Jhumroo is
a 1961 Indian Hindi-language romantic comedy film directed by Shankar
Mukherjee. It stars Madhubala and Kishore Kumar in lead roles, with Chanchal, Anoop Kumar, Lalita Pawar and Jayant appearing in supporting roles. The
screenplay is written by Madhusudan Kalekar, dialogue by Vrajendra Gaud and
story by Kishore Kumar.
झुमरू एक हँसी और प्रेम से भरी कहानी है। यह कहानी दिल को हल्का भी करती है और भावुक भी बना देती है। इसमें एक अमीर घर की लड़की और एक साधारण, चंचल युवक की मुलाकात होती है, जो धीरे धीरे गहरे प्रेम में बदल जाती है। कहानी में रहस्य भी है, पुराने पापों का बोझ भी है, और अंत में सच्चाई की जीत भी है।
अंजना एक बहुत अमीर घर की इकलौती बेटी है। वह बचपन से ही शहर के बड़े स्कूल में पढ़ती रही। उसके पिता बहुत सख्त स्वभाव के हैं। उन्हें अपने मान और प्रतिष्ठा की बहुत चिंता रहती है। अंजना की मां का देहांत तब हो गया था जब वह बहुत छोटी थी। इसलिए वह अपने पिता के साये में पली बढ़ी। पिता ने उसे हर सुख दिया, पर प्यार और अपनापन कम ही दिया।
कई साल पढ़ाई करने के बाद अंजना अपने घर लौटती है। उसके स्वागत में घर सजा हुआ है। नौकर चाकर भागदौड़ कर रहे हैं। पिता अपनी बेटी को देखकर खुश तो होते हैं, पर अपने भाव चेहरे पर नहीं आने देते। अंजना के मन में घर लौटने की खुशी है, पर उसे लगता है कि इस बड़े घर में भी कुछ खालीपन है।
घर के पास घने पेड़ और पहाड़ हैं। पास ही एक छोटा सा गाँव है जहाँ आदिवासी लोग रहते हैं। वे सरल और खुशमिजाज लोग हैं। वे गीत गाते हैं, नाचते हैं और मेहनत से जीवन बिताते हैं। उन्हीं में से एक युवक है झुमरू। झुमरू बहुत हंसमुख है। उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है। वह जंगलों में घूमता है, गीत गाता है और सबको हँसाता है। उसकी परवरिश एक बूढ़ी औरत ने की है, जिसे वह अपनी मां मानता है।
एक दिन अंजना अकेले जंगल की ओर घूमने निकलती है। उसे प्रकृति से बहुत लगाव है। वह पेड़ों के बीच से गुजरती है और अचानक एक मीठी आवाज सुनती है। कोई युवक गा रहा है। वह रुक जाती है। सामने झुमरू खड़ा है। वह खुले दिल से गा रहा है। उसकी आवाज में सच्चाई है। अंजना उसे देखती रह जाती है।
पहली मुलाकात में ही दोनों के बीच नोकझोंक होती है। झुमरू मजाक करता है। अंजना पहले तो नाराज होती है, फिर हँस पड़ती है। दोनों की बातें धीरे धीरे दोस्ती में बदल जाती हैं। अंजना को झुमरू की सादगी और बेफिक्री भा जाती है। झुमरू को अंजना की मासूमियत और सरलता अच्छी लगती है।
दिन बीतते हैं। दोनों अक्सर जंगल में मिलते हैं। झुमरू उसे गाँव के गीत सुनाता है। अंजना उसे शहर की बातें बताती है। दोनों की दुनिया अलग है, पर दिल एक दूसरे को समझने लगते हैं। धीरे धीरे यह दोस्ती प्रेम में बदल जाती है।
पर यह प्रेम आसान नहीं है। अंजना के पिता को जब इस बारे में पता चलता है, तो वह क्रोधित हो जाते हैं। उन्हें यह रिश्ता अपनी इज्जत के खिलाफ लगता है। वह झुमरू को एक साधारण, गरीब आदिवासी समझते हैं। वह अपनी बेटी का विवाह किसी अमीर और प्रतिष्ठित घर में करना चाहते हैं।
अंजना अपने पिता से कहती है कि प्रेम धन और पद नहीं देखता। पर पिता उसकी बात सुनने को तैयार नहीं होते। वह झुमरू को घर के पास भी आने से मना कर देते हैं। झुमरू को अपमानित किया जाता है। पर वह हार नहीं मानता। उसका प्रेम सच्चा है।
इसी बीच कहानी में एक पुराना रहस्य धीरे धीरे सामने आने लगता है। झुमरू की पालने वाली मां के मन में एक छुपा हुआ दुख है। वह अक्सर अंजना को देखती है और उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। एक दिन वह सच बताने का फैसला करती है।
सच यह है कि झुमरू की पालने वाली मां ही अंजना की असली मां है। कई साल पहले अंजना के पिता ने किसी कारण से उसे घर से दूर कर दिया था। वह बेइज्जत होकर गाँव में आ बसी। उस समय उसकी गोद में एक बच्ची थी। हालात ऐसे बने कि बच्ची उससे छीन ली गई और शहर ले जाई गई। वही बच्ची बड़ी होकर अंजना बनी।
दूसरी ओर, झुमरू के बारे में भी एक सच्चाई सामने आती है। अंजना के पिता का एक बहुत घनिष्ठ मित्र था। दोनों साथ व्यापार करते थे। पर लालच में आकर अंजना के पिता ने अपने मित्र को धोखा दिया। वह मित्र सब कुछ खो बैठा। उसी के घर एक बेटा पैदा हुआ था। हालात ने उसे भी बिछुड़ने पर मजबूर कर दिया। वही बच्चा आगे चलकर झुमरू बना।
जब यह सच्चाई खुलती है, तो सब स्तब्ध रह जाते हैं। अंजना को पता चलता है कि जिसे वह अपना पिता मानती रही, उसने कई गलतियां की हैं। झुमरू को भी अपनी असली पहचान मिलती है। दोनों के दिल में एक नया दर्द उठता है, पर साथ ही एक नई ताकत भी आती है।
अंजना अपने पिता से सवाल करती है। वह पूछती है कि उन्होंने इतना बड़ा अन्याय क्यों किया। पिता पहले तो गुस्से में रहते हैं, पर धीरे धीरे उन्हें अपने कर्मों का बोझ महसूस होता है। उन्हें समझ आता है कि धन और अहंकार ने उनसे सब छीन लिया है। उन्होंने दोस्त खोया, पत्नी खोई, और अब बेटी भी खोने की कगार पर है।
झुमरू अपने असली पिता के बारे में जानकर दुखी होता है। पर वह बदले की भावना नहीं रखता। वह केवल न्याय चाहता है। वह चाहता है कि पुराने घाव भर जाएं और सबको उनका हक मिले।
कहानी का अंतिम भाग भावुक है। अंजना के पिता अपने पुराने मित्र से मिलने जाते हैं। वह सिर झुका कर माफी मांगते हैं। वह अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं। वह झुमरू को गले लगाते हैं और उसे अपना दामाद मानने की बात कहते हैं। उनका अहंकार टूट चुका होता है।
अंजना की मां, जो इतने सालों से दूर थी, अपनी बेटी से मिलती है। मां और बेटी का मिलन आँसुओं से भरा है। इतने सालों का बिछोह एक पल में मिट जाता है। झुमरू की आंखों में भी खुशी के आँसू हैं। उसे अपना परिवार मिल गया है।
अंत में अंजना और झुमरू का विवाह धूमधाम से होता है। गाँव और शहर के लोग मिलकर नाचते गाते हैं। पुराने झगड़े खत्म हो जाते हैं। प्रेम और सच्चाई की जीत होती है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि धन और घमंड इंसान को अंधा बना देते हैं। सच्चा सुख प्रेम और अपनापन में है। झुमरू की हँसी और अंजना का विश्वास मिलकर यह साबित करते हैं कि दिलों का रिश्ता सबसे मजबूत होता है। अंत में सबके चेहरे पर मुस्कान है और जीवन में नई शुरुआत की रोशनी।
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