IMMAAN DHARAM - HINDI MOVIE REVIEW / AMITABH BACHCHAN / SHASHI KAPOOR / SAJEEV KUMAR MOVIE

 


बॉलीवुड की मशहूर जोड़ी सलीम-जावेद द्वारा लिखी गई और देशमुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म "इम्मान धरम", एक सामाजिक और एक्शन से भरपूर ड्रामा है, जो ईमानदारी, इंसाफ और इंसानियत की गहरी बात करता है। इस फिल्म में हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार शामिल हैंअमिताभ बच्चन, शशि कपूर, संजीव कुमार, रेखा, अपर्णा सेन, हेलेन और प्रेम चोपड़ा फिल्म का संगीत दिया है लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने।

हालाँकि जब यह फिल्म रिलीज़ हुई, तो बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन इसकी कहानी, किरदार और सामाजिक संदेश ने इसे एक मजबूत फिल्म बना दिया है, जो आज भी याद की जाती है।

 

फिल्म की कहानी शुरू होती है अहमद, (अमिताभ बच्चन) और मोहन, (शशि कपूर) से, जो पेशे से गवाह हैंलेकिन झूठे गवाह। ये दोनों अदालतों के बाहर घूमते रहते हैं और पैसे लेकर किसी भी केस में झूठा बयान देने को तैयार रहते हैं। ये समाज की उस हकीकत को दिखाते हैं जहाँ न्याय को पैसे और झूठ से तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है।

इन दोनों की जिंदगी तब बदलती है जब इनकी मुलाकात होती है कबीर दास, (संजीव कुमार) से। कबीर दास एक ईमानदार और सच्चा इंसान है, जो इंसाफ में विश्वास रखता है। उसकी बातें और जीवनशैली अहमद और मोहन को झकझोर देती है, और वो अपने रास्ते बदलने का फैसला करते हैं।

 

अब अहमद और मोहन अपनी पुरानी गवाही वाली जिंदगी छोड़कर ईमानदारी की राह पर चलने की कोशिश करते हैं। लेकिन जल्द ही उन्हें ये अहसास होता है कि इस दुनिया में ईमानदारी से जीना कितना मुश्किल है। रोज़गार मिलना मुश्किल हो जाता है, पेट भरना मुश्किल हो जाता है, और समाज भी उन्हें तिरस्कार से देखने लगता है।

 

कहानी में मोड़ तब आता है जब कबीर दास को एक मर्डर केस में फंसा दिया जाता है, जिसमें उसका कोई हाथ नहीं होता। वो खुद को निर्दोष बताता है, लेकिन पुलिस और कानून उसे मुजरिम मान लेते हैं। अब अहमद और मोहन, जो खुद कभी झूठे गवाह थे, अपने गुरु समान कबीर दास को बचाने के लिए आगे आते हैं।

वे कसम खाते हैं कि असली कातिल को ढूंढ़ कर रहेंगे और कबीर दास को इंसाफ दिलाएंगे। लेकिन सच्चाई तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं होता। उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, माफिया, गुंडे और भ्रष्ट सिस्टम उनके रास्ते में आते हैं। साथ ही उनकी अपनी पुरानी छवि भी उनके खिलाफ काम करती है।

 

इस फिल्म में दो महत्वपूर्ण महिला किरदार हैंरेखा और अपर्णा सेन, जो केवल कहानी में प्रेम और भावनाओं का तड़का देती हैं, बल्कि नायकों को सहारा और प्रेरणा भी देती हैं। साथ ही हेलेन का ग्लैमर और प्रेम चोपड़ा की खलनायकी फिल्म को और अधिक रोचक बनाते हैं।

 

फिल्म का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का है, जिसमें कुछ भावनात्मक और प्रेरणादायक गीत शामिल हैं। संवादों में सलीम-जावेद की कलम का असर साफ नजर आता हैतेज, दमदार और समाज पर कटाक्ष करने वाले।

 

"इम्मान धरम" एक ऐसी फिल्म है जो दिखाती है कि ईमानदारी की राह आसान नहीं होती, लेकिन अगर इंसान का दिल साफ हो और इरादा मजबूत, तो वो किसी भी अन्याय का सामना कर सकता है। फिल्म हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सच में हमारे समाज में ईमानदारी के लिए कोई जगह है?

हालाँकि फिल्म को रिलीज़ के समय बड़ी सफलता नहीं मिली, पर इसका संदेश आज भी प्रासंगिक है। यह फिल्म उन लोगों के लिए है जो सामाजिक मुद्दों पर बनी सशक्त कहानियाँ देखना पसंद करते हैं।

 

अगर आपको सत्य, न्याय और इंसानियत पर विश्वास है, तो 'इम्मान धरम' ज़रूर देखिएक्योंकि कभी-कभी गलत राह पर चलने वाला भी सही रास्ता पकड़ सकता है, अगर उसे सही मार्गदर्शन मिले।



 

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