"BANPHOOL" - HINDI CLASSIC ROMANTIC ACTION FILM / JEETENDRA / SHATRUGHAN SINHA MOVIE



Banphool is a 1971 Indian Hindi-language romance film, produced by Harish Upadyaya and C.D. Shah under the Filmlands banner and directed by Vijay Bhatt. Starring JeetendraBabitaShatrughan Sinha and music composed by Laxmikant Pyarelal 


बनफूल एक सरल और भावनाओं से भरी प्रेम कहानी है जिसमें गांव की सादगी, सच्चा प्रेम, लालच, अहंकार और अंत में सच्चाई की जीत दिखाई जाती है। यह कहानी एक ऐसे युवक की है जिसका दिल साफ है, जो प्रकृति से प्रेम करता है और अपने हाथों की मेहनत से जीवन जीता है। यह कहानी एक ऐसे प्रेम की है जो धन और शक्ति से नहीं, बल्कि सच्चाई और विश्वास से जुड़ा है। इसमें एक हाथी भी है जो केवल जानवर नहीं, बल्कि अपने मालिक का सच्चा मित्र है।


कहानी की शुरुआत एक सुंदर चाय बागान से होती है। चारों ओर हरियाली है, ऊंचे पेड़ हैं, सुबह की धूप पत्तियों पर चमकती है। वहां मजदूर सुबह से शाम तक काम करते हैं। उसी बागान के किनारे एक छोटी सी झोपड़ी में हरिया नाम का युवक अपनी बूढ़ी दादी के साथ रहता है। हरिया की मां बाप बचपन में ही दुनिया छोड़ गए थे। उसकी दादी ने उसे पाला है। दादी बूढ़ी हैं, लेकिन दिल से मजबूत हैं। वह हरिया को अच्छे संस्कार देती हैं और सिखाती हैं कि इंसान को ईमानदारी से जीना चाहिए।


हरिया चाय बागान में काम करता है। उसका काम हाथी चलाना है। वह हाथी का चालक है। उसके हाथी का नाम राजा है। हरिया और राजा का रिश्ता बहुत गहरा है। राजा केवल एक जानवर नहीं, बल्कि उसका दोस्त है। हरिया उससे बातें करता है, उसे प्यार से सहलाता है, उसे अपने दुख सुख सुनाता है। राजा भी उसे समझता है। जब हरिया उदास होता है तो राजा अपनी सूंड से उसे छूकर जैसे दिलासा देता है।




चाय बागान का मालिक एक अमीर और सम्मानित व्यक्ति है। वह सख्त जरूर है, लेकिन अन्याय नहीं करता। उसका एक बेटा है जिसका नाम अजय है। अजय पढ़ा लिखा है, शहर में पला बढ़ा है और अपने पिता की दौलत पर गर्व करता है। उसमें घमंड है और वह सोचता है कि सब कुछ पैसे से खरीदा जा सकता है।


एक दिन बागान के पास एक घुमंतू टोली आती है। वे लोग जगह जगह घूमते हैं, गीत गाते हैं और सामान बेचते हैं। उसी टोली में एक सुंदर और चंचल लड़की है जिसका नाम गुलाबी है। गुलाबी के चेहरे पर मासूमियत है और आंखों में चमक है। वह स्वतंत्र स्वभाव की है। उसे बंधन पसंद नहीं।


हरिया पहली बार गुलाबी को तब देखता है जब वह नदी के किनारे पानी भर रही होती है। हवा चल रही होती है और पेड़ों की पत्तियां हिल रही होती हैं। हरिया उसे देखकर ठिठक जाता है। गुलाबी भी उसे देखती है और मुस्कुरा देती है। उस मुस्कान में कुछ ऐसा होता है जो दोनों के दिल को छू जाता है।


धीरे धीरे दोनों की मुलाकातें होने लगती हैं। हरिया उसे बागान दिखाता है, अपने हाथी राजा से मिलवाता है। गुलाबी राजा से नहीं डरती। वह उसके माथे को प्यार से छूती है। राजा भी उसे स्वीकार कर लेता है। दादी को जब यह सब पता चलता है तो वह पहले थोड़ा चिंतित होती हैं, लेकिन जब गुलाबी को देखती हैं तो उनके मन में स्नेह जाग उठता है।


हरिया और गुलाबी एक दूसरे से प्रेम करने लगते हैं। वे भविष्य के सपने देखते हैं। हरिया कहता है कि वह मेहनत करेगा और एक छोटा सा घर बनाएगा। गुलाबी कहती है कि उसे बस सच्चा साथ चाहिए, धन नहीं। दोनों शादी करने का निश्चय करते हैं। दादी भी खुश होती हैं और आशीर्वाद देती हैं।


लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है जब अजय की नजर गुलाबी पर पड़ती है। वह उसे पहली बार एक मेले में देखता है जहां वह नाच गा रही होती है। अजय उसकी सुंदरता से प्रभावित होता है। वह सोचता है कि ऐसी लड़की उसके घर की शोभा बनेगी। उसे यह पसंद नहीं कि गुलाबी जैसे साधारण परिवार की लड़की हरिया जैसे मजदूर से प्रेम करे।


अजय गुलाबी के पास जाता है और उसे धन और आराम का लालच देता है। वह कहता है कि अगर वह उससे विवाह करे तो उसे कभी किसी चीज की कमी नहीं होगी। गुलाबी साफ मना कर देती है। वह कहती है कि उसका दिल हरिया का है। अजय को यह अपमान लगता है। उसके मन में जलन और क्रोध भर जाता है।


अजय को जब पता चलता है कि गुलाबी हरिया से प्रेम करती है, तो उसका घमंड टूट जाता है। वह सोचता है कि एक गरीब मजदूर उससे बेहतर कैसे हो सकता है। वह हरिया को रास्ते से हटाने की योजना बनाता है। वह अपने कुछ आदमियों से कहता है कि वे हरिया को डराएं धमकाएं ताकि वह पीछे हट जाए।


एक रात जब हरिया जंगल के रास्ते से लौट रहा होता है, कुछ लोग उस पर हमला करते हैं। राजा जोर से चिंघाड़ता है और अपने मालिक को बचाता है। हमलावर भाग जाते हैं। हरिया समझ जाता है कि यह सब अजय की चाल है। वह दादी को कुछ नहीं बताता, लेकिन अंदर ही अंदर सतर्क हो जाता है।


अजय हार नहीं मानता। वह एक और योजना बनाता है। वह गुलाबी को जबरन उठा लेने की कोशिश करता है। एक दिन जब गुलाबी अकेली होती है, अजय उसे पकड़ने की कोशिश करता है। गुलाबी चिल्लाती है। उसकी आवाज सुनकर हरिया और राजा वहां पहुंचते हैं। राजा अपनी सूंड से अजय को दूर फेंक देता है। अजय जमीन पर गिरता है और अपमानित महसूस करता है।


उसके मन में बदले की आग और तेज हो जाती है। वह सोचता है कि जब तक हरिया जिंदा है, वह गुलाबी को नहीं पा सकता। एक दिन वह बंदूक लेकर जंगल में जाता है जहां हरिया और राजा लकड़ी लाने गए होते हैं। वह छिपकर इंतजार करता है। जब राजा आगे बढ़ता है, अजय गोली चला देता है। गोली राजा को लगती है। राजा दर्द से चीखता है और जमीन पर गिर जाता है।




हरिया यह देखकर पागल हो जाता है। वह राजा के पास दौड़ता है। राजा उसकी गोद में सिर रखता है और धीरे धीरे उसकी सांसें रुक जाती हैं। हरिया की आंखों में आंसू और क्रोध दोनों होते हैं। उसे लगता है जैसे उसका अपना भाई उससे छिन गया हो। वह अजय को मार डालने की ठान लेता है।


हरिया बंदूक उठाकर अजय की तलाश में निकलता है। गुलाबी उसे रोकने की कोशिश करती है। वह कहती है कि खून से खून का बदला लेने से राजा वापस नहीं आएगा। लेकिन हरिया का दिल दुख और गुस्से से भरा है। वह अजय के घर पहुंचता है।


उसी समय अजय के पिता को सच्चाई का पता चलता है। उन्हें मालूम होता है कि उनके बेटे ने एक निर्दोष जानवर को मार डाला और हरिया के साथ अन्याय किया। वे शर्मिंदा होते हैं। जब हरिया गुस्से में उनके सामने पहुंचता है, वे उसके सामने खड़े हो जाते हैं। वे कहते हैं कि अगर किसी को सजा मिलनी है तो कानून देगा, न कि बदले की भावना।


हरिया कांपते हाथों से बंदूक नीचे कर देता है। उसे दादी की सीख याद आती है। वह रो पड़ता है। अजय के पिता उससे माफी मांगते हैं और वादा करते हैं कि न्याय होगा। वे अजय को डांटते हैं और उसके व्यवहार पर नाराज होते हैं।


कुछ समय बाद अजय के पिता को अपने अतीत का एक रहस्य पता चलता है। उन्हें मालूम होता है कि उनका कुछ पुराना फैसला गलत था और उसका असर आज तक चल रहा है। उन्हें एहसास होता है कि संपत्ति और घमंड ने उनके परिवार को गलत रास्ते पर डाल दिया है। वे अपनी वसीयत बदलने का निश्चय करते हैं। वे तय करते हैं कि संपत्ति का बड़ा हिस्सा मजदूरों और जरूरतमंदों के लिए रखा जाएगा।


जब अजय को यह पता चलता है तो वह और भड़क उठता है। वह सोचता है कि उसके पिता उसे सब कुछ से वंचित कर रहे हैं। वह बंदूक लेकर अपने पिता के सामने खड़ा हो जाता है। वह कहता है कि जो भी उसके रास्ते में आएगा, वह उसे खत्म कर देगा। उसके पिता दुखी होकर उसे समझाते हैं कि धन से ज्यादा जरूरी इंसानियत है।


उसी समय हरिया वहां पहुंचता है। वह अजय को रोकता है। वह कहता है कि उसने अपना दोस्त खोया है, लेकिन वह और खून नहीं देखना चाहता। गुलाबी भी वहां आती है। वह अजय से कहती है कि प्रेम जबरदस्ती से नहीं मिलता। अगर वह सच में बदलना चाहता है तो उसे अपने अंदर की बुराई खत्म करनी होगी।


अजय कुछ पल के लिए चुप हो जाता है। उसके पिता की आंखों में आंसू होते हैं। वह अपने किए पर सोचने लगता है। धीरे धीरे उसका गुस्सा शांत होता है। वह बंदूक नीचे रख देता है। वह अपने पिता से माफी मांगता है। वह हरिया की ओर देखता है और शर्मिंदा होता है।


कहानी का अंत एक नई शुरुआत के साथ होता है। अजय अपने व्यवहार को बदलने का निश्चय करता है। वह मजदूरों के साथ अच्छा व्यवहार करने लगता है। हरिया और गुलाबी का विवाह होता है। दादी खुशी से आशीर्वाद देती हैं। राजा की याद सबके दिल में रहती है। बागान में उसके लिए एक छोटा सा स्मारक बनाया जाता है।


हरिया सीखता है कि गुस्से से नहीं, धैर्य और सच्चाई से जीत मिलती है। अजय सीखता है कि धन और शक्ति से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता। प्रेम सच्चा हो तो हर कठिनाई को पार कर सकता है। बनफूल की यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में सादगी, प्रेम और क्षमा ही सबसे बड़े मूल्य हैं। जो फूल जंगल में खिलता है, वह भी अपनी खुशबू से सबका दिल जीत लेता है। वैसे ही सच्चा प्रेम और सच्ची नीयत हर दिल को छू सकती है।

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