"SHATRANJ" - HINDI CLASSICAL SPY THRILLER MOVIE EXPLAIN / RAJENDRA KUMAR MOVIE



Shatranj is a 1969 Indian Hindi-language spy thriller film co-produced and directed by S. S. Vasan. His final directorial venture, it stars Rajendra Kumar and Waheeda Rehman, with MehmoodMadan PuriShashikalaHelenAchala SachdevManmohan Krishna and Agha in pivotal roles.


शतरंज एक पुरानी हिंदी फिल्म की कहानी है जो रहस्य, जासूसी, भावनाओं और देशभक्ति से भरी हुई है। यह कहानी एक ऐसे परिवार से शुरू होती है जो बाहर से बहुत खुश दिखाई देता है, लेकिन उसके अंदर कई छिपे हुए राज होते हैं। इस कहानी में प्रेम है, विश्वास है, धोखा है और देश के लिए बलिदान की भावना भी है। कहानी धीरे धीरे आगे बढ़ती है और हर मोड़ पर एक नया सच सामने आता है।


एक शहर में ठाकुर नाम का एक अमीर और सम्मानित आदमी रहता था। वह पढ़ा लिखा, समझदार और अपने परिवार से बहुत प्रेम करने वाला व्यक्ति था। उसकी पत्नी का नाम शारदा था। शारदा सुंदर, शांत स्वभाव की और स्नेही स्त्री थी। उनकी एक बेटी थी जिसका नाम मीना था। मीना जवान, चंचल और बहुत समझदार लड़की थी। यह परिवार बाहर से बहुत सुखी दिखाई देता था। घर बड़ा था, नौकर चाकर थे, किसी चीज की कमी नहीं थी।


लेकिन समय के साथ ठाकुर और शारदा के बीच दूरी बढ़ने लगी। ठाकुर अपने काम में बहुत व्यस्त रहता था। वह कई बार घर से बाहर रहता था और कई बातों को अपनी पत्नी से छिपाता था। शारदा को यह बात अच्छी नहीं लगती थी। वह चाहती थी कि उसका पति उससे हर बात साझा करे। लेकिन ठाकुर के काम में कुछ ऐसे राज थे जिन्हें वह किसी से नहीं बता सकता था। इसी कारण पति पत्नी के बीच गलतफहमियां बढ़ने लगीं।


एक दिन अचानक शारदा ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने अपनी बेटी मीना को साथ लिया और बिना ठाकुर को बताए देश छोड़कर एक ऐसे देश चली गई जहां अलग विचारधारा की सरकार थी और वहां सेना का शासन था। वह देश सख्त नियमों वाला था। वहां के लोग डर के साये में जीते थे। उस देश पर एक सैन्य जनरल का राज था जिसने कभी अपना चेहरा किसी को नहीं दिखाया था। लोग केवल उसकी आवाज सुनते थे और उसके आदेश का पालन करते थे।


जब ठाकुर को पता चला कि उसकी पत्नी और बेटी अचानक गायब हो गई हैं और देश छोड़कर चली गई हैं, तो वह बहुत परेशान हो गया। उसे समझ नहीं आया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। उसने बहुत खोजबीन करवाई लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अंत में उसने एक मशहूर जासूस की मदद लेने का फैसला किया। उस जासूस का नाम जय था।


जय एक होशियार, साहसी और देशभक्त युवक था। वह कई खतरनाक मिशन पूरे कर चुका था। वह अपनी जान की परवाह किए बिना सच का पता लगाता था। ठाकुर ने जय को बुलाया और सारी बात बताई। उसने कहा कि वह अपनी पत्नी और बेटी को सुरक्षित वापस लाना चाहता है। उसे डर था कि वे किसी मुसीबत में न फंस गई हों।


जय ने यह काम स्वीकार कर लिया। वह जानता था कि यह मिशन आसान नहीं होगा। जिस देश में शारदा और मीना गई थीं, वहां बाहरी लोगों पर कड़ी नजर रखी जाती थी। वहां जासूसी करना जान जोखिम में डालने जैसा था। फिर भी जय ने हिम्मत नहीं हारी। वह उस देश में एक नई पहचान लेकर पहुंचा। उसने अपना नाम बदलकर शिनराज रख लिया। उसने ऐसा रूप बनाया कि कोई उसे पहचान न सके।


वह उस देश में एक आम आदमी बनकर रहने लगा। उसने वहां के लोगों से दोस्ती की, उनकी भाषा सीखी और उनके तौर तरीके समझे। धीरे धीरे उसने जानकारी इकट्ठा करनी शुरू की। उसे पता चला कि उस देश में बहुत सख्ती है। सरकार हर व्यक्ति पर नजर रखती है। जो भी सरकार के खिलाफ जाता है, उसे सजा मिलती है।


कुछ दिनों की खोज के बाद जय को पता चला कि मीना एक बड़े होटल में नृत्यांगना के रूप में काम कर रही है। यह सुनकर उसे हैरानी हुई। एक सम्मानित परिवार की लड़की इस तरह काम क्यों कर रही थी। उसने उस होटल में जाना शुरू किया। उसने मीना को देखा। मीना खूबसूरत कपड़े पहनकर नृत्य करती थी, लेकिन उसके चेहरे पर खुशी नहीं थी। उसकी आंखों में उदासी साफ दिखाई देती थी।


जय ने धीरे धीरे मीना से संपर्क बनाने की कोशिश की। पहले तो मीना उससे दूर रही। उसे किसी पर भरोसा नहीं था। वह हर नए आदमी को शक की नजर से देखती थी। लेकिन जय ने धैर्य रखा। उसने मीना से दोस्ती की और उसकी मदद करने की इच्छा जताई। कुछ समय बाद मीना को लगा कि जय बुरा इंसान नहीं है।


एक दिन जय ने मीना से पूछा कि वह यहां क्यों आई है और क्यों वापस अपने देश नहीं जाना चाहती। पहले तो मीना चुप रही। फिर धीरे धीरे उसने अपने दिल की बात बतानी शुरू की। उसने बताया कि उसकी मां शारदा को ठाकुर के कुछ कामों पर शक था। उन्हें लगा कि ठाकुर किसी ऐसे काम में शामिल है जो देश के लिए ठीक नहीं है। शारदा को लगा कि उनके पति कुछ गलत लोगों के साथ जुड़े हुए हैं।


शारदा को डर था कि अगर वे भारत में रहेंगी तो वे किसी बड़ी साजिश का हिस्सा बन जाएंगी। इसलिए उन्होंने वहां से दूर जाने का फैसला किया। लेकिन जिस देश में वे आईं, वहां की सच्चाई कुछ और ही थी। यहां आकर उन्हें पता चला कि यहां के शासक भी जनता पर अत्याचार करते हैं। वे लोग अपने फायदे के लिए दूसरों का इस्तेमाल करते हैं।


शारदा ने सोचा था कि वे यहां सुरक्षित रहेंगी, लेकिन वे एक नई मुसीबत में फंस गईं। इस देश के कुछ अधिकारियों को पता चल गया कि शारदा भारत से आई है और उसके पति एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। उन्होंने शारदा को दबाव में लिया। उनसे जानकारी निकालने की कोशिश की गई। मीना को होटल में काम करने के लिए मजबूर किया गया ताकि वे उन पर नजर रख सकें।


यह सब सुनकर जय को सच्चाई का अंदाजा हुआ। उसने समझा कि मामला केवल परिवार का नहीं है, बल्कि इसमें देश की सुरक्षा भी जुड़ी है। उसने गुप्त रूप से जांच शुरू की। उसे पता चला कि उस देश का रहस्यमय जनरल भारत के खिलाफ एक बड़ी योजना बना रहा है। वह भारत के कुछ लोगों को अपने साथ मिलाकर जासूसी करवा रहा था।


जय ने सबूत इकट्ठा करने शुरू किए। उसने देखा कि होटल में कुछ लोग गुप्त बैठकें करते हैं। मीना को भी कई बार उन बैठकों में नृत्य करने के लिए बुलाया जाता था ताकि कोई शक न करे। जय ने अपनी चतुराई से उन बैठकों की बातें सुनीं। उसे पता चला कि जनरल ने भारत में अपने कुछ एजेंट भेजे हैं।


इसी दौरान जय की मुलाकात शारदा से भी हुई। शारदा पहले तो जय पर विश्वास नहीं कर पाईं। उन्हें लगा कि वह भी दुश्मन देश का आदमी है। लेकिन जब जय ने अपना असली उद्देश्य बताया और ठाकुर का संदेश सुनाया, तो शारदा की आंखों में आंसू आ गए। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने बिना पूरी सच्चाई जाने अपने पति पर शक किया और घर छोड़ दिया।


लेकिन अब मामला बहुत आगे बढ़ चुका था। वे सीधे वापस नहीं जा सकती थीं। उन पर नजर रखी जा रही थी। जय ने एक योजना बनाई। उसने सोचा कि पहले जनरल की असली पहचान और उसकी योजना का पर्दाफाश करना जरूरी है। तभी वे सुरक्षित निकल पाएंगे।


कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आता है जब जय को पता चलता है कि वह रहस्यमय जनरल कोई और नहीं बल्कि एक ऐसा व्यक्ति है जो लंबे समय से अपने देश के खिलाफ काम कर रहा है। वह छिपकर अपना चेहरा बदलकर लोगों को धोखा देता रहा है। जय ने उसके गुप्त ठिकाने का पता लगा लिया।


अब जय के सामने सबसे बड़ा खतरा था। अगर वह पकड़ा जाता तो उसकी जान जा सकती थी। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपने देश के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। एक रात वह जनरल के ठिकाने पर पहुंचा। वहां कड़ी सुरक्षा थी। उसने चुपके से अंदर प्रवेश किया।


वहां उसने देखा कि कई नक्शे और कागज रखे हुए हैं। उन पर भारत के महत्वपूर्ण स्थानों की जानकारी थी। उसने समझ लिया कि हमला होने वाला है। उसने तुरंत सबूत इकट्ठा किए। तभी कुछ सैनिकों ने उसे देख लिया। वहां जोरदार संघर्ष हुआ। जय ने बहादुरी से मुकाबला किया।


आखिरकार उसने जनरल का सामना किया। जनरल ने अपना चेहरा छिपा रखा था। दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई। जनरल ने जय को अपने साथ आने का लालच दिया। उसने कहा कि वह उसे धन और शक्ति देगा। लेकिन जय ने साफ मना कर दिया। उसने कहा कि उसके लिए देश सबसे ऊपर है।


दोनों के बीच लड़ाई हुई। अंत में जय ने जनरल को हरा दिया। उसकी असली पहचान सबके सामने आ गई। लोगों को पता चला कि उनका शासक उन्हें धोखा दे रहा था। देश में हलचल मच गई। सेना के कई अधिकारी जनरल के खिलाफ हो गए। इस अवसर का फायदा उठाकर जय ने शारदा और मीना को वहां से निकाला। वे सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। जय ने भारत को सारी जानकारी भेज दी। जनरल की योजना विफल हो गई।


जब शारदा और मीना वापस भारत लौटीं, तो ठाकुर उनसे मिलकर भावुक हो गया। परिवार फिर से एक हो गया। शारदा ने अपने पति से माफी मांगी। ठाकुर ने भी माना कि उसे अपनी पत्नी से कोई बात नहीं छिपानी चाहिए थी। कहानी का अंत इस संदेश के साथ होता है कि शक और गलतफहमी परिवार को तोड़ सकती है, लेकिन विश्वास और सच्चाई उसे फिर से जोड़ सकते हैं। साथ ही यह भी दिखाया गया कि देश के लिए काम करने वाले लोग कितने साहसी होते हैं। वे अपने निजी दुख दर्द को भूलकर देश की रक्षा करते हैं।


यह कहानी केवल एक जासूसी कहानी नहीं है। यह परिवार, प्रेम, विश्वास और देशभक्ति की कहानी है। इसमें दिखाया गया है कि जीवन एक शतरंज की तरह है। हर चाल सोच समझकर चलनी पड़ती है। अगर एक चाल गलत हो जाए तो पूरा खेल बदल सकता है। लेकिन साहस, बुद्धि और सच्चाई से हर मुश्किल को हराया जा सकता है।

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