"CHAHAT" - HINDI CLASSIC ROMANTIC MOVIE / BISWAIJEET & JEETENDRA MOVIE




Chahat is a 1971 Hindi-language romance film, produced by G. M. Roshan under the New Film Corporation banner and directed by Moni Bhattacharjee. It stars BiswajeetMala SinhaJeetendraMumtaz in lead roles and the music was composed by Laxmikant–Pyarelal. This is the only Black & White film of Jeetendra in his entire career.


यह एक ऐसे युवक की कहानी है जिसके जीवन में प्रेम, त्याग, अपराधबोध और परिवार के प्रति गहरा लगाव एक साथ जुड़े हुए हैं। कहानी एक छोटे से घर से शुरू होती है जहाँ एक बच्चे का जन्म होता है। उस बच्चे का नाम अशोक रखा जाता है। परंतु उसके जन्म के तुरंत बाद ही उसकी माँ इस संसार को छोड़ देती है। घर में दुख और सन्नाटा छा जाता है। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि बच्चे के जन्म के साथ ही माँ का जाना अशुभ संकेत है। यह बात सुनकर कई लोग उस छोटे बच्चे को मन ही मन दोष देने लगते हैं।


अशोक का पिता एक कमजोर स्वभाव का आदमी होता है। उसे अपने दुख से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता। धीरे धीरे वह शराब पीने लगता है। समय बीतने के साथ उसकी आदत बहुत बढ़ जाती है। वह अक्सर नशे में रहता है और घर की जिम्मेदारियों की ओर ध्यान नहीं देता। छोटा सा अशोक धीरे धीरे बड़ा होने लगता है, पर उसके जीवन में माँ का साया नहीं होता। उसे प्यार और स्नेह की बहुत कमी महसूस होती है।


कुछ वर्षों बाद उसके पिता दूसरी शादी कर लेते हैं। घर में एक नई औरत आती है जो अशोक की सौतेली माँ बनती है। कई लोग सोचते हैं कि शायद अब इस बच्चे का जीवन और कठिन हो जाएगा। परंतु ऐसा नहीं होता। वह नई माँ दिल की बहुत अच्छी होती है। जब वह छोटे अशोक को देखती है तो उसके मन में ममता जाग उठती है। वह उसे अपने ही बेटे की तरह प्यार करने लगती है।




अशोक भी अपनी सौतेली माँ से बहुत लगाव रखने लगता है। वह उसे सच्ची माँ की तरह मानता है। दोनों के बीच एक सच्चा और गहरा संबंध बन जाता है। धीरे धीरे घर का माहौल थोड़ा शांत हो जाता है। कुछ समय बाद उस माँ के घर एक और बच्चा जन्म लेता है। उसका नाम अरुण रखा जाता है। अब घर में दो बच्चे हो जाते हैं।


लोग सोचते हैं कि शायद दोनों बच्चों के बीच दूरी रहेगी क्योंकि वे सौतेले भाई हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होता। अशोक अपने छोटे भाई से बहुत प्यार करता है। वह हमेशा उसका ध्यान रखता है। अरुण भी अपने बड़े भाई को बहुत चाहता है। दोनों हमेशा साथ खेलते हैं, साथ पढ़ते हैं और हर जगह साथ दिखाई देते हैं।


उसी मोहल्ले में एक लड़की रहती है जिसका नाम गीता है। वह भी अक्सर उनके घर आ जाती है। वह दोनों भाइयों के साथ खेलती है और बातें करती है। धीरे धीरे तीनों की गहरी दोस्ती हो जाती है। मोहल्ले के लोग भी अक्सर उन्हें साथ साथ देखते हैं।


अरुण की माँ का एक भाई भी होता है जो कभी कभी घर आता है। उसका स्वभाव थोड़ा शरारती और चिढ़ाने वाला होता है। वह अक्सर अशोक को चिढ़ाता है और अपनी बहन के मन में उसके खिलाफ बातें भरने की कोशिश करता है। वह कहता है कि अशोक असली बेटा नहीं है इसलिए उससे दूरी रखनी चाहिए। लेकिन उसकी बहन उसकी बात कभी नहीं मानती। वह हमेशा अपने भाई को डांट देती है और कहती है कि अशोक भी उसके लिए उतना ही प्यारा है जितना अरुण।




घर में एक ही परेशानी होती है और वह है अशोक के पिता की शराब की आदत। वह अक्सर देर रात घर लौटते हैं। उस समय वह पूरी तरह नशे में होते हैं। कई बार वह गुस्से में आकर अपनी पत्नी पर चिल्लाने लगते हैं। कभी कभी तो वह हाथ भी उठा देते हैं। यह सब देखकर दोनों बच्चे बहुत दुखी हो जाते हैं।


अशोक अपनी माँ को बहुत प्यार करता है। जब वह अपने पिता को माँ पर हाथ उठाते देखता है तो उसका दिल दुख से भर जाता है। वह कई बार अपनी माँ से कहता है कि वह पिता के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाती। लेकिन माँ हमेशा उसे समझाती है कि वह शांत रहे और अपने पिता का सम्मान करे।


एक रात बहुत बुरा दृश्य सामने आता है। उस रात भी पिता नशे में घर लौटते हैं। वह बहुत गुस्से में होते हैं और अपनी पत्नी पर चिल्लाने लगते हैं। बात बढ़ जाती है और वह उसे मारने की कोशिश करते हैं। यह सब देखकर अशोक अपने कमरे से बाहर आता है और अपने पिता के सामने खड़ा हो जाता है। वह कहता है कि वह अपनी माँ को मत मारें।


पिता को यह बात बहुत बुरी लगती है। उन्हें लगता है कि उनका बेटा उनसे बदतमीजी कर रहा है। वह गुस्से में अशोक की ओर बढ़ते हैं। पर उसी समय उनका पैर फिसल जाता है और वह सीढ़ियों से नीचे गिर जाते हैं। गिरने से उन्हें गंभीर चोट लगती है और कुछ ही समय में उनकी मृत्यु हो जाती है।


यह सब इतना अचानक होता है कि माँ और बेटा दोनों स्तब्ध रह जाते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि क्या करें। माँ तुरंत पुलिस को खबर देती है और कहती है कि उसके पति नशे में थे और सीढ़ियों से गिरकर उनकी मौत हो गई। वह अपने बेटे को बचाने के लिए सच्चाई छिपा लेती है।




लेकिन इस घटना का असर अशोक के मन पर गहरा पड़ता है। उसे लगता है कि उसके कारण ही उसके पिता की मौत हुई है। यह विचार धीरे धीरे उसके मन में बैठ जाता है। वह अंदर ही अंदर अपराधबोध से भर जाता है। समय बीतता है और बच्चे बड़े हो जाते हैं। अब अशोक और अरुण जवान हो चुके होते हैं। गीता भी अब एक सुंदर और समझदार युवती बन चुकी होती है। तीनों की दोस्ती अभी भी वैसी ही रहती है जैसी बचपन में थी।


गीता के दिल में अशोक के लिए प्रेम पैदा हो जाता है। वह उसे बहुत चाहने लगती है। अशोक भी उसके भाव समझने लगता है। लेकिन दोनों कभी खुलकर अपने प्रेम का इजहार नहीं करते। दूसरी ओर अरुण यह समझने लगता है कि गीता उससे प्रेम करती है। क्योंकि गीता हमेशा उससे भी बहुत प्यार से बात करती है। एक समय आता है जब दोनों परिवार कुछ दिनों के लिए पहाड़ों की एक सुंदर जगह पर घूमने जाते हैं। वहां का वातावरण बहुत शांत और आनंददायक होता है। पहाड़, पेड़ और ठंडी हवा सबको अच्छा लगता है।


उसी समय दीपावली का त्योहार आता है। चारों ओर रोशनी और खुशी का माहौल होता है। सब लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं। घर में पटाखे जलाए जाते हैं। उसी दौरान एक पटाखा जलाते समय अचानक एक दुर्घटना हो जाती है। पटाखा फटकर सीधे अरुण के चेहरे के पास फट जाता है। अरुण को तुरंत अस्पताल ले जाया जाता है। डॉक्टर जांच करते हैं और बताते हैं कि उसकी आंखों की रोशनी चली गई है। यह सुनकर सब लोग दुखी हो जाते हैं। अशोक का दिल टूट जाता है। उसे लगता है कि उसके कारण फिर एक बड़ी दुर्घटना हो गई।


अब वह पूरी तरह टूट जाता है। उसे लगता है कि उसके कारण ही पहले पिता की मृत्यु हुई और अब उसके कारण भाई की आंखों की रोशनी चली गई। वह अपने भाई की सेवा में लग जाता है। वह हर समय उसके साथ रहता है ताकि अरुण को दुख महसूस न हो। अशोक एक अच्छे संगीत शिक्षक को बुलाता है ताकि अरुण संगीत सीख सके। वह उसे कई कार्यक्रमों में भी लेकर जाता है ताकि उसका मन लगा रहे। वह हर संभव कोशिश करता है कि उसका भाई खुश रहे।


इसी बीच अशोक को पता चलता है कि अरुण गीता से प्रेम करता है। एक दिन अरुण उससे कहता है कि वह गीता के माता पिता से उसके विवाह की बात करे। यह सुनकर अशोक के मन में तूफान उठता है। वह जानता है कि गीता उससे प्रेम करती है। पर वह अपने भाई को दुख नहीं देना चाहता। बहुत सोचने के बाद वह त्याग करने का फैसला करता है। वह गीता से बात करता है और कहता है कि उसे अरुण से विवाह कर लेना चाहिए। यह सुनकर गीता हैरान रह जाती है। वह कहती है कि वह अरुण को भाई की तरह मानती है और उससे विवाह नहीं कर सकती।


लेकिन अशोक अपनी बात पर अड़ा रहता है। अंत में वह गीता से कहता है कि वह अब उसके घर न आए और उसे भूल जाए। गीता बहुत दुखी हो जाती है। अशोक अपने भाई से झूठ बोलना शुरू कर देता है। वह कहता है कि गीता बीमार है और इसलिए नहीं आ रही। कुछ समय बाद वह यह भी कह देता है कि गीता की मृत्यु हो गई है। यह सुनकर अरुण बहुत दुखी हो जाता है। अशोक उसे दुख से दूर रखने के लिए उसे देश के अलग अलग स्थानों पर ले जाता है। वह उसे कार्यक्रमों और सभाओं में व्यस्त रखता है। उधर गीता समझ नहीं पाती कि अचानक सब लोग उससे दूर क्यों हो गए।


आखिरकार वह अशोक की माँ से मिलती है और सब सच बता देती है। माँ यह सुनकर स्तब्ध रह जाती है। वह समझ जाती है कि अशोक ने अपने भाई के लिए कितना बड़ा त्याग किया है। वह गीता से कहती है कि अब सच सामने आना चाहिए। गीता अरुण से मिलती है और उसे सच्चाई बताती है। अरुण यह सुनकर हैरान रह जाता है। उसे पता चलता है कि उसका भाई उससे झूठ बोलता रहा। वह गुस्से में अशोक से सवाल करता है। वह कहता है कि शायद उसने जानबूझकर उसे अंधा बना दिया और पहले पिता की मौत का भी वही कारण है। यह सुनकर अशोक चुप हो जाता है। उसके पास कोई जवाब नहीं होता। कहानी इस मोड़ पर खड़ी हो जाती है जहाँ प्रेम, त्याग और गलतफहमियों के बीच हर पात्र अपने अपने दर्द और सच्चाई से जूझ रहा होता है।

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