प्यार किया है प्यार करेंगे 1986 की भारतीय हिंदी फिल्म है, जो विजय रेड्डी द्वारा निर्देशित और 1986 में रिलीज़ हुई थी। फिल्म में अनिल कपूर, अशोक कुमार, पद्मिनी कोल्हापुरे और अनीता राज हैं। यह निर्देशक की अपनी हिट कन्नड़ फिल्म ना निन्ना मारेयालारे की रीमेक है।
कहानी शुरू होती है भारत के उत्तर दिशा के एक ठंडे और बर्फीले इलाके से, जहाँ एक होशियार और साहसी युवक आनंद (अनिल कपूर) रहता है। आनंद एक अनाथ है, लेकिन उसकी परवरिश एक मुस्लिम व्यक्ति अब्दुल रहमान (अशोक कुमार) ने की है, जो उसे अपने बेटे की तरह प्यार करता है। आनंद का एक जुनून है – स्कीइंग, यानी बर्फ पर फिसलना। वह इसमें चैंपियन है और लोग उसकी इस कला को देखकर बहुत प्रभावित होते हैं।
एक दिन, एक खूबसूरत लड़की उषा (पद्मिनी कोल्हापुरे), जो एक अमीर और रईस परिवार से है, आनंद को स्की करते हुए देखती है और पहली ही नजर में उसे दिल दे बैठती है। धीरे-धीरे उषा और आनंद के बीच मुलाकातें होती हैं और दोनों में गहरा प्यार हो जाता है।
लेकिन जैसा कि अक्सर होता है, प्यार की राह आसान नहीं होती। जब उषा की माँ अन्नपूर्णा देवी (अनिता राज) को इस रिश्ते के बारे में पता चलता है, तो वह बहुत नाराज़ हो जाती हैं। उन्हें आनंद की अनाथ पृष्ठभूमि और मध्यम वर्गीय स्थिति बिल्कुल पसंद नहीं आती। वह उषा को सख्त हिदायत देती हैं कि वह आनंद से कभी नहीं मिलेगी और बिना उनकी इजाज़त के घर से बाहर भी नहीं निकलेगी।
हालाँकि आनंद और उषा का प्यार सच्चा होता है, फिर भी अन्नपूर्णा देवी उनकी शादी की बात को टालती हैं। बाहर से वह मान जाती हैं और कहती हैं कि वो शादी की तैयारी करेंगी, लेकिन अंदर ही अंदर एक चाल चलती हैं। वह उषा की शादी एक अमीर आदमी एन.एन. शुक्ला के बेटे से तय कर देती हैं और दबाव में आकर उषा को मजबूरन यह शादी करनी पड़ती है।
जब आनंद को इस सच्चाई का पता चलता है, तो वह अंदर से टूट जाता है। उसका दिल बुरी तरह से टूट जाता है और वह निराशा में डूब जाता है। इस दौरान उसकी मुलाकात होती है शोभा (अनीता राज) से, जो उसके बॉस की बेटी होती है। शोभा उसकी भावनाओं को समझती है और धीरे-धीरे आनंद को मानसिक सहारा देने लगती है।
वक़्त बीतता है। कई साल गुजर जाते हैं।
एक दिन अचानक आनंद और उषा की मुलाकात होती है। दोनों एक-दूसरे से मिलकर मुस्कुराते हैं और यह बताते हैं कि वे अब अपने-अपने जीवन में खुश हैं और उनके बच्चे भी हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
असलियत कुछ और ही होती है।
जो खुशी और मुस्कान दोनों एक-दूसरे को दिखा रहे होते हैं, वो बस एक दिखावा होता है। हकीकत में दोनों अब भी एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं, लेकिन हालात और समाज की साजिशों ने उन्हें अलग कर दिया था।
उनका प्यार अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने अपने ज़ख्मों को छुपा लिया। वो दोनों यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि वे अपनी-अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ गए हैं, लेकिन उनके दिल में एक कोना अब भी उस अधूरे प्यार के लिए धड़कता है।
फिल्म का संगीत भी लोगों को बहुत पसंद आया था। इसमें कुछ बेहद खूबसूरत गाने थे जो आज भी पुराने संगीत प्रेमियों को याद हैं।
फिल्म में रोमांस, इमोशन और दर्द का ऐसा संगम है कि दर्शकों के दिल को छू जाता है। एक हिंदू लड़के और मुस्लिम संरक्षक, अमीर-गरीब का टकराव, माँ की जिद, और बिछड़ा हुआ प्यार – ये सब मिलकर फिल्म को एक क्लासिक प्रेम कहानी बना देते हैं।
फिल्म की खासियतें -
अनिल कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे की शानदार केमिस्ट्री।
सामाजिक भेदभाव और पारिवारिक दबाव पर गहरा संदेश।
दिल को छू जाने वाली प्रेम कहानी।
पुराने ज़माने के बेहतरीन संगीत और भावनाओं से भरपूर पटकथा।
अगर आपको अधूरे प्यार की कहानियाँ पसंद हैं, जिसमें इमोशन, संघर्ष और यादें हों, तो "Pyar Kiya Hai Pyar Karenge" जरूर देखिए। ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन प्रेमियों की दास्तान है जो चाहकर भी साथ नहीं हो पाए।
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