Anmol Moti is a 1969 Indian romantic action film, produced and directed by S.D. Narang on Narang Films banner. Starring Jeetendra, Babita and music composed by Ravi. READ MORE IN HINDI…
समुद्र के किनारे एक छोटा सा गाँव बसा हुआ था। यह गाँव बहुत साधारण था, लेकिन यहाँ के लोग बहुत मेहनती और ईमानदार थे। इस गाँव के लोग पीढ़ियों से समुद्र में गोता लगाकर मोती निकालने का काम करते थे। यह काम बहुत खतरनाक था, फिर भी ये लोग डरते नहीं थे, क्योंकि यही उनका जीवन था। समुद्र ही उनका सहारा था और समुद्र से मिलने वाले मोती ही उनकी रोज़ी रोटी थे।
इस गाँव का मुखिया गोकुल नाम का एक नेक दिल इंसान था। गोकुल बहुत सच्चा, दयालु और सबका भला चाहने वाला था। गाँव का कोई भी आदमी दुख में होता तो गोकुल सबसे पहले उसकी मदद करता। वह सबको अपने परिवार की तरह मानता था। गाँव के लोग उसकी बहुत इज्जत करते थे और उसके कहे हर बात को मानते थे।
गोकुल का एक ही बेटा था जिसका नाम माणिक था। माणिक जवान हो चुका था और अपने पिता जैसा ही ईमानदार और बहादुर था। उसकी शादी लक्ष्मी नाम की एक संस्कारी और सरल स्वभाव की लड़की से हुई। शादी बहुत सादगी से हुई, लेकिन सबके दिलों में खुशी थी। लक्ष्मी अपने पति और ससुर से बहुत प्यार करती थी और घर को बहुत अच्छे से संभालती थी।
शादी के बाद गोकुल ने सोचा कि अब उसका बेटा घर और गाँव की जिम्मेदारी संभाल सकता है। इसलिए उसने तीर्थ यात्रा पर जाने का निश्चय किया। गाँव वालों ने उसे विदा किया और उसकी यात्रा के लिए प्रार्थना की। गोकुल खुशी और भरोसे के साथ गाँव से चला गया।
गोकुल के जाने के अगले ही दिन माणिक पहली बार समुद्र में मोती निकालने के लिए गया। यह उसके जीवन का बहुत बड़ा दिन था। सब लोग किनारे खड़े होकर उसकी सफलता की कामना कर रहे थे। माणिक ने साहस के साथ समुद्र में छलांग लगाई और गहराई में चला गया। काफी देर बाद उसे एक बहुत सुंदर और कीमती मोती मिल गया। वह बहुत खुश हुआ और ऊपर आने लगा।
लेकिन तभी समुद्र के भीतर एक भयानक जीव आ गया। वह एक बड़ा ऑक्टोपस था। उसने अपने लंबे हाथों से माणिक को कसकर पकड़ लिया। माणिक बहुत छटपटाया, लेकिन वह छूट नहीं पाया। धीरे धीरे उसकी सांसें रुकने लगीं और वह समुद्र में डूब गया। जब माणिक बाहर नहीं आया तो गाँव में हड़कंप मच गया। सब समझ गए कि कोई बड़ा अनहोनी हो गई है।
जब यह खबर लक्ष्मी को मिली तो वह पूरी तरह टूट गई। कुछ समय बाद गोकुल भी लौट आया और बेटे की मृत्यु का समाचार सुनकर वह अंदर से पूरी तरह टूट गया। उसके जीवन का सबसे बड़ा सहारा उससे छिन गया था। गोकुल ने अपने दुख को दिल में दबा लिया और अपनी बहू लक्ष्मी और गाँव के लोगों का सहारा बना रहा।
कुछ समय बाद लक्ष्मी ने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची बहुत सुंदर थी। उसका नाम रोपा रखा गया। लेकिन दुख की बात यह थी कि बच्ची को जन्म देने के तुरंत बाद लक्ष्मी भी इस दुनिया से चली गई। अब गोकुल के पास केवल उसकी पोती रोपा बची थी। गोकुल ने उसी बच्ची को अपना जीवन बना लिया और उसे माँ बाप दोनों का प्यार देने लगा।
इसी दौरान सरकार ने यह फैसला लिया कि अब समुद्र से मोती निकालने का काम बंद किया जाएगा, क्योंकि इसमें लोगों की जान जा रही थी। अब गाँव वालों को मोती निकालने की इजाजत नहीं थी। मजबूरी में गाँव के लोगों ने मछली पकड़ने का काम शुरू किया। जीवन कठिन हो गया, लेकिन लोग फिर भी ईमानदारी से मेहनत करते रहे।
समय बीतता गया और रोपा बड़ी होने लगी। वह बहुत साहसी, साफ दिल और सच्ची लड़की बनी। वह गलत बात को कभी सहन नहीं करती थी। वह अपने दादा गोकुल से बहुत प्यार करती थी और गाँव के हर व्यक्ति का सम्मान करती थी। गाँव के लोग उसे अपनी बेटी की तरह मानते थे।
उसी इलाके में एक अमीर और लालची जमींदार रहता था। उसे पता चला कि इस समुद्र में अब भी कीमती मोती मौजूद हैं। उसने सोचा कि अगर वह इस गाँव पर कब्जा कर ले तो वह बहुत अमीर बन सकता है। इसके लिए उसने एक चाल चली। उसने अपने बेटे विजय को गाँव भेजा ताकि वह गाँव वालों का भरोसा जीते और उनकी कमजोरियों का पता लगाए।
विजय गाँव में आकर रहने लगा। शुरू में उसका मन अपने पिता की योजना के अनुसार था, लेकिन धीरे धीरे उसे गाँव वालों की सच्चाई और अच्छाई समझ आने लगी। वह पहली बार ऐसे लोगों से मिला जो बिना स्वार्थ के एक दूसरे की मदद करते थे। उसका दिल बदलने लगा।
इसी बीच विजय की मुलाकात रोपा से हुई। रोपा की सच्चाई, साहस और साफ दिल ने विजय को बहुत प्रभावित किया। धीरे धीरे दोनों के बीच प्रेम हो गया। विजय ने मन ही मन तय कर लिया कि वह अपने पिता की गलत राह पर नहीं चलेगा।
एक दिन गोकुल को विजय की असली पहचान का पता चल गया। वह बहुत दुखी हुआ और गुस्से में विजय को गाँव से निकाल दिया। रोपा भी नाराज़ हो गई और विजय से बात करना बंद कर दिया। विजय चुपचाप गाँव छोड़कर चला गया।
कुछ समय बाद गोकुल को एहसास हुआ कि विजय ने कभी गाँव का नुकसान नहीं किया और वह सच्चे दिल से रोपा से प्रेम करता है। गोकुल खुद जमींदार के पास गया और विजय तथा रोपा की शादी का प्रस्ताव रखा। लेकिन जमींदार ने बहुत अधिक दहेज माँगा। गोकुल ने मजबूरी में हाँ कर दी।
दहेज जुटाने के लिए गोकुल ने फिर से समुद्र में गोता लगाने का निश्चय किया, जबकि यह बहुत खतरनाक था। वह समुद्र में गया और एक बहुत कीमती मोती निकाल लाया। लेकिन उसी समय वही ऑक्टोपस फिर से आ गया और गोकुल को पकड़ लिया।
यह देखकर विजय और रोपा समुद्र में कूद पड़े। दोनों ने पूरी ताकत से गोकुल को बचाया। बहुत संघर्ष के बाद ऑक्टोपस मर गया और तीनों सुरक्षित बाहर आ गए।
इस घटना ने जमींदार का दिल बदल दिया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने माफी माँगी और लालच छोड़ दिया। विजय और रोपा की शादी सादगी से हुई। पूरे गाँव में खुशी छा गई।
अंत में गोकुल फिर से तीर्थ यात्रा पर निकला, इस बार उसके मन में शांति थी। उसने समझ लिया था कि सच्चा मोती समुद्र में नहीं, बल्कि अच्छे दिलों में होता है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि लालच इंसान को अंधा बना देता है, लेकिन सच्चाई, प्रेम और त्याग हर कठिनाई को हरा देते हैं। यही इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
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