"SHOLA AUR SHAABNAM" - HINDI ROMANTIC FILM / DHARMENDRA MOVIE




Shola Aur Shabnam is a 1961 Indian Hindi-language romance film written and directed by Ramesh Saigal. It stars Dharmendra, Tarla Mehta, Abhi Bhattacharya, Vijayalakshmi and M. Rajan in pivotal roles. The film is about a young man torn between love for his long lost childhood sweetheart, and devotion towards a friend who has helped set him up in his career. The film features music by Khayyam.


शोला और शबनम एक भावनाओं से भरी प्रेम कहानी है। यह कहानी दो ऐसे दिलों की है जो बचपन में एक हो गए थे, पर समय और हालात ने उन्हें अलग कर दिया। यह कहानी सच्चे प्रेम, दोस्ती, त्याग और बलिदान की है।


रवि एक साधारण घर का लड़का है। घर में सब उसे प्यार से बन्नू कहते हैं। उसका मन बहुत सीधा और सच्चा है। वह गरीब है, पर उसके दिल में सपनों की कमी नहीं है। उसी कस्बे में संध्या नाम की एक लड़की रहती है। उसका घर बहुत बड़ा है। उसके पिता रेल विभाग में ऊँचे पद पर हैं। घर में धन दौलत की कोई कमी नहीं है। पर संध्या का मन भी उतना ही साफ है जितना रवि का।


रवि और संध्या बचपन से साथ खेलते हैं। कभी पेड़ों के नीचे बैठकर बातें करते हैं, कभी खेतों की पगडंडी पर दौड़ते हैं। दोनों एक दूसरे को अपना मानते हैं। धीरे धीरे यह लगाव गहरे प्रेम में बदल जाता है। बचपन की मासूम उम्र में ही वे मन ही मन एक दूसरे को अपना जीवन साथी मान लेते हैं। वे एक गीत साथ गाते हैं, जो उनके दिलों को जोड़ देता है। वह गीत उनकी यादों का हिस्सा बन जाता है।


लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर होता है। संध्या के पिता का तबादला दूर शहर में हो जाता है। अचानक विदाई का दिन आ जाता है। रवि और संध्या को अलग होना पड़ता है। न कोई पता, न कोई खबर। दोनों के बीच दूरी आ जाती है। रवि उदास हो जाता है। संध्या की आँखों में आँसू भर जाते हैं। दोनों सोचते हैं कि एक दिन फिर मिलेंगे, पर समय बीतता जाता है।


सालों बाद रवि जवान हो जाता है। वह लंबा, मजबूत और मेहनती युवक बन चुका है। पर उसके पास न धन है, न पहचान। वह नौकरी की तलाश में भटकता है। कई जगह जाता है, पर उसे काम नहीं मिलता। गरीबी उसका पीछा नहीं छोड़ती। ऐसे में उसे अपने पुराने दोस्त प्रकाश की याद आती है।


प्रकाश अमीर घर का लड़का है। उसका परिवार घने जंगलों के बीच बड़ी लकड़ी की मिल चलाता है। उसका स्वभाव खुशमिजाज है। वह अपने दोस्त रवि को बहुत चाहता है। जब रवि उससे काम मांगता है, तो प्रकाश खुशी से उसे नौकरी दे देता है। रवि केवल सौ रुपये महीना मांगता है, पर प्रकाश उसे तीन सौ रुपये देने को तैयार हो जाता है। रवि भावुक हो उठता है। उसे लगता है कि सच्ची दोस्ती अभी भी जिंदा है।


प्रकाश का बड़ा भाई आकाश है। आकाश गंभीर स्वभाव का है। उसके चेहरे पर हमेशा उदासी छाई रहती है। वह अक्सर नशे में डूबा रहता है। उसके जीवन में एक गहरी चोट है। उसने एक गरीब गाँव की लड़की से प्रेम किया था। पर उसके पिता ने उस लड़की का अपमान किया। उस अपमान को सह न पाने के कारण वह लड़की अपनी जान दे बैठी। इस घटना ने आकाश को अंदर से तोड़ दिया। वह दुनिया से दूर रहने लगा। पर अपने छोटे भाई प्रकाश से वह बहुत प्यार करता है। उसे हर खुशी देना चाहता है।


एक दिन प्रकाश के घर में खुशी की खबर आती है। उसके पिता के एक पुराने मित्र की बेटी संध्या उनसे मिलने आ रही है। प्रकाश उससे विवाह करना चाहता है। जब संध्या घर आती है, तो रवि उसे पहली बार देखता है। वह उसे पहचान नहीं पाता। संध्या भी चुप रहती है। दोनों एक दूसरे को देखते हैं, पर कुछ कहते नहीं।


एक शाम सब लोग साथ बैठे होते हैं। प्रकाश हंसी खुशी के माहौल में रवि से गाने को कहता है। रवि वही पुराना गीत गाने लगता है, जो उसने बचपन में संध्या के साथ गाया था। गीत की धुन हवा में फैल जाती है। संध्या की आँखें भर आती हैं। रवि भी अचानक ठिठक जाता है। दोनों की नजरें मिलती हैं। उसी पल उन्हें सच का एहसास हो जाता है। यह वही बचपन का साथी है। पर दोनों अपने मन की बात छुपा लेते हैं।


रवि का दिल फिर से धड़कने लगता है। वह समझ जाता है कि उसकी खोई हुई मोहब्बत उसके सामने खड़ी है। पर वह अपने दोस्त प्रकाश की खुशी के बीच नहीं आना चाहता। प्रकाश संध्या से प्रेम करने लगा है। वह उससे विवाह के सपने देख रहा है। रवि सोचता है कि अगर वह सच बताएगा, तो प्रकाश का दिल टूट जाएगा। इसलिए वह अपने दिल को दबा लेता है।


संध्या का मन भी बेचैन है। वह रवि से प्रेम करती है। वह प्रकाश से विवाह नहीं करना चाहती। पर घर वालों की इच्छा और समाज की मर्यादा उसे रोकती है। वह अकेले में रोती है। उसे लगता है कि उसका बचपन का सपना फिर से टूट रहा है।


आकाश धीरे धीरे सब समझने लगता है। उसने अपने जीवन में प्रेम खोया है। इसलिए वह दूसरों के दिल की पीड़ा पहचान लेता है। वह रवि की आँखों में छुपा दर्द देख लेता है। वह संध्या की खामोशी समझ जाता है। उसे लगता है कि इतिहास फिर से दोहराया जा रहा है।


उधर प्रकाश अपने प्रेम में डूबा है। वह रवि से कहता है कि वह संध्या को खुश करे, उसे अपने करीब लाए। रवि मुस्कुराकर उसकी बात मान लेता है। वह अपने दोस्त के लिए सब करता है, पर हर पल उसका दिल टूटता है। वह अपनी खुशी को दोस्ती पर कुर्बान करने की कोशिश करता है।


एक दिन संध्या साहस जुटाती है। वह रवि से कहती है कि वह सच्चाई छुपा कर नहीं जी सकती। वह प्रकाश को सब बता देगी। रवि डर जाता है। उसे लगता है कि इससे सब बिखर जाएगा। वह फैसला करता है कि वह नौकरी छोड़ देगा और अपने गाँव लौट जाएगा। उसे लगता है कि उसकी दूरी से सब ठीक हो जाएगा।


जब वह जाने लगता है, तब आकाश उसे रोक लेता है। आकाश कहता है कि सच्चा प्रेम छुपाया नहीं जाना चाहिए। वह अपने अतीत को याद करता है। अगर उस समय किसी ने उसके प्रेम का साथ दिया होता, तो शायद उसकी प्रिय जीवित होती। वह नहीं चाहता कि एक और प्रेम कहानी दुख में डूब जाए।


आकाश अपने पिता के सामने खड़ा हो जाता है। वह साफ कह देता है कि संध्या और रवि एक दूसरे से प्रेम करते हैं। यह विवाह जबरदस्ती नहीं होना चाहिए। उसके पिता गुस्से में आ जाते हैं। घर में तूफान मच जाता है। प्रकाश भी सच्चाई जानकर स्तब्ध रह जाता है। उसे विश्वास नहीं होता कि उसका दोस्त और उसकी मंगेतर बचपन से जुड़े हुए हैं।


प्रकाश का दिल टूट जाता है। पर धीरे धीरे उसे सच्चाई समझ में आती है। वह देखता है कि रवि ने कभी उसके साथ विश्वासघात नहीं किया। उसने अपने प्रेम को दबा कर दोस्ती निभाई। संध्या ने भी कभी छल नहीं किया। सब हालात का खेल था।


आकाश अपने भाई को समझाता है कि प्रेम किसी का हक छीनकर नहीं पाया जा सकता। अगर संध्या का मन रवि में है, तो उसे रोकना अन्याय होगा। प्रकाश की आँखों में आँसू आ जाते हैं। वह भारी मन से पीछे हट जाता है। वह कहता है कि वह अपने दोस्त की खुशी में अपनी खुशी ढूंढेगा।


पर आकाश का संघर्ष यहीं खत्म नहीं होता। उसका पिता अपने अहंकार में अंधा हो चुका है। वह इस विवाह को रोकने के लिए कठोर कदम उठाता है। झगड़े के दौरान हालात बिगड़ जाते हैं। आकाश अपने भाई और रवि की रक्षा करते हुए गंभीर रूप से घायल हो जाता है।


आकाश की हालत नाजुक हो जाती है। वह अंतिम समय में रवि और संध्या को साथ देखता है। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ जाती है। उसे लगता है कि उसका अधूरा प्रेम आज किसी और के रूप में पूरा हो रहा है। वह अपने भाई का हाथ पकड़कर उसे मजबूत रहने को कहता है। फिर वह शांत हो जाता है।


घर में शोक छा जाता है। प्रकाश रोता है, पर उसे यह भी एहसास होता है कि उसके भाई ने सच्चे प्रेम के लिए बलिदान दिया है। रवि और संध्या का विवाह सादगी से होता है। उनके दिल में आकाश की याद हमेशा जिंदा रहती है।


यह कहानी बताती है कि सच्चा प्रेम समय और दूरी से नहीं मिटता। दोस्ती का असली अर्थ त्याग में है। और कभी कभी एक इंसान का बलिदान कई जिंदगियों को खुशियों से भर देता है। शोला और शबनम की यह कथा दिल को छू लेने वाली है, जहां आग जैसे हालात में भी ओस की बूंद जैसी पवित्रता बची रहती है।

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