Ganga Jamuna , is a 1961
Indian crime drama film, written and produced by Dilip
Kumar, and directed by Nitin
Bose, with dialogues written by Wajahat
Mirza; Dilip Kumar later said that he also ghost-directed and
edited the film. It stars Dilip Kumar with Vyjayanthimala and
his real-life brother Nasir Khan in the leading roles and its rustic setting,
being a defining example of the dacoit
film genre.
गंगा जमुना एक गहरी और भावनाओं से भरी कहानी है। यह कहानी दो भाइयों की है, जिनके रास्ते अलग हो जाते हैं। एक भाई हालात से लड़ते हुए गलत राह पर चला जाता है, और दूसरा भाई कानून की राह चुनता है। दोनों एक ही माँ की संतान हैं, दोनों एक ही मिट्टी में पले-बढ़े हैं, लेकिन समय और परिस्थितियाँ उन्हें आमने-सामने खड़ा कर देती हैं। यह कहानी प्यार, त्याग, अन्याय, गरीबी, गुस्से और कर्तव्य की टकराहट को बहुत सरल और सच्चे ढंग से दिखाती है।
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव हरिपुर में एक गरीब विधवा औरत गोविंदी अपने दो बेटों के साथ रहती है। बड़ा बेटा गंगाराम है, जिसे सब गंगा कहते हैं। छोटा बेटा जमुना है। घर में बहुत गरीबी है। खाने के लिए भी कभी-कभी पर्याप्त अनाज नहीं होता। गोविंदी गाँव के जमींदार के घर में काम करती है। वह दिन भर मेहनत करती है, ताकि अपने दोनों बेटों को दो वक्त की रोटी दे सके।
गंगा बचपन से ही सीधा लेकिन तेज स्वभाव का है। वह पढ़ाई में ज्यादा ध्यान नहीं देता। उसे खेतों में काम करना, बैल चलाना और बाहर की दुनिया देखना अच्छा लगता है। उसका दिल बहुत साफ है। वह अपनी माँ से बहुत प्यार करता है। वह अपने छोटे भाई जमुना को भी बहुत चाहता है। जमुना पढ़ाई में बहुत तेज है। वह शांत स्वभाव का है। वह अपनी माँ की बातें ध्यान से सुनता है और पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनने का सपना देखता है। उसकी माँ चाहती है कि कम से कम एक बेटा पढ़-लिखकर इज्जत की जिंदगी जीए। गंगा भी यही चाहता है कि उसका छोटा भाई पढ़े और आगे बढ़े।
गाँव का जमींदार बहुत घमंडी और क्रूर आदमी है। उसका नाम हरिराम है। वह गरीब लोगों को दबाकर रखता है। उसे अपनी ताकत और पैसे का बहुत घमंड है। वह गोविंदी से घर का सारा काम करवाता है, लेकिन उसे इज्जत नहीं देता। एक दिन जमींदार झूठा आरोप लगाता है कि गोविंदी ने उसके घर से चोरी की है। बिना किसी सबूत के वह उसके घर की तलाशी करवाता है। कुछ लोग मिलकर झूठे सबूत उसके घर में रख देते हैं। गोविंदी को सबके सामने अपमानित किया जाता है। उसे पकड़कर ले जाया जाता है। पूरा गाँव जानता है कि वह निर्दोष है, लेकिन जमींदार के डर से कोई खुलकर बोल नहीं पाता।
गाँव वाले मिलकर किसी तरह उसे छुड़ा लेते हैं, लेकिन इस अपमान और दुख का सदमा गोविंदी सह नहीं पाती। कुछ ही दिनों में उसकी तबीयत बिगड़ जाती है और वह दुनिया छोड़ देती है। गंगा और जमुना अपनी माँ की लाश के पास रोते रहते हैं। उस दिन गंगा के दिल में जमींदार के लिए गहरा गुस्सा भर जाता है। माँ की मौत के बाद गंगा अपने छोटे भाई से वादा करता है कि वह उसे पढ़ाएगा और बड़ा आदमी बनाएगा। वह खुद मेहनत करेगा, लेकिन अपने भाई की पढ़ाई नहीं रुकने देगा। गंगा दिन-रात मेहनत करने लगता है। वह बैलगाड़ी चलाता है, अनाज ढोता है, जमींदार के खेतों में काम करता है। जो भी कमाई होती है, वह जमुना की पढ़ाई पर खर्च करता है।
समय बीतता है। दोनों भाई बड़े हो जाते हैं। गंगा अब जवान हो चुका है। उसका शरीर मजबूत है और उसका स्वभाव अभी भी तेज है। वह अन्याय सहन नहीं कर पाता। दूसरी ओर जमुना पढ़ाई में और आगे बढ़ रहा है। वह शहर जाने की तैयारी करता है। गंगा अपने भाई को शहर भेजता है। उसके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, लेकिन वह जो कुछ कमाता है, सब जमुना को भेज देता है। वह खुद सादा जीवन जीता है, ताकि उसका भाई अच्छे से पढ़ सके।
गाँव में एक लड़की है जिसका नाम धन्नो है। वह गरीब परिवार की है, लेकिन बहुत सुंदर और सरल है। गंगा और धन्नो बचपन से एक-दूसरे को जानते हैं। दोनों के बीच धीरे-धीरे प्रेम पनपता है। वे एक-दूसरे का साथ चाहते हैं। एक दिन जमींदार की बुरी नजर धन्नो पर पड़ती है। वह उसे अकेला पाकर बुरा व्यवहार करने की कोशिश करता है। धन्नो डर जाती है और मदद के लिए पुकारती है। उसी समय गंगा वहाँ पहुँच जाता है और जमींदार से भिड़ जाता है। वह धन्नो की रक्षा करता है। जमींदार को यह बात बहुत बुरी लगती है। उसे लगता है कि एक गरीब लड़का उसकी इज्जत को चुनौती दे रहा है। वह बदला लेने की ठान लेता है। कुछ दिनों बाद वह गंगा पर डकैती का झूठा आरोप लगवा देता है। पुलिस आती है और गंगा को पकड़कर ले जाती है।
गंगा निर्दोष है, लेकिन उसके पास कोई सबूत नहीं है। उसे जेल भेज दिया जाता है। धन्नो रोती है। जमुना को जब यह खबर मिलती है, तो वह दुखी होता है, लेकिन वह पढ़ाई छोड़ना नहीं चाहता। गंगा भी चाहता है कि उसका भाई पढ़ाई पूरी करे। जेल में गंगा का दिल और कठोर हो जाता है। उसे लगता है कि इस दुनिया में गरीब के लिए न्याय नहीं है। जब वह सजा काटकर बाहर आता है, तो उसे पता चलता है कि जमींदार ने उसके घर की जमीन भी हड़प ली है और उसके भाई को भी तंग किया है। गंगा का गुस्सा अब और बढ़ जाता है। वह जमींदार के घर जाता है और उससे भिड़ जाता है। वह उससे पैसे छीन लेता है और भाग जाता है। इस घटना के बाद वह कानून की नजर में अपराधी बन जाता है। अब उसके पास गाँव में रहने का रास्ता नहीं बचता।
धन्नो उसका साथ नहीं छोड़ती। वह गंगा के साथ चल देती है। दोनों पहाड़ों की ओर चले जाते हैं। वहाँ कुछ डाकुओं का गिरोह रहता है। गंगा मजबूरी में उनके साथ जुड़ जाता है। धीरे-धीरे वह भी डाकू बन जाता है। दूसरी ओर जमुना शहर में पढ़ाई पूरी कर लेता है। वहाँ उसकी मुलाकात एक अच्छे और ईमानदार पुलिस अधिकारी से होती है। वह जमुना को समझाता है कि कानून और न्याय का रास्ता कठिन है, लेकिन सही है। जमुना उसके प्रभाव में आकर पुलिस में भर्ती हो जाता है। अब जमुना पुलिस अधिकारी बन चुका है। वह कानून की रक्षा करने की शपथ लेता है। उसे नहीं पता कि एक दिन उसका सामना अपने ही भाई से होगा।
गंगा पहाड़ों में रहते हुए भी गरीबों की मदद करता है। वह अमीर और अत्याचारी लोगों से लूटकर गरीबों को देता है। लोग उसे बुरा नहीं मानते। वे उसे अपना रक्षक समझने लगते हैं। लेकिन कानून की नजर में वह अपराधी है। कुछ साल बीत जाते हैं। धन्नो और गंगा एक साथ जीवन बिताते हैं। धन्नो माँ बनने वाली होती है। गंगा के मन में बदलाव आने लगता है। उसे लगता है कि वह अपने बच्चे को अपराध की जिंदगी नहीं देना चाहता। वह अपने पुराने गाँव लौटकर माफी माँगना चाहता है और नया जीवन शुरू करना चाहता है। उधर सरकार डाकुओं को पकड़ने के लिए सख्त कदम उठाती है। जमुना को हरिपुर इलाके में भेजा जाता है, जहाँ डाकुओं का आतंक है। जब वह वहाँ पहुँचता है, तो उसे पता चलता है कि सबसे बड़ा डाकू कोई और नहीं, उसका अपना भाई गंगा है।
जमुना का दिल टूट जाता है। वह अपने कर्तव्य और अपने भाई के बीच फँस जाता है। एक ओर कानून है, दूसरी ओर उसका खून का रिश्ता। गंगा गाँव लौटता है। वह चाहता है कि वह आत्मसमर्पण करे, लेकिन अपने तरीके से। वह पहले अपने भाई से मिलना चाहता है। दोनों भाइयों की मुलाकात होती है। दोनों की आँखों में आँसू होते हैं।
गंगा कहता है कि उसने जो किया, हालात की वजह से किया। वह अपने भाई को याद दिलाता है कि उसी की कमाई से उसने पढ़ाई की और आज वह पुलिस अधिकारी बना है। वह कहता है कि उसने सब कुछ अपने भाई के लिए किया। जमुना कहता है कि वह अपने भाई से प्यार करता है, लेकिन वह कानून से ऊपर नहीं जा सकता। वह गंगा से आत्मसमर्पण करने को कहता है। गंगा जेल नहीं जाना चाहता। वह आजाद रहना चाहता है। दोनों के बीच लंबी बहस होती है। गाँव वाले इकट्ठा हो जाते हैं। सबकी साँसें थम जाती हैं। जमुना आखिरी बार अपने भाई से कहता है कि वह हथियार डाल दे। गंगा मना कर देता है। वह मुड़कर जाने लगता है।
जमुना का कर्तव्य उसके दिल पर भारी पड़ता है। वह गोली चला देता है। गोली गंगा को लगती है। गंगा जमीन पर गिर जाता है। धन्नो चीख उठती है। गंगा मरते समय अपने भाई की ओर देखता है। उसकी आँखों में शिकायत नहीं, बल्कि दर्द और प्यार होता है। वह धीरे-धीरे दम तोड़ देता है। जमुना अपने भाई की लाश को गोद में लेकर रोता है। उसे समझ आता है कि कानून की जीत हुई, लेकिन एक भाई हार गया। गाँव में सन्नाटा छा जाता है। यह कहानी दिखाती है कि गरीबी और अन्याय इंसान को किस राह पर ले जा सकते हैं। अगर समाज में न्याय हो, तो कोई गंगा डाकू नहीं बनता। यह कहानी भाईचारे, त्याग और कर्तव्य की कठिन परीक्षा को बहुत गहराई से दिखाती है। गंगा ने अपने भाई के लिए सब कुछ दिया, और अंत में उसी भाई की गोली से उसकी जान गई। यही इस कहानी का सबसे बड़ा दर्द है।
गंगा और जमुना की कहानी आज भी लोगों के दिल को छूती है, क्योंकि इसमें सच्चाई, भावना और जीवन की कठोर वास्तविकता छिपी है।
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