"DO RAHA" - HINDI CLASSIC EROTIC DRAMA FILM / ANIL DHAWAN & SHATRUGHAN SINHA




Do Raha is a 1971 Hindi-language erotic drama film. The film stars Anil DhawanRadha SalujaShatrughan Sinha. The film was remade in Tamil as Aval (1972).


एक छोटे से शहर में एक युवक रहता था जिसका नाम अजीत था। अजीत एक सीधा और मेहनती युवक था। उसका बचपन साधारण हालात में बीता था। उसने जीवन में बहुत संघर्ष देखा था, इसलिए वह चाहता था कि उसका भविष्य अच्छा हो। वह पढ़ा लिखा था और एक अच्छी नौकरी की तलाश में था। कुछ समय बाद उसे एक दफ्तर में काम मिल गया। नौकरी मिलने से उसके जीवन में थोड़ी स्थिरता आ गई। वह अपने काम में ईमानदार था और धीरे धीरे सब लोग उसे पसंद करने लगे।


उसी शहर में एक लड़की रहती थी जिसका नाम राधा था। राधा बहुत सुंदर, शांत और समझदार थी। उसका स्वभाव बहुत कोमल था। वह अपने परिवार से बहुत प्यार करती थी। उसके माता पिता चाहते थे कि उसकी शादी किसी अच्छे और जिम्मेदार युवक से हो। जब उन्होंने अजीत के बारे में सुना तो उन्हें लगा कि वह उनकी बेटी के लिए अच्छा जीवन साथी हो सकता है।




कुछ समय बाद दोनों परिवारों की मुलाकात हुई। अजीत और राधा ने एक दूसरे को देखा। दोनों के मन में एक दूसरे के लिए सम्मान और अपनापन पैदा हुआ। परिवार वालों ने भी इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। कुछ समय बाद दोनों की शादी हो गई। शादी के बाद राधा अपने नए घर में आ गई। शुरू के दिन बहुत खुशियों से भरे हुए थे। अजीत अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था। राधा भी अपने पति की बहुत सेवा करती थी। दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताते और भविष्य के सपने देखते।


लेकिन कुछ समय बाद अजीत को काम के सिलसिले में दूसरे शहर जाना पड़ा। यह शहर उनके घर से बहुत दूर था। अजीत ने सोचा कि वह कुछ समय के लिए जाएगा और फिर वापस आ जाएगा। उसने राधा से कहा कि वह कुछ समय धैर्य रखे और उसका इंतजार करे। राधा ने मुस्कुराकर अपने पति को विदा किया, लेकिन उसके मन में अकेलेपन का डर भी था।


अजीत दूसरे शहर चला गया और अपने काम में लग गया। शुरू शुरू में वह राधा को चिट्ठियां लिखता था और अपने हाल बताता था। राधा भी उसे जवाब भेजती थी। दोनों एक दूसरे को बहुत याद करते थे। लेकिन धीरे धीरे काम का दबाव बढ़ने लगा और चिट्ठियों का आना जाना कम हो गया। उधर राधा अपने घर में अकेली रहने लगी। उसका मन बहुत उदास रहता था। उसे अपने पति की याद सताती रहती थी। वह दिन भर घर के काम करती, लेकिन रात को जब चारों ओर सन्नाटा होता तो उसका दिल और ज्यादा अकेला महसूस करता।




उसी समय उसके जीवन में एक और आदमी आया। उसका नाम शेखर था। शेखर एक मजबूत और प्रभावशाली आदमी था। उसका स्वभाव थोड़ा कठोर था, लेकिन वह बात करने में बहुत चतुर था। किसी काम के कारण उसकी मुलाकात राधा से हुई। धीरे धीरे वह घर आने जाने लगा। शुरू में राधा उससे दूरी बनाकर रखती थी। वह अपने पति के प्रति वफादार थी और किसी अजनबी से ज्यादा बात नहीं करना चाहती थी। लेकिन शेखर बहुत चालाक था। वह धीरे धीरे राधा के मन की कमजोरी समझने लगा। उसे पता था कि वह अकेली है और अपने पति को बहुत याद करती है।


शेखर उससे सहानुभूति से बात करता। वह उसके दुख को समझने का नाटक करता। वह कहता कि जीवन में कभी कभी इंसान को सहारे की जरूरत होती है। राधा पहले तो उसकी बातों को नजरअंदाज करती रही, लेकिन धीरे धीरे उसका मन कमजोर पड़ने लगा। समय बीतता गया और राधा का अकेलापन बढ़ता गया। उसे लगने लगा कि शायद उसका पति अब उससे दूर हो गया है। इसी बीच शेखर ने उसके जीवन में जगह बना ली। वह अक्सर उसके पास बैठकर बातें करता और उसे हंसाने की कोशिश करता।


धीरे धीरे राधा का मन उलझन में पड़ गया। वह अपने पति को भूलना नहीं चाहती थी, लेकिन अकेलेपन ने उसे कमजोर कर दिया था। एक दिन ऐसा आया जब उसने अपने दिल की कमजोरी के सामने हार मान ली। उसके बाद उसका जीवन बदल गया। समय बीतता गया और राधा अपने भीतर एक अपराधबोध महसूस करने लगी। उसे लगता था कि उसने अपने पति के विश्वास को तोड़ दिया है। लेकिन अब वह उस रास्ते पर आ चुकी थी जहाँ से वापस लौटना आसान नहीं था।




उधर अजीत अपने काम में लगा हुआ था। उसे इस बात का बिल्कुल पता नहीं था कि उसके पीछे उसके घर में क्या हो रहा है। वह अपनी पत्नी को अब भी उतना ही प्यार करता था और सोचता था कि जब वह वापस जाएगा तो दोनों फिर से खुशहाल जीवन शुरू करेंगे। कुछ समय बाद अचानक एक दिन अजीत वापस अपने घर आ गया। राधा को उसकी वापसी की खबर नहीं थी। जब वह घर में आया तो राधा उसे देखकर चौंक गई। उसके चेहरे पर खुशी भी थी और डर भी। अजीत ने उसे प्यार से गले लगाया और कहा कि वह अब हमेशा उसके साथ रहेगा।


लेकिन अजीत ने जल्द ही महसूस किया कि राधा के व्यवहार में कुछ बदलाव आ गया है। वह पहले जैसी सहज नहीं रही थी। उसकी आंखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। अजीत को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर बात क्या है। कुछ दिनों तक उसने कुछ नहीं कहा और सब कुछ चुपचाप देखता रहा। धीरे धीरे उसे सच्चाई का आभास होने लगा। उसे महसूस हुआ कि उसके जाने के बाद राधा के जीवन में कोई और भी आया था।


यह सोचकर उसका दिल टूट गया। उसे बहुत दुख हुआ। लेकिन उसने तुरंत कोई फैसला नहीं लिया। वह समझना चाहता था कि आखिर राधा के मन में क्या चल रहा है। राधा भी अंदर ही अंदर डर और शर्म से टूट रही थी। उसे लग रहा था कि एक दिन सच्चाई सामने आ जाएगी। वह अपने पति की आंखों में देख नहीं पाती थी। उसका मन पछतावे से भर गया था। एक दिन अजीत ने उससे साफ साफ पूछ लिया कि क्या बात है। वह जानना चाहता था कि उसकी पत्नी इतनी बदली हुई क्यों है। यह सवाल सुनकर राधा की आंखों से आंसू बहने लगे। वह चुप रही, लेकिन उसकी खामोशी ही सब कुछ कह रही थी।


अब अजीत के सामने जीवन का एक कठिन मोड़ था। उसके सामने दो रास्ते थे। एक रास्ता था गुस्से और बदले का, और दूसरा रास्ता था समझदारी और क्षमा का। उसका दिल टूट चुका था, लेकिन फिर भी उसके मन में अपनी पत्नी के लिए प्रेम बाकी था। वह पूरी रात सोचता रहा। उसे अपने पुराने दिन याद आए जब वह और राधा एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। उसे याद आया कि राधा ने कभी उसे दुख देने की कोशिश नहीं की थी। शायद परिस्थितियों ने उसे कमजोर बना दिया था।


उधर राधा भी अपने अपराधबोध से टूट चुकी थी। वह सोचती थी कि शायद अब उसका घर हमेशा के लिए टूट जाएगा। वह अपने पति से माफी मांगना चाहती थी, लेकिन उसके पास शब्द नहीं थे। कहानी का यह हिस्सा इंसान के मन की कमजोरी और रिश्तों की जटिलता को दिखाता है। कभी कभी जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं जब सही और गलत के बीच फर्क करना कठिन हो जाता है। इंसान भावनाओं में बहकर ऐसे फैसले कर बैठता है जिनका पछतावा उसे जीवन भर रहता है।


अजीत के सामने अब यही सवाल था कि क्या वह अपने टूटे हुए विश्वास के साथ आगे बढ़ पाएगा या नहीं। दूसरी ओर राधा अपने किए पर गहरी शर्म और पछतावे में डूबी हुई थी। इस तरह उनकी जिंदगी एक ऐसे मोड़ पर खड़ी थी जहाँ से आगे का रास्ता उनके फैसलों पर निर्भर था। प्रेम, विश्वास, गलती और क्षमा की इस कहानी में हर पात्र अपने दिल के भीतर एक बड़ी लड़ाई लड़ रहा था।

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