"RAJA SAAB" - HINDI CLASSICAL MOVIE EXPLAIN / SHASHI KAPOOR & NANDA MOVIE



Raja Saab is a 1969 Bollywood drama film directed by Suraj Prakash under the banner of Limelight. It stars Shashi Kapoor and Nanda in pivotal roles. 


राजा साब सन् 1969 की एक हिन्दी फिल्म है, जिसका निर्देशन Suraj Prakash ने किया था। इस फिल्म का निर्माण लिमलाइट बैनर के अंतर्गत हुआ था। इसमें मुख्य भूमिकाओं में Shashi Kapoor और Nanda हैं। यह एक भावनात्मक कहानी है, जिसमें सपनों, सच्चाई, प्रेम और पहचान का संघर्ष दिखाया गया है। कहानी एक ऐसे युवक की है जो अनाथालय में पला-बढ़ा है, लेकिन उसके दिल में राजा की तरह जीने का सपना है।


कहानी की शुरुआत रaju से होती है। रaju एक अनाथालय में पला-बढ़ा लड़का है। उसने बचपन से ही कठिनाइयाँ देखी हैं। उसे न तो माता-पिता का प्यार मिला और न ही किसी बड़े घर का आराम। अनाथालय में उसे सादा खाना मिलता था, साधारण कपड़े पहनने को मिलते थे और छोटी-सी चारपाई पर सोना पड़ता था। लेकिन उसके मन में हमेशा बड़े सपने थे। वह सोचता था कि एक दिन वह भी शाही कपड़े पहनेगा, बड़े महल में रहेगा और लोग उसे सम्मान से देखेंगे। उसे लगता था कि जिंदगी छोटी नहीं, बड़ी होनी चाहिए।


रaju का स्वभाव बहुत हंसमुख था। वह कठिन हालात में भी मुस्कुराना जानता था। वह मेहनती था और दूसरों की मदद करता था। जब वह बड़ा हुआ तो उसने नौकरी की तलाश शुरू की। उसे एक राजघराने में काम मिल गया। वहां के मालिक थे राजकुमार प्रताप सिंह। प्रताप सिंह एक असली राजकुमार थे। उनका रहन-सहन शाही था। उनके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी। वे अच्छे दिल के इंसान थे, लेकिन कभी-कभी मजाक में या जिद में अजीब फैसले कर लेते थे।


रaju को राजकुमार के यहाँ छोटी-मोटी जिम्मेदारियाँ दी गईं। वह उनके कपड़े संभालता, संदेश पहुंचाता और जरूरत पड़ने पर साथ भी जाता। धीरे-धीरे रaju ने शाही जीवन को बहुत पास से देखा। उसने बड़े-बड़े कमरों, चमकते झूमरों, कीमती बर्तनों और आलीशान गाड़ियों को देखा। उसका सपना और भी मजबूत हो गया। वह सोचता था कि काश एक दिन उसे भी ऐसा जीवन मिले।


एक दिन राजकुमार प्रताप सिंह को एक खास काम से कहीं जाना था। उसी समय खबर आई कि राजकुमारी पूनम उनसे मिलने आने वाली हैं। पूनम एक सुंदर और सुसंस्कृत राजकुमारी थीं। वे अपने परिवार की इज्जत और परंपराओं का बहुत ध्यान रखती थीं। प्रताप सिंह ने मजाक में और थोड़ी जिद में आकर रaju से कहा कि वह कुछ समय के लिए उनकी जगह ले ले। उन्होंने कहा कि बस थोड़ी देर की बात है, और सब कुछ ठीक रहेगा। रaju पहले तो डर गया। उसने कहा कि यह गलत है। लेकिन मालिक के दबाव में वह मान गया।


जब पूनम आईं, तो उनके सामने रaju को राजकुमार की तरह पेश किया गया। रaju ने शाही कपड़े पहने, सिर ऊंचा रखा और संभलकर बात की। शुरू में वह बहुत घबराया हुआ था। उसे डर था कि कहीं उसकी सच्चाई सामने न आ जाए। लेकिन पूनम ने उससे बहुत शालीनता से बात की। उन्होंने उसमें एक सादगी और सच्चाई देखी जो उन्हें पसंद आई। रaju भी पूनम की विनम्रता और सुंदरता से प्रभावित हुआ।


धीरे-धीरे मुलाकातें बढ़ने लगीं। हर बार रaju को राजकुमार बनकर ही मिलना पड़ता। वह अपने मन में अपराधबोध महसूस करता था, लेकिन पूनम के साथ बिताए पलों में वह सब भूल जाता। दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर वह दोस्ती प्रेम में बदलने लगी। रaju को लगा कि उसका सपना सच हो रहा है। वह एक राजकुमारी से प्यार करने लगा था।


लेकिन उसके दिल में एक डर भी था। वह जानता था कि वह असली राजकुमार नहीं है। वह एक साधारण और गरीब युवक है। अगर पूनम को सच्चाई पता चल गई तो क्या होगा। क्या वह उससे नफरत करेंगी। क्या वह उसे धोखेबाज समझेंगी। यह सोचकर उसका मन बेचैन हो जाता।


उधर पूनम भी बदल रही थीं। उन्होंने रaju में वह देखा जो शायद एक असली राजकुमार में भी न हो। उन्होंने देखा कि वह दयालु है, दूसरों की चिंता करता है और हर छोटी बात में सच्चाई झलकती है। उन्हें उससे प्रेम होने लगा। लेकिन वे यह मान रही थीं कि वह एक राजघराने का युवक है। उनके परिवार को भी यही बताया गया था।


एक दिन परिस्थितियाँ बदल गईं। कुछ लोगों को शक होने लगा। राजमहल में काम करने वाले एक कर्मचारी ने रaju को पहले भी साधारण कपड़ों में देखा था। उसने सच्चाई जानने की कोशिश की। धीरे-धीरे बात फैलने लगी। रaju का डर बढ़ गया। उसने सोचा कि अब सच छिपाना मुश्किल है।


अंत में सच्चाई सामने आ गई। पूनम को पता चल गया कि रaju असली राजकुमार नहीं है। वह एक अनाथालय में पला-बढ़ा साधारण युवक है। यह सुनकर उनका दिल टूट गया। उन्हें लगा कि उनसे धोखा हुआ है। उन्होंने रaju से सवाल किया कि उसने ऐसा क्यों किया। रaju ने सिर झुका लिया। उसने कहा कि उसने यह सब मजबूरी में किया। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह उससे सच्चा प्रेम करता है।


पूनम का मन उलझ गया। एक ओर उनका दिल था, जो रaju से प्यार करता था। दूसरी ओर उनका स्वाभिमान था, जिसे चोट पहुंची थी। उन्हें लगा कि एक राजकुमारी होकर उन्होंने एक गरीब युवक से प्रेम किया। समाज क्या कहेगा। परिवार क्या सोचेगा। यह संघर्ष उनके भीतर चलता रहा।


रaju ने फैसला किया कि वह अब और झूठ नहीं जी सकता। उसने सबके सामने सच स्वीकार किया। उसने कहा कि वह गरीब है, लेकिन उसका प्रेम सच्चा है। उसने कहा कि वह पूनम को खोना नहीं चाहता, लेकिन वह उन्हें मजबूर भी नहीं करेगा। वह वापस अपनी साधारण जिंदगी में लौट जाएगा।


राजकुमार प्रताप सिंह को भी अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने माना कि यह सब उनकी जिद का नतीजा था। उन्होंने पूनम और उनके परिवार से माफी मांगी। उन्होंने रaju की ईमानदारी की सराहना की।


धीरे-धीरे पूनम ने सोचना शुरू किया। उन्हें याद आया कि उन्हें रaju में क्या पसंद आया था। क्या वह उसका राजकुमार होना था, या उसका अच्छा दिल। उन्हें समझ में आया कि असली शाहीपन कपड़ों और महलों में नहीं होता। असली शाहीपन इंसान के चरित्र में होता है। रaju भले ही गरीब था, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था।


अंत में पूनम ने अपने दिल की सुनी। उन्होंने समाज और परंपराओं से ऊपर उठकर प्रेम को चुना। उन्होंने कहा कि उन्हें एक सच्चा इंसान चाहिए, न कि केवल एक नाम और पद। रaju के लिए यह सबसे बड़ा सम्मान था। उसका सपना राजा की तरह जीने का था, लेकिन उसे समझ में आया कि राजा होना धन से नहीं, बल्कि दिल से होता है।


फिल्म यह सिखाती है कि इंसान की असली पहचान उसके जन्म या धन से नहीं होती। सच्चाई, ईमानदारी और प्रेम ही सबसे बड़ी दौलत हैं। रaju का सपना पूरा हुआ, लेकिन उस रूप में नहीं जैसा उसने सोचा था। उसे महल से ज्यादा कीमती चीज मिली, सच्चा प्रेम और सम्मान। यही इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश है कि जीवन में सबसे बड़ी जीत दिल की होती है।

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