Dharti Kahe Pukarke is
a 1969 Indian Hindi-language drama
film, produced by Deenanath Shastri under the Vaishali Films
banner and directed by Dulal Guha. Starring Jeetendra, Nanda, Sanjeev Kumar and music composed by Laxmikant–Pyarelal. The
film was remade as Sautela Bhai.
धरती कहे पुकार के एक भावनात्मक और पारिवारिक कहानी है, जिसमें त्याग, प्रेम, गलतफहमी, ईमानदारी और न्याय की गहरी भावना दिखाई देती है। यह कहानी एक छोटे से गाँव की है, जहाँ सादा जीवन जीने वाले लोग अपने रिश्तों और जमीन से गहरा लगाव रखते हैं। कहानी का मुख्य आधार एक किसान परिवार है, जिसमें बड़ा भाई गंगाराम अपने दो सौतेले छोटे भाइयों मोती और शिवराम को अपने बच्चों की तरह पालता है।
गंगाराम एक सीधा-सादा, मेहनती और ईमानदार किसान है। उसके माता-पिता के निधन के बाद उसके ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ जाती है। मोती और शिवराम उसके सौतेले भाई हैं, लेकिन उसने कभी उन्हें सौतेला नहीं समझा। उसकी पत्नी पार्वती भी बहुत दयालु और समझदार महिला है। वह भी दोनों बच्चों को अपने पुत्रों की तरह प्यार देती है। घर में भले ही धन की कमी हो, लेकिन प्रेम और अपनापन भरपूर है।
गाँव में गंगाराम के पास थोड़ी सी जमीन है, जिस पर वह खेती करता है। उसी जमीन से पूरे परिवार का गुजारा चलता है। गंगाराम का सपना है कि उसका छोटा भाई मोती पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने। वह चाहता है कि मोती की जिंदगी खेतों में मेहनत करते हुए न बीते, बल्कि वह पढ़ाई करके सम्मान और सफलता पाए। इसी सोच के साथ वह मोती को शहर भेजता है ताकि वह पढ़ाई कर सके और वकील बन सके।
मोती शहर चला जाता है और वहाँ कड़ी मेहनत करके पढ़ाई करता है। गाँव में गंगाराम और शिवराम मिलकर खेतों में काम करते हैं। शिवराम अपने बड़े भाई की हर बात मानता है और उसका साथ देता है। वह भी बहुत मेहनती और सच्चा है। वह जानता है कि उसके बड़े भाई ने उनके लिए कितना त्याग किया है।
मोती की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए गंगाराम को अपनी जमीन गाँव के साहूकार के पास गिरवी रखनी पड़ती है। वह सोचता है कि जब मोती वकील बन जाएगा और कमाने लगेगा, तब वह कर्ज चुका देगा और जमीन वापस ले लेगा। उसके मन में अपने भाई के लिए केवल प्रेम और विश्वास है।
गाँव का साहूकार बहुत चालाक और स्वार्थी आदमी है। उसकी एक बेटी है जिसका नाम राधा है। राधा बचपन से ही शिवराम को चाहती है। दोनों साथ बड़े हुए हैं और एक-दूसरे को मन ही मन पसंद करते हैं। लेकिन उन्होंने कभी अपने प्रेम का खुलकर इजहार नहीं किया।
साहूकार चाहता है कि उसकी बेटी की शादी मोती से हो जाए। वह सोचता है कि मोती पढ़ा-लिखा और वकील है, इसलिए उसकी बेटी की शादी उससे होगी तो उसकी इज्जत बढ़ेगी। वह गंगाराम के पास प्रस्ताव लेकर आता है और कहता है कि अगर मोती उसकी बेटी से शादी कर ले, तो वह जमीन के कागज बिना पैसे लिए वापस कर देगा।
गंगाराम इस बात को सुनकर सोच में पड़ जाता है। उसे लगता है कि यह अच्छा मौका है। अगर मोती की शादी राधा से हो जाए, तो जमीन भी वापस मिल जाएगी और परिवार पर से कर्ज का बोझ भी हट जाएगा। वह इस बात को खुशी से स्वीकार करने का मन बना लेता है।
लेकिन सच्चाई कुछ और होती है। शहर में मोती ने पहले ही रेखा नाम की एक अमीर लड़की से शादी कर ली होती है। रेखा एक बड़े वकील की बेटी है। मोती ने यह शादी अपने परिवार से छुपाकर की होती है। वह अपने ससुर के घर ही रहने लगता है। उसे डर होता है कि अगर उसने यह बात गाँव में बताई, तो गंगाराम को दुख होगा।
उधर गाँव में राधा को पता चलता है कि उसके पिता उसकी शादी मोती से करना चाहते हैं। वह बहुत घबरा जाती है। वह शिवराम से मिलती है और उसे अपने प्रेम की बात बताती है। शिवराम भी उससे प्रेम करता है, लेकिन वह अपने बड़े भाई के फैसले के खिलाफ नहीं जाना चाहता। वह दुविधा में पड़ जाता है।
कुछ समय बाद मोती गाँव आता है और सच्चाई बताता है कि उसने पहले ही शादी कर ली है। शिवराम भी अपने मन की बात गंगाराम के सामने रख देता है। यह सुनकर गंगाराम को बहुत झटका लगता है। उसे लगता है कि दोनों भाइयों ने उससे सच्चाई छुपाई। वह दुखी हो जाता है, लेकिन फिर भी वह समझदारी से काम लेने का निर्णय करता है।
गंगाराम साहूकार के पास जाकर कहता है कि अब मोती की शादी संभव नहीं है, इसलिए वह राधा की शादी शिवराम से कर दे। लेकिन साहूकार इसे अपनी बेइज्जती समझता है। वह गुस्से में आ जाता है और कहता है कि अगर पंद्रह दिनों के भीतर कर्ज नहीं चुकाया गया, तो वह जमीन जब्त कर लेगा।
मोती को शहर वापस जाना पड़ता है और उसे इन नई परेशानियों की पूरी जानकारी नहीं होती। गंगाराम शिवराम को शहर भेजता है ताकि वह मोती से कुछ पैसे लेकर आए और कर्ज चुका सके।
शिवराम शहर जाता है, लेकिन वहाँ रेखा उसका अपमान करती है। वह उसे गरीब और गँवार समझती है। वह उसे ठीक से बात भी नहीं करने देती। शिवराम का दिल टूट जाता है और वह बिना पैसे लिए ही गाँव लौट आता है।
राधा को जब यह बात पता चलती है, तो वह बहुत दुखी होती है। वह अपने पिता की तिजोरी से पैसे निकाल लेती है और चुपचाप शिवराम को दे देती है ताकि कर्ज चुकाया जा सके। लेकिन साहूकार को इस चोरी का पता चल जाता है। वह गुस्से में आकर शिवराम पर चोरी का आरोप लगा देता है और उसे जेल भिजवा देता है।
यह सब देखकर गंगाराम टूट जाता है। उसे लगता है कि उसके अपने भाई ही उसे धोखा दे रहे हैं। वह दुख में डूबकर शराब पीने लगता है। उसका मन टूट चुका होता है। उसी समय एक समाजसेवी गाँव में आता है और सच्चाई जानने की कोशिश करता है। वह समझ जाता है कि शिवराम निर्दोष है। उसके प्रयास से शिवराम जेल से छूट जाता है।
साहूकार फिर एक शर्त रखता है। वह कहता है कि अगर शिवराम एक साल के लिए गाँव छोड़कर बाहर जाकर पैसा कमाए और पूरा कर्ज चुका दे, तो वह उन्हें परेशान नहीं करेगा और राधा की शादी कहीं और कर देगा।शिवराम अपने परिवार के लिए शहर चला जाता है। वह बहुत मेहनत करता है और गाड़ी चलाकर पैसे कमाने लगता है। वह दिन-रात मेहनत करता है ताकि अपने बड़े भाई की जमीन बचा सके।
उधर शहर में मोती और रेखा के बीच मतभेद बढ़ जाते हैं। रेखा को अब अपनी गलती का एहसास होने लगता है। एक दिन अचानक शिवराम रेखा को एक बड़ी मुसीबत से बचा लेता है। कुछ बदमाश उसे नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन शिवराम समय पर पहुँचकर उसकी रक्षा करता है। रेखा को अपनी पुरानी गलतियों का पछतावा होता है। वह शिवराम से माफी मांगती है। वह समझ जाती है कि असली सम्मान और प्रेम क्या होता है। मोती और रेखा के बीच भी गलतफहमियाँ दूर हो जाती हैं।
इसी बीच साहूकार अपनी चाल चलता है। वह नकली कागज बनवाकर गंगाराम पर धोखाधड़ी का आरोप लगा देता है और उसे जेल भिजवा देता है। अब स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है। यह सुनकर मोती और शिवराम दोनों एक हो जाते हैं। वे अपने बड़े भाई को बचाने का निर्णय लेते हैं। मोती अपनी कानूनी समझ का उपयोग करता है और सच्चाई सामने लाने की ठान लेता है। शिवराम भी उसके साथ खड़ा रहता है।
अदालत में लंबी लड़ाई चलती है। मोती अपनी दलीलों से साबित करता है कि कागज नकली हैं और साहूकार ने धोखा किया है। आखिरकार सच्चाई सामने आ जाती है। गंगाराम निर्दोष साबित होता है और उसे रिहा कर दिया जाता है। साहूकार की साजिश सबके सामने आ जाती है। उसे अपनी गलती का एहसास होता है। अंत में परिवार एक हो जाता है। जमीन वापस मिल जाती है। राधा और शिवराम का प्रेम भी सफल होता है। मोती और रेखा भी अपने जीवन को नई समझ और सच्चाई के साथ आगे बढ़ाते हैं।
कहानी का अंत सुखद होता है। यह कहानी सिखाती है कि सच्चाई और प्रेम की जीत हमेशा होती है। परिवार का साथ और त्याग सबसे बड़ी ताकत है। धरती जैसे पुकार कर कहती है कि जो अपने परिवार और सच्चाई के लिए खड़ा होता है, वही सच्चा इंसान है।
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