जिंदगी और ख्वाब एक बहुत ही भावनात्मक और दर्द से भरी कहानी है। यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसने बचपन से ही दुख और अपमान सहा, लेकिन उसके दिल में फिर भी एक बेहतर जीवन का सपना जिंदा रहा। यह कहानी हमें दिखाती है कि इंसान की जिंदगी में कितने उतार चढ़ाव आते हैं और कैसे सपने कभी कभी टूट भी जाते हैं, फिर भी दिल उम्मीद नहीं छोड़ता।
इस कहानी की नायिका शांति है। शांति एक अनाथ लड़की है। उसके माता पिता का साया बचपन में ही उसके सिर से उठ गया था। वह बहुत छोटी थी जब उसे समझ में आया कि दुनिया में उसका अपना कोई नहीं है। उसके घर में एक सौतेली मां थी जो उसे कभी अपनापन नहीं देती थी। सौतेली मां का स्वभाव बहुत कठोर था। वह शांति से हर समय काम करवाती, उसे डांटती, मारती और अपमानित करती। घर के दूसरे लोगों के सामने भी उसे ताने देती। शांति चुपचाप सब सहती रहती थी।
शांति का बचपन खेल कूद और हंसी से भरा नहीं था। वह सुबह से रात तक घर का सारा काम करती थी। पानी भरना, बर्तन धोना, झाड़ू लगाना, खाना बनाना, सब कुछ वही करती। अगर उससे जरा सी भी गलती हो जाती तो सौतेली मां उसे बुरा भला कहती। शांति के मन में बहुत दर्द था, लेकिन वह किसी से कुछ नहीं कह पाती थी। वह रात को चुपचाप रो लेती और फिर सुबह उठकर वही जीवन शुरू कर देती।
समय बीतता गया और शांति बड़ी होने लगी। वह बहुत सुंदर और भोली लड़की थी। उसके चेहरे पर मासूमियत थी। उसके मन में एक ही सपना था कि एक दिन उसे कोई ऐसा घर मिले जहां उसे प्यार और सम्मान मिले। वह सोचती थी कि विवाह के बाद शायद उसकी जिंदगी बदल जाएगी। उसे लगता था कि पति का घर उसके लिए नई शुरुआत होगा।
लेकिन उसकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। उसकी सौतेली मां उसे बोझ समझती थी। वह जल्दी से जल्दी उसे घर से विदा करना चाहती थी। एक दिन उसने शांति का विवाह शंकर नाम के आदमी से तय कर दिया। शंकर उम्र में शांति से बहुत बड़ा था। वह कठोर स्वभाव का और संदिग्ध काम करने वाला आदमी था। उसके बारे में मोहल्ले में तरह तरह की बातें होती थीं, लेकिन सौतेली मां ने इन बातों की परवाह नहीं की। उसने केवल यह देखा कि उसे शांति से छुटकारा मिल रहा है।
शांति को जब यह बताया गया कि उसका विवाह शंकर से होगा तो वह घबरा गई। उसने अपनी सौतेली मां से विनती की कि वह यह रिश्ता न करे, लेकिन उसकी बात किसी ने नहीं सुनी। बहुत साधारण तरीके से उसका विवाह कर दिया गया। शांति अपने नए घर चली गई, मन में डर और आशंका लेकर।
शंकर का घर भी वैसा ही था जैसा उसका स्वभाव। वहां न स्नेह था न शांति। शंकर का व्यवहार कठोर और डरावना था। वह देर रात घर आता, गुस्से में रहता और शांति से ठीक से बात भी नहीं करता। शांति ने सोचा था कि विवाह के बाद उसका जीवन सुधरेगा, लेकिन उसकी हालत पहले से भी ज्यादा खराब हो गई।
शंकर गलत धंधों में शामिल था। वह अपराधियों के साथ उठता बैठता था। शांति को इन सब बातों का पूरा पता नहीं था, लेकिन उसे महसूस होता था कि उसके पति का जीवन ठीक नहीं है। वह मन ही मन डरती रहती थी। फिर भी वह पत्नी धर्म निभाने की कोशिश करती थी। वह चाहती थी कि शायद उसके प्यार और सेवा से शंकर बदल जाए।
एक दिन एक भयानक घटना घटती है। शंकर का नाम चंदाबाई नाम की एक नाचने वाली औरत के साथ जुड़ता है। दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा होता है। गुस्से में आकर शंकर उसका खून कर देता है। यह अपराध बहुत बड़ा था। खून करने के बाद वह वहां से भाग जाता है। पुलिस को खबर मिलती है और उसकी तलाश शुरू हो जाती है।
शंकर एक गाड़ी में बैठकर भागने की कोशिश करता है। पुलिस उसका पीछा करती है। पीछा करते करते उसकी गाड़ी नदी के पास पहुंचती है। भागते समय गाड़ी नदी में गिर जाती है। बहुत खोजबीन के बाद भी शंकर का कोई पता नहीं चलता। सबको लगता है कि वह नदी में डूबकर मर गया। पुलिस भी यही मान लेती है कि अब वह जीवित नहीं है।
जब यह खबर शांति तक पहुंचती है तो उसके मन में अजीब सी भावना होती है। वह स्तब्ध रह जाती है। वह दुखी भी होती है, क्योंकि आखिर वह उसका पति था। लेकिन उसके मन के किसी कोने में एक राहत भी होती है। उसे लगता है कि शायद अब उसका दुख भरा जीवन खत्म हो गया है। वह सोचती है कि अब वह नए सिरे से जी सकेगी।
इसी बीच एक पुलिस अधिकारी उसकी जिंदगी में आता है। उसका नाम मनोज है। मनोज एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी है। वह चंदाबाई के खून की जांच कर रहा है। जांच के सिलसिले में उसे शांति से कई बार मिलना पड़ता है। वह शांति से सवाल करता है, लेकिन उसका व्यवहार विनम्र और संवेदनशील होता है।
मनोज जब शांति को देखता है तो उसे समझ में आता है कि यह लड़की बहुत दुख सह चुकी है। वह उसके चेहरे पर छिपा दर्द पहचान लेता है। धीरे धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगती है। मनोज शांति की मदद करना चाहता है। वह उसे भरोसा दिलाता है कि अब उसे डरने की जरूरत नहीं है।
शांति को पहली बार किसी पुरुष से सम्मान और सहानुभूति मिलती है। मनोज उसके साथ नरमी से पेश आता है। वह उसकी बात ध्यान से सुनता है। शांति के मन में भी मनोज के लिए सम्मान और अपनापन पैदा होने लगता है। वह अपने पुराने दुख भूलकर एक नए जीवन का सपना देखने लगती है।
दोनों के बीच धीरे धीरे प्रेम पनपता है। मनोज भी शांति से प्रेम करने लगता है। वह जानता है कि शांति का अतीत दुखद है, लेकिन वह उसे अपनाने के लिए तैयार है। शांति के मन में फिर से उम्मीद जागती है। उसे लगता है कि शायद अब उसका जीवन सच में बदल जाएगा।
शांति अपने भविष्य के बारे में सोचने लगती है। वह सोचती है कि यदि मनोज से विवाह हो जाए तो उसे वह घर मिलेगा जिसकी वह बचपन से चाह रखती थी। वह एक शांत और स्नेह भरा जीवन जीना चाहती है। उसके सपने फिर से खिलने लगते हैं।
लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। एक दिन अचानक शंकर वापस आ जाता है। वह जीवित था। नदी में गिरने के बाद वह किसी तरह बच गया था। वह छिपता फिरता रहा और मौका देखकर वापस लौट आया। जब शांति उसे सामने देखती है तो उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है।
शंकर का लौटना शांति के सारे सपनों को तोड़ देता है। वह समझ जाती है कि अब उसका जीवन फिर उसी अंधेरे में लौट जाएगा। मनोज भी यह जानकर चौंक जाता है कि शंकर जीवित है। कानून के अनुसार शांति अब भी शंकर की पत्नी है।
शंकर को जब पता चलता है कि शांति और मनोज के बीच निकटता है तो वह गुस्से से भर उठता है। वह शांति पर शक करता है और उसे धमकाता है। शांति फिर से डर और अपमान के साये में आ जाती है। उसके चेहरे की मुस्कान गायब हो जाती है।
मनोज अपने कर्तव्य और प्रेम के बीच फंस जाता है। वह शांति को दुख में नहीं देख सकता, लेकिन वह कानून का पालन करने वाला अधिकारी है। उसे शंकर को उसके अपराध के लिए पकड़ना है। शंकर एक अपराधी है और उसने खून किया है।
कहानी यहां एक गहरे मोड़ पर आ जाती है। शांति का मन टूट चुका है। वह सोचती है कि उसकी जिंदगी में खुशी क्यों नहीं टिकती। जब भी वह कोई सपना देखती है, वह सपना बिखर जाता है। फिर भी उसके अंदर कहीं न कहीं जीने की इच्छा बाकी है।
मनोज पूरी कोशिश करता है कि शंकर को उसके अपराध की सजा मिले। वह सबूत जुटाता है। शंकर फिर से भागने की कोशिश करता है, लेकिन इस बार कानून का हाथ उसे पकड़ लेता है। सच सामने आता है कि उसने खून किया था और कानून से बच नहीं सकता।
शंकर को पकड़ लिया जाता है। शांति के जीवन का वह काला अध्याय फिर से बंद होने लगता है। शांति बहुत रोती है, लेकिन इस बार उसके आंसुओं में केवल दुख नहीं, एक तरह की मुक्ति भी होती है। उसे लगता है कि अब शायद वह सच में आजाद हो जाएगी।
मनोज उसके साथ खड़ा रहता है। वह उसे सहारा देता है। वह कहता है कि जिंदगी में दुख जरूर आते हैं, लेकिन इंसान को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। शांति धीरे धीरे अपने टूटे हुए सपनों को समेटती है।
कहानी हमें यह सिखाती है कि जिंदगी और ख्वाब हमेशा एक जैसे नहीं होते। कभी जिंदगी हमारे सपनों को तोड़ देती है, तो कभी वही जिंदगी हमें नया सपना देखने का साहस भी देती है। शांति का जीवन दर्द से भरा था, लेकिन उसने उम्मीद नहीं छोड़ी।
अंत में शांति समझ जाती है कि सच्ची खुशी केवल बाहरी हालात से नहीं मिलती, बल्कि अंदर की हिम्मत और विश्वास से मिलती है। उसके जीवन में बहुत आंधियां आईं, लेकिन वह पूरी तरह बिखरी नहीं। उसके दिल में फिर भी एक छोटी सी रोशनी जलती रही।
जिंदगी और ख्वाब की यह कहानी एक स्त्री के संघर्ष, उसके धैर्य और उसके सपनों की कहानी है। यह बताती है कि चाहे हालात कितने भी कठिन हों, इंसान के मन में उम्मीद का दीपक जलता रहे तो अंधेरा पूरी तरह जीत नहीं सकता।
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