"HASEENON KA DEVTA" - HINDI CLASSIC ACTION DRAMA FILM / SANJAY KHAN / REKHA MOVIE



Haseenon Ka Devata is a 1971 Hindi-language drama film directed by Ravikant Nagaich, produced by Ram Dayal, with music composed by Laxmikant Pyarelal and songs penned by Anand Bakshi. The film stars Sanjay KhanRekhaBindu and Helen.


बहुत समय पहले एक बड़े और व्यस्त शहर में एक युवक रहता था। उसका नाम विजय था। विजय देखने में आकर्षक था, बोलने में मीठा था और लोगों के दिल जीत लेने की कला उसमें स्वाभाविक रूप से थी। वह जहां भी जाता, लोग उसकी ओर खिंचे चले आते। खासकर लड़कियां उसकी बातों और उसके स्वभाव से जल्दी प्रभावित हो जाती थीं। विजय को यह बात अच्छी तरह मालूम थी और धीरे धीरे वह इस बात पर गर्व करने लगा था कि वह किसी का भी दिल जीत सकता है।


विजय के जीवन में शुरुआत से ही बहुत संघर्ष रहा था। उसके पिता एक साधारण कर्मचारी थे और बहुत मेहनत से परिवार को चलाते थे। घर में पैसे की कमी रहती थी, लेकिन पिता हमेशा यह कहते थे कि ईमानदारी सबसे बड़ी दौलत होती है। विजय बचपन में यह बातें सुनता जरूर था, लेकिन जब वह बड़ा होने लगा तो उसने देखा कि दुनिया में लोग अक्सर पैसे और चालाकी से आगे बढ़ जाते हैं।


विजय पढ़ाई में ठीक था, लेकिन उसका मन पढ़ाई में कम और लोगों से मिलने जुलने में ज्यादा लगता था। वह अपने दोस्तों के साथ घूमता, हंसी मजाक करता और अपनी बातों से सबको खुश कर देता। उसके कई दोस्त थे, लेकिन कोई भी ऐसा नहीं था जिसे वह पूरी तरह अपना दिल खोलकर सब कुछ बता सके। समय के साथ विजय जवान हो गया। उसकी शक्ल सूरत और आत्मविश्वास ने उसे शहर में जल्दी ही मशहूर बना दिया। कई लड़कियां उससे प्रभावित हो जातीं और वह भी उनसे दोस्ती कर लेता। शुरुआत में यह सब उसके लिए केवल एक खेल जैसा था। उसे लगता था कि जीवन का मजा इसी में है कि हर दिन नया अनुभव मिले और नई पहचान बने।


इसी शहर में एक बहुत ही सरल और भली लड़की रहती थी जिसका नाम आशा था। आशा का स्वभाव बहुत शांत था। वह अपने परिवार से बहुत प्रेम करती थी और अपने जीवन में सच्चाई और सम्मान को सबसे ऊपर रखती थी। आशा का सपना था कि वह किसी ऐसे इंसान से विवाह करे जो ईमानदार हो, सच्चा हो और उसके साथ पूरी जिंदगी प्रेम से बिताए। एक दिन संयोग से विजय और आशा की मुलाकात हुई। विजय ने जब पहली बार आशा को देखा तो उसे लगा कि यह लड़की बाकी लड़कियों से अलग है। उसकी आंखों में एक सच्चाई थी, उसके चेहरे पर एक सरलता थी और उसके व्यवहार में एक गरिमा थी। विजय ने उससे बातचीत शुरू की और धीरे धीरे दोनों के बीच परिचय बढ़ने लगा।


आशा को भी विजय अच्छा लगा। विजय की हंसी, उसकी बातें और उसका आत्मविश्वास उसे प्रभावित करने लगे। लेकिन आशा स्वभाव से बहुत सावधान थी। वह जल्दी किसी पर भरोसा नहीं करती थी। वह चाहती थी कि वह जिस व्यक्ति को अपने जीवन में जगह दे, उसे अच्छी तरह समझ ले। दूसरी ओर विजय के जीवन में एक और स्त्री थी जिसका नाम रानी था। रानी बहुत सुंदर थी, लेकिन उसका स्वभाव थोड़ा तेज था। वह विजय से बहुत प्रभावित थी और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहती थी। विजय भी उसके साथ समय बिताता था, लेकिन उसके मन में कोई स्थिर भावना नहीं थी।


विजय का जीवन धीरे धीरे उलझता जा रहा था। एक तरफ आशा की सच्चाई और सरलता थी, दूसरी तरफ रानी का आकर्षण और जोश था। विजय को यह समझ नहीं आ रहा था कि वह अपने जीवन में किस दिशा में जाए। इसी बीच शहर में एक नृत्य करने वाली स्त्री भी थी जिसका नाम चमेली था। वह एक नृत्यगृह में काम करती थी और अपनी कला से लोगों का मनोरंजन करती थी। चमेली का जीवन आसान नहीं था। वह अंदर से बहुत अकेली थी, लेकिन बाहर से हमेशा मुस्कुराती रहती थी।


विजय एक दिन अपने दोस्तों के साथ उस स्थान पर गया जहां चमेली नृत्य करती थी। जब उसने चमेली को देखा तो वह उसकी कला से प्रभावित हो गया। चमेली ने भी विजय की ओर ध्यान दिया और उसे महसूस हुआ कि यह युवक बाकी लोगों से थोड़ा अलग है। धीरे धीरे विजय का परिचय चमेली से भी हो गया। चमेली को विजय की बातें अच्छी लगती थीं क्योंकि वह उसके साथ सम्मान से बात करता था। चमेली के जीवन में बहुत कम लोग ऐसे थे जो उसे एक इंसान की तरह समझते थे।


अब विजय के जीवन में तीन अलग अलग स्त्रियां थीं। आशा, रानी और चमेली। तीनों के स्वभाव अलग थे, तीनों की दुनिया अलग थी और तीनों के मन में विजय के लिए अलग अलग भावनाएं थीं। विजय को शुरुआत में यह सब रोमांचक लगता था। उसे लगता था कि वह बहुत भाग्यशाली है कि इतने लोग उससे प्रेम करते हैं। लेकिन धीरे धीरे उसे महसूस होने लगा कि यह स्थिति बहुत जटिल होती जा रही है। एक दिन आशा ने विजय से पूछा कि क्या वह सच में उससे प्रेम करता है। विजय उस समय हंसकर बात को टाल गया। लेकिन आशा के मन में संदेह का बीज पड़ गया।


दूसरी ओर रानी को भी यह महसूस होने लगा था कि विजय केवल उसी का नहीं है। वह विजय से नाराज रहने लगी और अक्सर उससे सवाल करती कि वह और किन किन लोगों से मिलता है। चमेली की स्थिति सबसे अलग थी। वह जानती थी कि समाज उसे सम्मान की नजर से नहीं देखता। इसलिए वह विजय से ज्यादा उम्मीद नहीं करती थी। लेकिन उसके मन में एक छुपी हुई इच्छा जरूर थी कि शायद विजय उसके जीवन में सच्चा साथी बन सके। समय बीतता गया और इन तीनों के बीच की स्थिति और भी उलझती चली गई। एक दिन ऐसा आया जब सच्चाई सबके सामने आने लगी।


आशा को पता चला कि विजय रानी और चमेली से भी मिलता है। यह सुनकर उसका दिल टूट गया। उसे लगा कि जिस व्यक्ति को वह सच्चा समझती थी, वह वास्तव में बहुत अलग निकला। रानी को भी यह पता चल गया कि विजय के जीवन में और भी लोग हैं। उसका गुस्सा बहुत बढ़ गया। उसने विजय से कहा कि वह अब उससे कोई संबंध नहीं रखना चाहती। चमेली ने जब यह सब सुना तो वह चुप हो गई। उसने सोचा कि शायद वह शुरू से ही एक सपना देख रही थी जो कभी सच नहीं हो सकता था।


विजय पहली बार अपने जीवन में अकेला महसूस करने लगा। उसे समझ में आने लगा कि उसने अपने व्यवहार से कितने लोगों को दुख दिया है। वह रात भर सोचता रहा। उसे अपने पिता की बातें याद आने लगीं कि सच्चाई और ईमानदारी ही जीवन की असली ताकत होती है। विजय ने तय किया कि अब उसे अपने जीवन को बदलना होगा। वह सबसे पहले आशा के पास गया। उसने उससे माफी मांगी और कहा कि उसने बहुत बड़ी गलती की है। आशा की आंखों में आंसू थे। उसने कहा कि माफी मांगना आसान है, लेकिन भरोसा टूट जाने के बाद उसे वापस पाना बहुत कठिन होता है।


फिर विजय रानी के पास गया। रानी अभी भी उससे नाराज थी। उसने कहा कि उसे ऐसे व्यक्ति की जरूरत नहीं जो हर किसी से एक जैसा व्यवहार करे। आखिर में विजय चमेली के पास गया। चमेली ने शांत स्वर में कहा कि उसे पहले से ही पता था कि यह कहानी ऐसे ही खत्म होगी। विजय ने सिर झुका लिया। उसे पहली बार अपनी गलतियों का पूरा एहसास हो रहा था। उस दिन के बाद विजय ने अपने जीवन को बदलने का निर्णय लिया। उसने दिखावा और छल छोड़कर सच्चाई का रास्ता अपनाने की कोशिश शुरू की।


समय के साथ लोग उसके बदलते हुए व्यवहार को देखने लगे। वह अब लोगों की मदद करता था, ईमानदारी से काम करता था और किसी को धोखा नहीं देता था। धीरे धीरे शहर में उसकी नई पहचान बनने लगी। लोग अब उसे केवल आकर्षक युवक के रूप में नहीं बल्कि एक जिम्मेदार इंसान के रूप में देखने लगे। आशा ने भी समय के साथ उसके परिवर्तन को देखा। उसे महसूस हुआ कि विजय सच में बदल गया है। एक दिन दोनों फिर से मिले। इस बार उनके बीच कोई दिखावा नहीं था। केवल सच्चाई और समझ थी।


विजय ने कहा कि उसने जीवन से बहुत बड़ी सीख ली है। उसने कहा कि प्रेम केवल आकर्षण नहीं होता, बल्कि जिम्मेदारी और सम्मान भी होता है।आशा ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा कि अगर इंसान सच में बदल जाए तो जीवन उसे दूसरा मौका जरूर देता है। रानी भी अपने जीवन में आगे बढ़ चुकी थी। उसने अपने लिए नया रास्ता चुन लिया था। चमेली ने भी अपने जीवन को नए तरीके से जीना शुरू किया। उसने अपनी कला को ही अपना सहारा बना लिया और आत्मसम्मान के साथ जीवन बिताने लगी। समय के साथ विजय और आशा का संबंध मजबूत होता गया। उन्होंने साथ मिलकर एक नया जीवन शुरू करने का फैसला किया।


विजय अब पहले जैसा नहीं रहा था। वह समझ चुका था कि किसी का दिल जीतना आसान होता है, लेकिन उसे सच्चाई से संभालना बहुत कठिन होता है। शहर के लोग अक्सर उसकी कहानी को याद करते थे और कहते थे कि जीवन में सबसे बड़ी जीत वही होती है जब इंसान अपनी गलतियों से सीख लेता है। इस तरह विजय की कहानी केवल प्रेम की कहानी नहीं रही, बल्कि एक ऐसे इंसान की कहानी बन गई जिसने अपने अहंकार और भ्रम को छोड़कर सच्चाई का रास्ता अपनाया। और यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा संदेश था कि सच्चा प्रेम कभी छल और दिखावे पर नहीं टिकता। वह केवल सच्चाई, सम्मान और विश्वास पर ही टिकता है।

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