumar. The film stars Sanjeev KumarTanujaFeroz KhanMadan Puri and Aruna Irani.


एक बड़े शहर में एक पढ़ा लिखा युवक रहता था जिसका नाम सुधीर था। वह एक समझदार और मेहनती युवक था। उसके पिता एक सफल व्यापारी थे और उनका शहर में बहुत सम्मान था। सुधीर कई वर्षों तक विदेश में पढ़ाई कर रहा था। वहां उसने बहुत ज्ञान सीखा और एक अच्छे डॉक्टर के रूप में अपनी पढ़ाई पूरी की।


एक दिन उसे खबर मिली कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह खबर सुनकर वह बहुत दुखी हो गया। वह तुरंत अपने देश लौट आया ताकि अपने पिता के घर और व्यापार की जिम्मेदारी संभाल सके। जब वह अपने पुराने घर में पहुंचा तो उसे बचपन की बहुत सी बातें याद आने लगीं। वह घर बहुत बड़ा था। उसमें कई कमरे थे और हर कमरे में पुराने दिनों की यादें बसी हुई थीं। घर के नौकर और पुराने लोग उसे देखकर खुश हुए क्योंकि वे उसे बचपन से जानते थे।




सुधीर ने घर की जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दीं। वह अपने पिता का काम भी देखने लगा। उसके साथ उसका एक सहायक भी रहता था जिसका नाम राकेश था। वह थोड़ा हंसी मजाक करने वाला आदमी था लेकिन दिल का अच्छा था और अपने मालिक के प्रति वफादार था। एक दिन सुधीर घर के एक पुराने कमरे को देख रहा था। वह कमरा खाली पड़ा था और उसे लगा कि उसे थोड़ा सुंदर बनाना चाहिए। वह सोचने लगा कि अगर उस कमरे में कोई संगीत का सामान रखा जाए तो अच्छा लगेगा। उसे संगीत सुनना बहुत पसंद था।


कुछ दिनों बाद वह शहर की एक पुरानी दुकान में गया। उस दुकान में पुराने सामान मिलते थे। वहां उसे एक पुराना पियानो दिखाई दिया। वह पियानो बहुत सुंदर था लेकिन बहुत पुराना भी था। उस पर समय की धूल जमी हुई थी। सुधीर को वह पियानो पसंद आ गया। उसने सोचा कि इसे घर ले जाकर उस कमरे में रखेगा। दुकान वाले ने कहा कि यह पियानो बहुत साल पुराना है और इसके साथ एक अजीब कहानी भी जुड़ी हुई है। लेकिन सुधीर ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया और वह पियानो खरीदकर अपने घर ले आया। 




जब वह पियानो घर में रखा गया तो घर के लोग उसे देखने लगे। सबको वह अच्छा लगा। उसी रात सुधीर ने सोचा कि वह थोड़ा संगीत बजाकर देखे। जब वह पियानो के पास बैठा तो उसे लगा कि कमरे में एक अजीब सी शांति है। उसने धीरे से पियानो बजाना शुरू किया। उसी समय उसे लगा कि जैसे कोई और भी वहां मौजूद है। अचानक उसके सामने एक सुंदर लेकिन रहस्यमय स्त्री दिखाई दी। उसका चेहरा बहुत शांत था और उसकी आंखों में एक अजीब सी उदासी थी। उसने अपना नाम मारिया बताया।


मारिया ने सुधीर से कहा कि यह पियानो अब उसका है इसलिए वह इसे बजा सकता है। लेकिन उसने उसे चेतावनी दी कि वह किसी और को इस पियानो को बजाने न दे। सुधीर यह है। उसने इस बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया।




कुछ दिनों बाद सुधीर के घर में एक मेहमान आई। उसने उस कमरे में पियानो देखा और उसे बजाने की इच्छा हुई। सुधीर को अचानक उस रहस्यमय स्त्री की बात याद आई। उसने मना करना चाहा लेकिन बातों ही बातों में वह स्त्री पियानो के पास बैठ गई और बजाने लगी। कुछ ही देर बाद एक अजीब घटना हुई। पियानो बजाने के तुरंत बाद वह स्त्री अचानक गिर पड़ी और उसकी मृत्यु हो गई। यह देखकर घर में हड़कंप मच गया। लोगों को समझ नहीं आया कि यह कैसे हुआ। पुलिस को खबर दी गई। जांच शुरू हुई और कुछ लोगों को शक होने लगा कि शायद सुधीर का इस घटना से कोई संबंध है।


इसी बीच घर का एक पुराना नौकर भी अचानक मर गया। अब शक और बढ़ गया। कुछ लोग कहने लगे कि घर में कुछ अजीब हो रहा है। शहर में एक व्यापारी था जिसका नाम शंकरलाल था। वह बहुत चालाक और स्वार्थी आदमी था। वह सुधीर को पसंद नहीं करता था और उसके खिलाफ साजिश रचने लगा। वह चोरी छिपे ऐसे सबूत रखने लगा जिससे यह लगे कि इन घटनाओं के पीछे सुधीर का हाथ है।




सुधीर का सहायक राकेश यह सब देख रहा था। उसे शक हुआ कि कोई जानबूझकर उसके मालिक को फंसाने की कोशिश कर रहा है। उसने पुलिस से मिलकर एक योजना बनाई ताकि असली अपराधी पकड़ा जा सके। इसी दौरान सुधीर का एक मित्र और उसकी पत्नी उससे मिलने आए। उन्होंने उस रहस्यमय स्त्री को गाते हुए सुना। उन्हें उसका गीत बहुत सुंदर लगा इसलिए उन्होंने उसकी आवाज रिकॉर्ड करने की कोशिश की। लेकिन जब बाद में उन्होंने वह रिकॉर्ड सुना तो उसमें कोई आवाज नहीं थी। यह देखकर वे सब हैरान रह गए।


सुधीर को यह रहस्य और गहरा लगने लगा। उसने तय किया कि वह उस स्त्री के बारे में सच्चाई पता करेगा। एक दिन वह उस स्त्री के घर पहुंचा। वहां एक बूढ़ा आदमी रहता था जिसका नाम जोसेफ था। वह उस स्त्री का पिता था। जब सुधीर वहां से लौट रहा था तब उस बूढ़े आदमी ने अचानक उस पर हमला कर दिया। सुधीर बेहोश हो गया। जब उसे होश आया तो वह अपने घर में था। उसके मित्रों ने बताया कि रास्ते में उसकी गाड़ी का दुर्घटना हो गया था। लेकिन सुधीर को लगा कि सच्चाई कुछ और है।


कुछ समय बाद वह उसी जगह गया जहां उसकी गाड़ी मिली थी। वहां शंकरलाल और उसकी सहायक रोसी छिपे हुए थे। वे उसे मारने की योजना बना रहे थे। रोसी ने उसी रहस्यमय स्त्री का रूप धारण किया हुआ था ताकि वह सुधीर को डराकर वहां ला सके। लेकिन उसी समय राकेश पुलिस के साथ वहां पहुंच गया। रोसी पकड़ी गई और उसने पूरी सच्चाई बता दी कि शंकरलाल ही यह सब साजिश कर रहा था। सच्चाई सामने आते ही शंकरलाल ने रोसी को मार दिया और वहां से भागने की कोशिश की। लेकिन अंत में पुलिस ने उसे पकड़ लिया।


कुछ समय बाद सुधीर का मित्र एक दिन एक पुराना गीत सुन रहा था जो उसने उसी दुकान से खरीदा था जहां से सुधीर ने पियानो खरीदा था। जब उसने वह गीत सुना तो वह चौंक गया क्योंकि वह आवाज उसी रहस्यमय स्त्री की थी। लेकिन दुकानदार ने बताया कि यह रिकॉर्ड बहुत पुराना है और करीब बीस साल पहले का है। यह सुनकर सब लोग हैरान रह गए। इसका मतलब था कि वह स्त्री जीवित नहीं हो सकती। सुधीर तुरंत उस दुकान पर गया लेकिन वहां का मालिक मृत मिला।


फिर वह उस स्त्री के चर्च गया। वहां उसे सच्चाई का पता चला कि मारिया नाम की वह स्त्री बीस साल पहले मर चुकी थी। लोगों ने बताया कि वह बहुत दुखी थी क्योंकि उसके पिता ने उसका प्रिय पियानो शराब के बदले बेच दिया था। उसी दुख में उसने अपनी जान दे दी थी। तब से लोग कहते थे कि उसकी आत्मा उस जगह के आसपास भटकती रहती है। यह सुनकर सुधीर स्तब्ध रह गया। उसे समझ में आ गया कि वह स्त्री वास्तव में एक आत्मा थी।


एक रात उसने फिर उसे देखा और उसके पीछे भागा। वह पहाड़ की ओर चली गई। सुधीर भी उसके पीछे दौड़ा लेकिन अचानक उसका पैर फिसल गया और वह पहाड़ से नीचे गिर गया। उसकी मृत्यु हो गई। कहानी का अंत बहुत रहस्यमय और भावुक था। लोग कहते हैं कि उसके बाद सुधीर की आत्मा भी उसी स्त्री के साथ जुड़ गई और दोनों की अधूरी कहानी किसी अनजानी दुनिया में पूरी हो गई।

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