Nazrana is a 1961 Indian black-and-white Hindi-language melodrama film
produced by S. Krishnamurthy and T. Govindarajan and directed by C. V.
Sridhar in his Hindi directorial debut. It stars Raj
Kapoor, Vyjayanthimala, Usha
Kiran in a love
triangle, while South star Gemini
Ganeshan has an extended cameo appearance. The
music is by Ravi.
यह कहानी एक पुराने समय की है। यह एक ऐसे घर की कहानी है जहाँ प्यार, त्याग और गलतफहमी ने सबकी जिंदगी बदल दी। इस फिल्म का नाम नज़राना है। इसे प्रसिद्ध निर्देशक C. V. Sridhar ने बनाया था। इसमें मुख्य भूमिकाओं में Raj Kapoor, Vyjayanthimala और Usha Kiran थे। साथ ही दक्षिण के प्रसिद्ध अभिनेता Gemini Ganeshan भी एक महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दिए। इस फिल्म का संगीत मशहूर संगीतकार Ravi ने दिया था।
कहानी की शुरुआत एक कॉलेज से होती है। वहाँ राजेश नाम का एक सीधा और थोड़ा शरारती स्वभाव का लड़का पढ़ता है। सब उसे प्यार से राज कहते हैं। वह हंसमुख है और दोस्तों के साथ मजाक करना पसंद करता है। उसी कॉलेज में बसंती नाम की एक सुंदर और समझदार लड़की भी पढ़ती है। बसंती अपने स्वभाव में थोड़ी सख्त है। उसे अनुशासन पसंद है और वह किसी की भी गलत बात सहन नहीं करती।
एक दिन राज ने बसंती को एक प्रेम पत्र लिख दिया। उसने यह पत्र मजाक में नहीं बल्कि सच में अपने मन की बात कहने के लिए लिखा था। लेकिन बसंती को यह बात बहुत बुरी लगी। उसने सोचा कि राज उसकी इज्जत नहीं कर रहा। वह सीधे कॉलेज के प्रिंसिपल के पास गई और शिकायत कर दी।
प्रिंसिपल ने राज को बुलाया और डांटा। राज को बहुत शर्मिंदगी हुई। उसे लगा कि बसंती ने उसे समझे बिना ही शिकायत कर दी। वह अंदर से दुखी हो गया। बसंती भी कुछ दिनों बाद समझ गई कि शायद उसने जल्दबाजी में फैसला लिया। उसने देखा कि राज बुरा लड़का नहीं है। वह सच्चा और साफ दिल का इंसान है।
बसंती को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह राज के पास गई और उससे माफी मांगी। राज ने पहले तो चुप्पी साध ली, लेकिन उसके चेहरे पर सच्चाई देखकर उसने उसे माफ कर दिया। धीरे धीरे दोनों में दोस्ती हो गई। उनकी बातचीत बढ़ने लगी। साथ में पढ़ाई करना, लाइब्रेरी जाना और कॉलेज के कार्यक्रमों में हिस्सा लेना, इन सबने उनके दिलों को करीब ला दिया।
समय बीतता गया और उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों ने एक दूसरे से वादा किया कि वे जीवन भर साथ रहेंगे। बसंती के घर की हालत बहुत अच्छी नहीं थी। उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं थे। उसकी बड़ी बहन गीता घर चलाने के लिए सिलाई का काम करती थी। वह दिन रात मेहनत करती थी ताकि घर का खर्च चल सके और बसंती पढ़ाई कर सके। गीता बहुत त्याग करने वाली और शांत स्वभाव की लड़की थी। उसने अपनी छोटी बहन के लिए अपने सपनों को भी पीछे छोड़ दिया था।
एक दिन राज को रहने के लिए जगह की जरूरत पड़ी। संयोग से उसे पता चला कि बसंती के घर की ऊपरी मंजिल खाली है। वह किराए पर वहाँ रहने लगा। अब राज का रोज आना जाना उसी घर में होने लगा। राज मेहनती था लेकिन एक दिन अचानक वह बीमार पड़ गया। उसे तेज बुखार हो गया। बसंती कॉलेज में व्यस्त थी, इसलिए गीता ने उसकी देखभाल की जिम्मेदारी ली। गीता ने दिन रात उसकी सेवा की। दवा दी, खाना बनाया, उसके सिर पर पट्टी रखी और उसका ख्याल रखा।
राज को जब होश आया तो उसने देखा कि गीता ने कितनी सेवा की है। वह उसके प्रति सम्मान और आभार से भर गया। दूसरी ओर गीता के मन में धीरे धीरे एक कोमल भावना जन्म लेने लगी। उसने राज में एक अच्छा और सच्चा इंसान देखा। उसे लगा कि शायद यही वह साथी है जिसकी उसे जरूरत है। एक दिन गीता ने हिम्मत करके बसंती से कहा कि उसे राज से प्रेम हो गया है। यह सुनकर बसंती के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह अंदर से टूट गई। वह राज से बहुत प्यार करती थी, लेकिन अपनी बहन के त्याग को वह भूल नहीं सकती थी। गीता ने अपनी पूरी जिंदगी बसंती के लिए लगा दी थी।
बसंती ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने अपने प्यार का त्याग करने का निश्चय किया। उसने सोचा कि अगर उसकी बहन की खुशी राज से जुड़ी है तो वह पीछे हट जाएगी। बसंती ने राज से बात की। उसने राज को समझाया कि गीता उससे प्रेम करती है और वह बहुत अच्छी लड़की है। उसने कहा कि अगर राज सच में बसंती से प्यार करता है तो उसे उसके लिए एक बलिदान देना होगा।
राज यह सुनकर चौंक गया। उसने कहा कि वह बसंती से प्रेम करता है, किसी और से शादी कैसे कर सकता है। लेकिन बसंती ने उसे भावनाओं का सहारा लेकर समझाया। उसने कहा कि उसकी बहन की खुशी सबसे बड़ी है। राज बहुत उलझन में था। आखिरकार उसने बसंती की बात मान ली। उसने गीता से शादी करने का फैसला किया। शादी सादगी से हुई। गीता बहुत खुश थी। उसे लगा कि उसका सपना पूरा हो गया।
लेकिन शादी के बाद राज के मन में खालीपन था। वह गीता से अच्छा व्यवहार करता था, लेकिन उसके दिल में बसंती की जगह कोई नहीं ले सकता था। गीता यह महसूस करने लगी कि राज का मन कहीं और है। कुछ समय बाद बसंती भी उनके साथ रहने आ गई। वह अपनी बहन के पास रहना चाहती थी। लेकिन गीता के मन में शक पैदा होने लगा। उसे लगा कि शायद राज और बसंती के बीच कुछ है।
राज और बसंती दोनों अपने मन की सच्चाई छिपाने की कोशिश करते रहे। वे मर्यादा में रहे, लेकिन उनकी आंखों में छिपी भावनाएं गीता को बेचैन करती रहीं।एक दिन गीता ने गुस्से में आकर बसंती से घर छोड़ने को कह दिया। बसंती ने बिना विरोध किए घर छोड़ दिया। वह अपनी बहन की शांति चाहती थी।
समय बीतता गया। राज और गीता के घर एक बेटे का जन्म हुआ। बच्चे ने घर में खुशियां ला दीं। राज अपने बेटे से बहुत प्यार करता था। वह उसके साथ खेलता और उसे गोद में लेकर सपने देखता। लेकिन गीता के मन में अपराधबोध बढ़ता गया। उसे सच्चाई का पता चल गया कि राज और बसंती एक दूसरे से प्रेम करते थे और उसके लिए उन्होंने अपना प्यार कुर्बान किया था।
यह जानकर गीता टूट गई। उसे लगा कि उसने अपनी बहन का जीवन छीन लिया। उसका मन पछतावे से भर गया। उसकी तबीयत खराब रहने लगी। एक दिन उसने राज को बुलाया। उसने कहा कि वह जानती है कि राज और बसंती का प्यार सच्चा था। उसने राज से वादा लिया कि अगर वह इस दुनिया से चली जाए तो वह बसंती को अपने बेटे की मां बनाए।
कुछ ही समय बाद गीता की मृत्यु हो गई। घर में शोक छा गया। राज अकेला रह गया अपने छोटे बच्चे के साथ। राज ने अपने बेटे की परवरिश पूरी जिम्मेदारी से की। लेकिन उसके मन में गीता की आखिरी इच्छा गूंजती रही। उधर बसंती ने अपने जीवन को संभालने की कोशिश की। उसने एक दफ्तर में काम करना शुरू किया। वहाँ उसका मालिक श्याम था। श्याम सज्जन और समझदार व्यक्ति था। वह बसंती का सम्मान करता था।
धीरे धीरे श्याम ने बसंती के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। बसंती ने बहुत सोच विचार किया। उसे लगा कि शायद यही उसके जीवन का नया रास्ता है। उसने शादी के लिए हां कह दी। राज को जब यह खबर मिली तो वह बेचैन हो गया। उसे लगा कि वह गीता की इच्छा पूरी नहीं कर पाएगा। वह जल्दी से बसंती के विवाह स्थल की ओर भागा।
लेकिन जब तक वह पहुंचा, शादी हो चुकी थी। बसंती अब श्याम की पत्नी बन चुकी थी। राज कुछ पल चुप खड़ा रहा। फिर उसने अपने बेटे को गोद में उठाया और बसंती के सामने लाकर खड़ा कर दिया। उसने कहा कि यह उसके जीवन का सबसे बड़ा उपहार है। उसने अपने बेटे को बसंती को सौंप दिया। बसंती की आंखों में आंसू आ गए। वह समझ गई कि यह एक पिता का सबसे बड़ा त्याग है।
राज बिना कुछ और कहे वहां से चला गया। उसके कदम भारी थे, लेकिन उसके चेहरे पर शांति थी। उसने अपना कर्तव्य निभा दिया था। बसंती ने बच्चे को गले लगाया। उसके मन में दर्द भी था और कृतज्ञता भी। इस कहानी में किसी ने भी अपने लिए नहीं सोचा। हर किसी ने दूसरे की खुशी के लिए अपना दिल तोड़ा। राज ने अपने प्रेम का त्याग किया। बसंती ने अपनी बहन के लिए अपना जीवन बदल दिया। गीता ने अंत में सच स्वीकार कर अपने मन का बोझ हल्का किया।
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्यार हमेशा पाने का नाम नहीं होता। कभी कभी प्यार का मतलब छोड़ देना भी होता है। त्याग और समझ ही रिश्तों को महान बनाते हैं। नज़राना एक ऐसी भावुक कहानी है जो दिखाती है कि इंसान का दिल कितना बड़ा हो सकता है। इसमें दर्द है, आंसू हैं, लेकिन साथ ही सच्चाई और पवित्रता भी है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है।
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