यह कहानी एक विशाल रियासत, खोई हुई राजकुमारी और एक चतुर ठग के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म का नायक राजकुमार सिंह है, जिसे सब 'राजा' (धर्मेंद्र) के नाम से जानते हैं। राजा एक बहुत ही होशियार और फुर्तीला इंसान है, जो अपनी बातों से किसी को भी जाल में फंसा सकता है। वह छोटे-मोटे अपराध करता है और हमेशा किसी बड़े जैकपॉट की तलाश में रहता है। दूसरी तरफ एक बहुत बड़ी रियासत की रानी राजमाता (दुर्गा खोटे) हैं, जो पिछले दस सालों से अपनी पोती राजकुमारी रत्ना की तलाश कर रही हैं।
दशकों पहले एक भयानक साजिश के तहत राजकुमारी रत्ना के माता-पिता की हत्या कर दी गई थी। उस कत्लेआम के दौरान नन्ही राजकुमारी गायब हो गई थी। राजमाता का मानना है कि उनकी पोती कहीं न कहीं जिंदा है। उन्होंने घोषणा कर रखी है कि जो कोई भी उनकी पोती को वापस लाएगा, उसे बहुत बड़ा इनाम दिया जाएगा। राजा की नजर इसी इनाम पर है। वह तय करता है कि वह किसी ऐसी लड़की को खोजेगा जो राजकुमारी जैसी दिखती हो और उसे नकली राजकुमारी बनाकर पेश करेगा।
राजा की तलाश उसे सड़कों पर नाचने वाली एक लड़की शन्नो (हेमा मालिनी) तक ले जाती है। शन्नो एक साधारण गरीब लड़की है जो गलियों में नाच-गाकर अपना पेट पालती है। राजा देखता है कि शन्नो की शक्ल और कद-काठी राजकुमारी रत्ना से काफी मिलती-जुलती है। वह शन्नो को फुसलाता है और उसे अमीर बनाने का लालच देता है। वह उसे अपने साथ ले आता है और उसे एक 'नकली राजकुमारी' बनाने की ट्रेनिंग देना शुरू करता है।
यह प्रशिक्षण बहुत कठिन होता है। राजा शन्नो को शाही शिष्टाचार, चलने-बोलने का ढंग, खाने-पीने के तरीके और राजघराने के इतिहास के बारे में सब कुछ सिखाता है। वह उसे बताता है कि उसे राजमाता के सामने कैसे पेश आना है ताकि किसी को शक न हो। इस प्रक्रिया के दौरान राजा और शन्नो के बीच नोक-झोंक होती है, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल जाती है। राजा को अहसास होता है कि शन्नो दिल की बहुत साफ है, लेकिन उसका मकसद अभी भी वह इनाम की राशि है।
आखिरकार वह दिन आता है जब राजा शन्नो को महल में ले जाता है और उसे राजमाता के सामने 'राजकुमारी रत्ना' के रूप में पेश करता है। राजमाता अपनी पोती को इतने सालों बाद देखकर भावुक हो जाती हैं। हालांकि महल में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें शक होता है। गजेंद्र सिंह (प्रेमनाथ) और प्रताप (प्रेम चोपड़ा) जैसे लोग महल की संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। वे राजा और शन्नो के लिए मुश्किलें खड़ी करते हैं और उनकी सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं।
जैसे-जैसे शन्नो महल में रहने लगती है, उसे कुछ धुंधली यादें आने लगती हैं। वह महल के गुप्त रास्तों और पुरानी चीजों को पहचानने लगती है जिन्हें राजा ने उसे कभी नहीं सिखाया था। यहाँ कहानी में एक बहुत बड़ा मोड़ आता है। राजा को खुद यह नहीं पता था कि जिस लड़की को वह 'नकली' बनाकर लाया है, वह वास्तव में वही असली राजकुमारी रत्ना है जो बचपन में गायब हो गई थी। वह कोई ठग नहीं थी, बल्कि वह अपनी ही विरासत में वापस लौट आई थी।
महल के दुश्मन जब यह देखते हैं कि राजमाता शन्नो को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने वाली हैं, तो वे उसे रास्ते से हटाने की साजिश रचते हैं। राजा को जब अपनी गलती और शन्नो की असलियत का पता चलता है, तो उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है। अब वह इनाम के लिए नहीं, बल्कि अपने प्यार और अपनी असली राजकुमारी की रक्षा के लिए लड़ता है। फिल्म में कई एक्शन दृश्य हैं जहाँ राजा अकेले ही दुश्मनों का सामना करता है। जॉनी वॉकर का किरदार फिल्म में हास्य और मनोरंजन का तड़का लगाता है, जबकि हेलन और बिंदु के नृत्य और अभिनय फिल्म की चमक बढ़ाते हैं।
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत इस कहानी को और भी प्रभावी बनाता है। फिल्म के अंत में एक जबरदस्त मुकाबला होता है जहाँ राजा उन सभी गद्दारों का पर्दाफाश करता है जिन्होंने राजकुमारी के माता-पिता की हत्या की थी। राजमाता को अपनी असली पोती मिल जाती है और वे राजा की ईमानदारी (जो अंत में जाग गई थी) से खुश होकर दोनों को आशीर्वाद देती हैं। राजा और राजकुमारी रत्ना का मिलन होता है और रियासत में खुशियां वापस लौट आती हैं।
यह फिल्म 'अनास्तासिया' से प्रेरित है लेकिन भारतीय परिवेश में इसे बहुत ही खूबसूरती से ढाला गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि भाग्य के खेल निराले होते हैं और कभी-कभी जिसे हम मिट्टी समझते हैं, वह वास्तव में सोना निकलता है। राजा जानी केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह पहचान, विश्वास और प्रेम की एक कालजयी गाथा है।



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