Chanda Aur Bijli is a 1969 Bollywood film
directed by Atma Ram. It stars Sanjeev
Kumar, Padmini in
lead roles. The story depicts the struggle of two lives, a beautiful street
dancer Bijli (played by Padmini)
is in a gang of thieves and Chanda (played by Sachin)
is the heir to a posh household but due to the death of his parents lands up in
an orphanage.
चंदा और बिजली एक सन् 1969 की हिन्दी फिल्म है, जिसका निर्देशन Atma Ram ने किया था। इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में Sanjeev Kumar और Padmini हैं। यह फिल्म प्रसिद्ध अभिनेता और निर्माता Guru Dutt को समर्पित की गई थी। कहानी दो अलग-अलग जिंदगियों के संघर्ष को दिखाती है। एक ओर है बिजली, जो बहुत सुंदर और हुनरमंद सड़क नर्तकी है और छोटे चोरों के एक गिरोह के साथ रहती है। दूसरी ओर है चंदा, जो एक अमीर और खानदानी परिवार का वारिस है, लेकिन अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद अनाथालय में पहुंच जाता है। किस्मत इन दोनों को अजीब रास्तों से गुजारती है और अंत में सच और न्याय की जीत होती है।
कहानी की शुरुआत बिजली से होती है। बिजली एक खूबसूरत और तेज लड़की है। वह सड़कों पर नाचती है। लोग उसके नृत्य को देखकर खुश होते हैं और कुछ पैसे दे देते हैं। लेकिन उसका जीवन आसान नहीं है। वह अकेली है और उसे सहारा देने वाला कोई अपना नहीं है। वह कुछ छोटे चोरों के साथ रहती है। यह लोग जेब काटते हैं, छोटी-मोटी चोरी करते हैं और जैसे-तैसे अपना पेट भरते हैं। बिजली का दिल बुरा नहीं है, लेकिन हालात ने उसे इस रास्ते पर ला खड़ा किया है। वह अंदर से एक साफ और सच्ची लड़की है। उसे भी एक अच्छा घर और सम्मान की जिंदगी चाहिए, पर उसे लगता है कि यह सपना उसके लिए नहीं है।
दूसरी तरफ चंदा है। चंदा एक बड़े और इज्जतदार घर का बेटा है। उसके माता-पिता बहुत अच्छे और दयालु थे। लेकिन एक दुर्घटना में दोनों की मृत्यु हो जाती है। उस समय चंदा बहुत छोटा था। उसके घर में काम करने वाली एक दाई ने, जिसने उसे जन्म के समय संभाला था, लालच में आकर उसकी मां के कंगन और कुछ जरूरी कागज चुरा लिए थे। वही कागज उसके असली खानदान का सबूत थे। दाई ने अपने लालच में आकर चंदा की पहचान छिपा दी। इसके कारण चंदा अपने ही घर से दूर हो गया और अनाथालय में पहुंचा दिया गया।
अनाथालय में बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता था। वहां का प्रबंधक कठोर और स्वार्थी आदमी था। वह बच्चों को डांटता, मारता और उनसे जबरन काम करवाता था। बच्चे डर के साए में जीते थे। चंदा भले ही छोटा था, लेकिन उसके खून में शाही संस्कार थे। जब वह देखता कि किसी बच्चे को बेवजह मारा जा रहा है या भूखा रखा जा रहा है, तो उसका खून खौल उठता। वह अन्याय सहन नहीं कर पाता था।
एक दिन जब प्रबंधक ने एक बीमार बच्चे को दवा देने के बजाय उसे डांटा और मारा, तो चंदा से रहा नहीं गया। उसने आगे बढ़कर विरोध किया। उसने कहा कि बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार गलत है। उसकी बात सुनकर प्रबंधक गुस्से से भर गया। उसने चंदा को बुरी तरह पीटा। उसे सजा दी गई, खाना बंद कर दिया गया और अंधेरे कमरे में बंद कर दिया गया। लेकिन चंदा का हौसला नहीं टूटा। वह और मजबूत बन गया। बाकी बच्चे उसे अपना नेता मानने लगे।
उधर वह दाई, जिसने लालच में आकर चंदा के कंगन और कागज चुराए थे, अब बूढ़ी और बीमार हो चुकी थी। उसे अपने पाप का एहसास होने लगा। वह मृत्यु शैया पर थी। उसे लगा कि अगर उसने सच नहीं बताया तो उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। उसने अनाथालय के प्रबंधक को बुलाया और उसे वह सबूत दे दिए जो चंदा की असली पहचान बताते थे। उसने अपने पाप स्वीकार किए और रोते-रोते प्राण त्याग दिए।
लेकिन प्रबंधक ईमानदार नहीं था। उसने सोचा कि अगर चंदा अपने असली घर पहुंच गया तो उसे बहुत दौलत और अधिकार मिलेंगे, और उसका झूठ खुल जाएगा। इसलिए उसने चाल चली। चंदा के असली दादा-दादी ने एक लड़के को गोद लिया हुआ था, जो उनके साथ रह रहा था। वह गोद लिया हुआ बेटा भी लालची था। प्रबंधक और उस लड़के ने मिलकर योजना बनाई कि किसी तरह चंदा को रास्ते से हटा दिया जाए।
चंदा को कुछ शक हुआ। उसे लगा कि उसके साथ कुछ बड़ा खेल हो रहा है। एक रात वह अनाथालय से भाग गया। वह भागते-भागते शहर की गलियों में पहुंच गया। भूखा और थका हुआ वह एक कोने में बैठ गया। तभी उसकी मुलाकात बिजली और उसके गिरोह से हुई। गिरोह के लोगों ने सोचा कि यह लड़का काम आ सकता है। उन्होंने उसे अपने साथ रख लिया।
चंदा ने कोशिश की कि वह उनके साथ घुल-मिल जाए, लेकिन उसका मन चोरी में नहीं लगता था। जब गिरोह के लोग जेब काटते या घरों में चोरी की योजना बनाते, तो चंदा घबरा जाता। उसे अपने माता-पिता की सीख याद आती। वह जानता था कि चोरी गलत है। बिजली ने उसकी परेशानी समझी। उसने देखा कि यह लड़का बाकी चोरों जैसा नहीं है। उसमें सच्चाई है, हिम्मत है और दया है।
धीरे-धीरे बिजली और चंदा के बीच दोस्ती हो गई। बिजली को चंदा की साफ सोच और साहस अच्छा लगने लगा। चंदा को बिजली का नाच और उसका कोमल दिल अच्छा लगा। दोनों एक-दूसरे का सहारा बनने लगे। लेकिन गिरोह का सरदार चंदा से खुश नहीं था। उसे लगता था कि यह लड़का एक दिन मुसीबत खड़ी करेगा।
एक दिन गिरोह ने एक बड़े घर में चोरी की योजना बनाई। चंदा को भी साथ ले जाया गया। जब वे घर के अंदर पहुंचे, तो चंदा चौंक गया। यह वही घर था जहां वह पैदा हुआ था। उसे कुछ धुंधली यादें आने लगीं। दीवारें, आंगन, एक पुराना पेड़, सब कुछ उसे अपना सा लगा। उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
चोरी के दौरान हंगामा हो गया। घर के लोग जाग गए। चंदा भागने के बजाय ठहर गया। तभी उसकी नजर एक तस्वीर पर पड़ी। वह उसके माता-पिता की तस्वीर थी। उसकी आंखों में आंसू आ गए। वह समझ गया कि यह उसका अपना घर है। उसी समय उसके दादा-दादी वहां आ गए। उन्होंने चंदा के चेहरे में अपने बेटे की झलक देखी। सवाल-जवाब शुरू हुए।
उधर प्रबंधक और गोद लिया हुआ बेटा भी वहां पहुंच गए। वे चंदा को बदनाम करने लगे। उन्होंने कहा कि यह लड़का चोर है और घर में चोरी करने आया था। लेकिन तभी सच सामने आने लगा। दाई द्वारा दिए गए कागजों की बात खुली। प्रबंधक की चालाकी सामने आई। गोद लिए बेटे का लालच भी उजागर हो गया।
कई मोड़ और संघर्ष के बाद सच्चाई जीत गई। चंदा को उसके असली दादा-दादी ने गले लगा लिया। उन्होंने उसे अपना वारिस मान लिया। प्रबंधक को उसके अपराध की सजा मिली। गोद लिया हुआ बेटा अपने लालच पर शर्मिंदा हुआ।
चंदा ने अपने दादा-दादी से कहा कि वह बिजली और उसके साथियों को नहीं भूलेगा। उसने वादा किया कि वह उन्हें भी सही रास्ते पर लाएगा। बिजली और गिरोह के बाकी लोग भी चंदा की सच्चाई और प्यार से बदल गए। उन्होंने चोरी छोड़ने का फैसला किया। चंदा ने उनकी मदद की ताकि वे ईमानदारी से काम करके जी सकें।
बिजली ने सड़क पर नाचना बंद नहीं किया, लेकिन अब वह सम्मान के साथ नाचती थी। उसे अब डर नहीं था। उसे एक परिवार मिल गया था। चंदा और बिजली का रिश्ता गहरा हो गया। दोनों ने मिलकर एक नई जिंदगी शुरू की, जिसमें सच्चाई, मेहनत और प्यार था।
फिल्म यह सिखाती है कि इंसान का जन्म चाहे कहीं भी हो, असली पहचान उसके कर्म से बनती है। हालात उसे गलत रास्ते पर ले जा सकते हैं, लेकिन अगर दिल साफ हो तो वह वापस सही राह पर आ सकता है। चंदा और बिजली की कहानी संघर्ष, सच्चाई और परिवर्तन की कहानी है। अंत में बुराई हारती है और अच्छाई जीतती है। यही इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश है।
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