"JAWAN MOHABBAT" - HINDI CLASSIC ROMANTIC COMEDY FILM / SHAMMI KAPOOR & ASHA PAREKH MOVIE








यह कहानी एक ऐसे परिवार की है जो ऊपर से देखने में बहुत सुखी और शांत जान पड़ता है, लेकिन अतीत की एक परछाईं इसे पूरी तरह से हिलाकर रख देती है। फिल्म जवान मोहब्बत हमें भावनाओं और रिश्तों के एक जटिल जाल में ले जाती है। इस कहानी के केंद्र में डॉक्टर सरीन हैं, जो समाज में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और अपना जीवन बड़े ही अनुशासन और सादगी से जी रहे हैं। उनका परिवार बहुत छोटा और प्यारा है। डॉक्टर सरीन अपनी पत्नी सुनीता और अपनी नन्हीं बेटी रेखा के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे हैं। सुनीता एक बहुत ही समझदार और समर्पित महिला है, जो अपने घर को स्वर्ग बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। उनके घर में डॉक्टर सरीन का छोटा भाई राजेश भी रहता है, जिसकी भूमिका शमी कपूर ने निभाई है। राजेश स्वभाव से बहुत ही हंसमुख, जिंदादिल और थोड़ा शरारती भी है। वह घर की रौनक है और अपनी भतीजी रेखा का सबसे प्रिय साथी है। राजेश अब विवाह के योग्य हो चुका है और पूरा परिवार उसके लिए एक आदर्श जीवनसाथी की तलाश में है। राजेश भी अपने जीवन के इस नए सफर को लेकर काफी उत्साहित है और अक्सर अपनी होने वाली पत्नी के सपनों में खोया रहता है।


घर का वातावरण खुशियों से भरा हुआ है, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक दिन डॉक्टर सरीन के दरवाजे पर अतीत की एक दस्तक सुनाई देती है। उनके घर एक बेहद सुंदर और आकर्षक युवती आती है जिसका नाम माला है। माला को देखते ही डॉक्टर सरीन के पैरों तले जमीन खिसक जाती है क्योंकि माला उनकी पुरानी प्रेमिका थी। इतना ही नहीं, अतीत में उन दोनों का प्रेम इतना गहरा था कि उन्होंने एक संक्षिप्त अवधि के लिए गुप्त रूप से विवाह भी किया था। उस समय की कुछ ऐसी परिस्थितियां रही थीं जिसके कारण वे अलग हो गए थे और डॉक्टर सरीन ने अपना नया जीवन शुरू कर लिया था। माला का अचानक सामने आना डॉक्टर सरीन के वर्तमान जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बन जाता है। माला की सुंदरता और उसकी बातों में अभी भी वही कशिश थी जिसने वर्षों पहले डॉक्टर सरीन को अपना दीवाना बना लिया था।


माला के आने के बाद डॉक्टर सरीन का व्यवहार बदलने लगता है। वह चाहकर भी माला के आकर्षण से खुद को दूर नहीं रख पाते। माला उन्हें अपने पुराने दिनों की याद दिलाती है और धीरे-धीरे उन्हें अपने मायाजाल में फंसाना शुरू कर देती है। डॉक्टर सरीन को यह अहसास होने लगता है कि वे अभी भी माला की ओर खिंचे चले जा रहे हैं। माला का व्यक्तित्व जितना आकर्षक था, उसके पीछे उतना ही गहरा अंधेरा छिपा था। वह छल, कपट और धोखे की एक ऐसी दुनिया से आई थी जिसकी भनक डॉक्टर सरीन को शुरुआत में नहीं लगती। माला का मुख्य उद्देश्य डॉक्टर सरीन के जीवन में शांति लाना नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ की पूर्ति करना था। वह बड़ी चतुराई से डॉक्टर सरीन को अपनी उंगलियों पर नचाने लगती है।


इधर घर में सुनीता को अपने पति के बदले हुए व्यवहार का आभास होने लगता है। डॉक्टर सरीन जो पहले अपना सारा समय परिवार को देते थे, अब अक्सर गुमसुम रहने लगते हैं और बहाने बनाकर घर से बाहर रहने लगे हैं। राजेश भी अपने भाई की इस बेचैनी को भांप लेता है। वह समझ जाता है कि बड़े भाई किसी बड़ी मानसिक कश्मकश से गुजर रहे हैं। राजेश जो अपनी मस्ती में मस्त रहता था, अब अपने भाई की समस्या को सुलझाने का संकल्प लेता है। इसी बीच राजेश की मुलाकात आशा पारेख द्वारा निभाए गए किरदार से होती है, जो फिल्म में उसकी प्रेमिका की भूमिका में हैं। उन दोनों के बीच के रोमांस के दृश्य फिल्म को एक हल्की-फुल्की और सुखद दिशा देते हैं। शमी कपूर का अपना खास अंदाज, उनके नृत्य और उनके संवाद दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते हैं।


जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, माला का असली चेहरा सामने आने लगता है। वह डॉक्टर सरीन को ब्लैकमेल करना शुरू कर देती है और उनके अतीत के राज को उजागर करने की धमकी देती है। डॉक्टर सरीन अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और अपने परिवार की सुख-शांति को बचाने के लिए माला की हर जायज और नाजायज मांग को पूरा करने की कोशिश करते हैं। वे खुद को एक ऐसे दलदल में फंसा हुआ पाते हैं जहाँ से निकलना नामुमकिन लग रहा था। माला की दुनिया केवल धोखे तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें मौत का साया भी मंडरा रहा था। वह अपराधी तत्वों के साथ मिली हुई थी और डॉक्टर सरीन का उपयोग अपने गैरकानूनी कामों के लिए करना चाहती थी।


जब पानी सिर से ऊपर गुजरने लगता है, तो राजेश को सारी सच्चाई का पता चल जाता है। उसे अपनी आँखों के सामने अपने भाई का घर टूटता हुआ दिखाई देता है। राजेश अब अपनी शरारतों को छोड़कर एक गंभीर रक्षक की भूमिका में आ जाता है। वह माला के इतिहास की छानबीन शुरू करता है और उन लोगों तक पहुँचता है जिनके साथ माला जुड़ी हुई थी। वह देखता है कि कैसे माला ने डॉक्टर सरीन की भावनाओं का फायदा उठाकर उन्हें एक अपराधी की तरह इस्तेमाल करने की योजना बनाई है। फिल्म में कई ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ रहस्य और रोमांच चरम पर होता है।


राजेश अपनी प्रेमिका की मदद से माला के जाल को काटने की कोशिश करता है। फिल्म में आशा पारेख और शमी कपूर की जोड़ी ने बहुत ही सुंदर प्रदर्शन किया है। उनके बीच के गीत और नृत्य उस दौर के सिनेमा की जान थे। लेकिन कहानी का गंभीर पक्ष लगातार बना रहता है। डॉक्टर सरीन को अपनी गलती का अहसास होता है और उन्हें समझ आता है कि उन्होंने माला के चक्कर में आकर अपनी वफादार पत्नी और मासूम बेटी के साथ कितना बड़ा अन्याय किया है। वे टूट जाते हैं, लेकिन राजेश उन्हें सहारा देता है और उन्हें इस मुसीबत से बाहर निकालने का वादा करता है।


अंतिम दृश्यों में माला की साजिशों का पूरी तरह से पर्दाफाश हो जाता है। एक नाटकीय घटनाक्रम में माला का असली साथी, जो वास्तव में पर्दे के पीछे से सब कुछ नियंत्रित कर रहा था, सामने आता है। वह व्यक्ति और माला मिलकर डॉक्टर सरीन को पूरी तरह बर्बाद करने वाले होते हैं, तभी राजेश अपनी सूझबूझ और बहादुरी से वहां पहुंच जाता है। वहां एक जोरदार मुकाबला होता है जिसमें राजेश की जांबाजी देखने को मिलती है। शमी कपूर ने एक्शन दृश्यों को भी उतनी ही शिद्दत से निभाया है जितना कि उनके गीतों को।


अंत में, सत्य की जीत होती है और बुराई का अंत होता है। माला और उसके साथियों को उनके कर्मों की सजा मिलती है। डॉक्टर सरीन अपनी पत्नी सुनीता से क्षमा मांगते हैं और उसे सब कुछ सच-सच बता देते हैं। सुनीता, जो एक महान हृदय वाली महिला है, अपने पति के पश्चाताप को देखकर उन्हें माफ कर देती है और परिवार को फिर से जोड़ लेती है। राजेश का भी उसकी प्रेमिका के साथ विवाह तय हो जाता है और घर में खुशियां वापस लौट आती हैं। यह फिल्म हमें यह संदेश देती है कि अतीत की गलतियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, यदि इंसान सच्चे दिल से पश्चाताप करे और अपनों का साथ हो, तो वह फिर से एक सही रास्ते पर लौट सकता है।


फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसके गीत और संगीत हैं, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। शमी कपूर का ऊर्जावान अभिनय और आशा पारेख की सुंदरता ने पर्दे पर जादू कर दिया है। भप्पी सोनी का निर्देशन बहुत ही सधा हुआ है, उन्होंने एक पारिवारिक ड्रामे को जिस तरह से रहस्य और रोमांच के साथ जोड़ा है, वह काबिले तारीफ है। डॉक्टर सरीन के रूप में निभाया गया किरदार भी दर्शकों की सहानुभूति बटोरने में सफल रहता है। फिल्म का छायांकन भी उस दौर के हिसाब से बहुत ही भव्य है। कुल मिलाकर यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ रिश्तों की अहमियत और धोखे से बचने की सीख भी देती है।


यह कहानी इस बात पर भी जोर देती है कि एक सुखी जीवन की नींव केवल और केवल आपसी विश्वास पर टिकी होती है। जब तक डॉक्टर सरीन ने सच को छुपाया, वे दुखी रहे, लेकिन जैसे ही उन्होंने सच का सामना किया, वे बंधनमुक्त हो गए। राजेश का किरदार इस फिल्म में एक आदर्श भाई का है जो अपने परिवार की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। यह फिल्म आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है क्योंकि मानवीय स्वभाव और भावनाएं कभी नहीं बदलतीं।

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