"BUDDHA MIL GAYA" - HINDI CLASSICAL COMEDY THRILLER MOVIE



Buddha Mil Gaya is a 1971 Hindi-language comedy thriller film, produced by L. B. Lachman and directed by Hrishikesh Mukherjee. The film stars Om PrakashNavin NischolDeven Verma, Archana, Sonia SahniAruna IraniAsit Sen and Lalita Pawar. The music is by R.D. Burman and the lyrics are by Majrooh Sultanpuri


यह कहानी दो बेरोजगार युवकों की है जिनका जीवन मजाक, आलस और छोटी छोटी चालाकियों से भरा हुआ है। उनका नाम अजय और भोला है। दोनों शहर में रहते हैं, पर उनके पास कोई पक्का काम नहीं है। वे कभी कभी तस्वीरें खींचने का काम करते हैं। जब किसी को किसी समारोह की तस्वीर चाहिए होती है या कोई प्रतियोगिता होती है तब वे वहां जाकर तस्वीरें लेने की कोशिश करते हैं। पर ऐसा काम बहुत कम मिलता है। इसलिए उनके पास पैसे भी बहुत कम रहते हैं।


अजय और भोला एक पुराने से घर में किराये पर रहते हैं। उस घर की मालकिन एक बहुत बूढ़ी और सख्त स्वभाव की औरत है। वह हर समय किराये की बात करती रहती है। अजय और भोला पिछले तीन महीनों से किराया नहीं दे पाए हैं। बूढ़ी औरत हर दिन उन्हें डांटती है और कहती है कि अगर किराया नहीं दिया तो वह उन्हें घर से निकाल देगी। अजय और भोला उससे बहुत डरते हैं, इसलिए जब भी वह सामने आती है तो वे चुपचाप कहीं छिप जाते हैं।


उस बूढ़ी औरत के साथ उसकी एक नातिन भी रहती है जिसका नाम दीपा है। दीपा बहुत अच्छी, समझदार और दयालु लड़की है। उसे पता है कि अजय और भोला बुरे लोग नहीं हैं। वे सिर्फ किस्मत के मारे हैं। इसलिए जब भी अजय और भोला घर में चुपके से अंदर जाना चाहते हैं या बाहर निकलना चाहते हैं, तो दीपा उनकी मदद करती है। जब बूढ़ी औरत सो जाती है तब दीपा धीरे से दरवाजा खोल देती है ताकि वे बिना शोर किए अंदर आ सकें।


धीरे धीरे अजय और दीपा के बीच दोस्ती होने लगती है। वे कभी कभी छत पर बैठकर बातें करते हैं। दीपा अजय से पूछती है कि वह जिंदगी में क्या करना चाहता है। अजय कहता है कि वह अच्छा काम करना चाहता है और नाम कमाना चाहता है, लेकिन अभी तक उसे सही मौका नहीं मिला। दीपा उसकी बातें सुनकर उसे हिम्मत देती है। इन मुलाकातों में दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए प्यार पैदा होने लगता है।




उधर भोला भी अपने तरीके से काम खोजने की कोशिश करता रहता है। एक दिन उसे पता चलता है कि पास में एक महिलाओं की संस्था है जहां महिलाएं अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए काम करती हैं। भोला सोचता है कि अगर वह वहां की गतिविधियों की तस्वीरें ले ले तो शायद उसे किसी प्रतियोगिता में इनाम मिल सकता है। वह वहां जाता है और तस्वीरें लेने लगता है। उस संस्था की अध्यक्ष का नाम पार्वती है। पार्वती बहुत बहादुर और समझदार महिला है। वह महिलाओं को आत्मविश्वास से जीना सिखाती है। भोला जब उसे काम करते हुए देखता है तो उसके मन में उसके लिए सम्मान पैदा हो जाता है। धीरे धीरे वह पार्वती को पसंद करने लगता है। वह वहां बार बार जाने लगता है ताकि उसकी तस्वीरें ले सके और उससे बात कर सके।


एक दिन अजय और भोला चाय की दुकान पर बैठे अखबार पढ़ रहे होते हैं। तभी उनकी नजर एक खबर पर पड़ती है। खबर में लिखा होता है कि एक बुजुर्ग आदमी कई दिनों से लापता है। उसका नाम गिरधारीलाल शर्मा है। अखबार में लिखा होता है कि अगर वह पंद्रह दिनों के अंदर वापस नहीं आता तो उसकी बहुत बड़ी संपत्ति उसके व्यापार के साथियों में बांट दी जाएगी। उस संपत्ति की कीमत बहुत ज्यादा होती है। अजय और भोला यह खबर पढ़कर सोच में पड़ जाते हैं। वे मजाक में कहते हैं कि अगर वह बूढ़ा आदमी मिल जाए तो शायद उन्हें भी कुछ फायदा हो सकता है। उसी दिन वे शहर के एक सुंदर बगीचे में घूमने जाते हैं। वहां पेड़, फूल और हरियाली होती है। लोग टहल रहे होते हैं। अचानक उनकी नजर एक बूढ़े आदमी पर पड़ती है जो अकेला एक बेंच पर बैठा होता है।


वह बूढ़ा आदमी बहुत शांत दिखाई देता है। अजय और भोला उसे ध्यान से देखते हैं। उन्हें लगता है कि यह वही आदमी हो सकता है जिसकी तस्वीर अखबार में छपी है। वे धीरे से उसके पास जाते हैं और बातचीत शुरू करते हैं। बातों ही बातों में उन्हें यकीन हो जाता है कि वह सच में गिरधारीलाल ही है। अब अजय और भोला के मन में लालच आ जाता है। वे सोचते हैं कि अगर वे इस आदमी को अपने पास रख लें और सही समय पर उसकी खबर दें तो उन्हें बहुत पैसा मिल सकता है। इसलिए वे गिरधारीलाल को अपने साथ अपने घर ले आते हैं और बूढ़ी मकान मालकिन से कहते हैं कि यह उनके चाचा हैं जो गांव से आए हैं।


बूढ़ी औरत ज्यादा सवाल नहीं करती। वह सोचती है कि शायद सच में उनका कोई रिश्तेदार होगा। गिरधारीलाल उस घर में रहने लगता है। अजय और भोला अंदर ही अंदर योजना बनाते रहते हैं कि किस तरह से इस बूढ़े आदमी की वजह से पैसा कमाया जाए। लेकिन गिरधारीलाल बहुत समझदार आदमी होता है। वह धीरे धीरे उनकी बातों से समझ जाता है कि ये दोनों उसके बारे में कुछ योजना बना रहे हैं। एक दिन वह उनसे कहता है कि उसे यहां से जाने दिया जाए। लेकिन अजय और भोला उसे जाने नहीं देते। वे चाहते हैं कि वह कुछ दिन और वहीं रहे।


एक दिन अजय और भोला को पता चलता है कि गिरधारीलाल के पास एक बंदूक भी है। यह देखकर वे थोड़ा डर जाते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि यह बूढ़ा आदमी सच में कैसा है। वह बाहर से बहुत शांत दिखाई देता है लेकिन उसके पास हथियार भी है। इससे उनके मन में शक पैदा हो जाता है। इस बीच दीपा और गिरधारीलाल के बीच भी बातचीत होने लगती है। गिरधारीलाल को पता चलता है कि दीपा बचपन में ही अनाथ हो गई थी। उसके माता पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। यह सुनकर गिरधारीलाल का दिल पिघल जाता है। वह दीपा को अपनी बेटी की तरह देखने लगता है।


दीपा को गाने का बहुत शौक होता है। गिरधारीलाल उसे संगीत सिखाने लगता है। वह उसे पुराने और मधुर गीत गाना सिखाता है। दीपा उसकी बातों से बहुत कुछ सीखती है। धीरे धीरे उनके बीच पिता और बेटी जैसा स्नेह पैदा हो जाता है। इसी दौरान शहर में कुछ अजीब घटनाएं होने लगती हैं। गिरधारीलाल के पुराने व्यापार के साथियों में से कुछ लोग एक एक करके मारे जाते हैं। यह खबर सुनकर अजय और भोला बहुत डर जाते हैं। उन्हें लगता है कि शायद गिरधारीलाल ही इन सबके पीछे है। वे सोचते हैं कि शायद वह बदला ले रहा है।


उधर उन व्यापारियों में एक आदमी होता है जिसका नाम भगत है। वही असली योजना बनाने वाला आदमी होता है जिसने पहले गिरधारीलाल को झूठे मामले में फंसाया था। अब जब उसे अपने साथियों की मौत की खबर मिलती है तो वह डर जाता है। उसे लगता है कि शायद गिरधारीलाल उससे बदला लेने वाला है। भगत अपने एक आदमी को बुलाता है जिसका नाम शेट्टी है। शेट्टी उसका अंगरक्षक होता है। भगत उसे आदेश देता है कि वह दीपा को पकड़कर ले आए ताकि वह गिरधारीलाल को दबाव में ला सके। उधर भगत के दफ्तर में एक सहायक लड़की भी काम करती है जिसका नाम मोना है।





मोना बाहर से एक साधारण कर्मचारी दिखाई देती है लेकिन उसके दिल में एक बड़ा राज छिपा होता है। वह असल में गिरधारीलाल की बेटी होती है। जब उसके पिता को झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया था तब उसका जीवन भी बदल गया था। उसने अपना नाम बदल लिया और भगत के दफ्तर में काम करना शुरू कर दिया ताकि सही समय आने पर वह अपने पिता के साथ हुए अन्याय का बदला ले सके।


एक दिन सब लोग आमने सामने आ जाते हैं। भगत, गिरधारीलाल, अजय, भोला, दीपा और बाकी लोग एक जगह पर इकट्ठा हो जाते हैं। वहां बहुत अफरा तफरी मच जाती है। हर कोई एक दूसरे पर शक करता है। बातें तेज होने लगती हैं। उसी समय सच्चाई धीरे धीरे सामने आने लगती है। मोना सबके सामने बताती है कि वह गिरधारीलाल की बेटी है। यह सुनकर गिरधारीलाल भावुक हो जाता है। कई सालों बाद वह अपनी बेटी को देखता है। दोनों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। फिर एक और बड़ा राज सामने आता है। शेट्टी असल में भगत का आदमी नहीं बल्कि पुलिस का गुप्त अधिकारी होता है। वह काफी समय से भगत की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। उसने सबूत इकट्ठा कर लिए थे।


आखिर में सच्चाई पूरी तरह सामने आ जाती है कि असली अपराधी गिरधारीलाल नहीं बल्कि भगत है। वही अपने साथियों की हत्या करवा रहा था ताकि सारे सबूत खत्म हो जाएं और कोई भी उसके पुराने अपराधों का राज न खोल सके। पुलिस भगत को गिरफ्तार कर लेती है। गिरधारीलाल निर्दोष साबित होता है। उसकी बेटी मोना उसे गले लगाती है। दोनों की आंखों में खुशी के आंसू होते हैं। अजय और भोला भी अपनी गलती समझ जाते हैं। उन्हें एहसास होता है कि लालच इंसान को गलत रास्ते पर ले जाता है। वे गिरधारीलाल से माफी मांगते हैं। गिरधारीलाल उन्हें माफ कर देता है क्योंकि उसका दिल बहुत बड़ा होता है।


दीपा और अजय का प्रेम भी मजबूत हो जाता है। भोला और पार्वती भी एक दूसरे के करीब आ जाते हैं। सब लोग मिलकर एक नई शुरुआत करते हैं। अब अजय और भोला सच में मेहनत करके ईमानदारी से काम करने का निश्चय करते हैं। कहानी का अंत इस संदेश के साथ होता है कि कभी कभी जो व्यक्ति बाहर से साधारण और शांत दिखाई देता है, वही सच्चाई और न्याय के लिए सबसे मजबूत साबित होता है। और यह भी कि लालच और धोखा अंत में हमेशा हारते हैं जबकि सच्चाई और धैर्य की जीत होती है। 

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