KRISHNA ARJUN - HINDI MOVIE REVIEW / JEETENDRA MOVIE



नमस्कार दोस्तों!

आज हम आपको 1997 में रिलीज़ हुई एक भावनात्मक, एक्शन और ड्रामा से भरी हिंदी फिल्म "Krishna Arjun" की कहानी सुनाने जा रहे हैं। यह फिल्म शैलेन्द्र शुक्ला द्वारा निर्देशित और निर्मित की गई थी और इसमें मुख्य भूमिकाओं में हैं जीतेन्द्र, विवेक मुश्रान, करिना ग्रोवर और उपासना सिंह फिल्म का संगीत दिया था अरुप-प्रणय ने।

 

कहानी की शुरुआत होती है रामनाथ यादव से, जो एक स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उनकी पत्नी शारदा यादव अब अकेली हैं और अपने दो बेटों , कृष्णा और अर्जुन के साथ एक छोटे से गांव में एक साधारण लेकिन इज्ज़तदार जिंदगी जी रही हैं।

 

शारदा अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देती हैं और चाहती हैं कि अर्जुन आगे पढ़ाई करके एक बड़ा आदमी बने।

 

समय बीतता है और दोनों बेटे बड़े हो जाते हैं। अब मां चाहती हैं कि अर्जुन मुंबई जाकर पढ़ाई करे और एक अच्छा प्रोफेशनल बने। कृष्णा भी अपनी मां और भाई की इस इच्छा में पूरा साथ देता है।

 

अर्जुन मुंबई पहुंचता है और एक कॉलेज के हॉस्टल में रहने लगता है। वहीं उसकी मुलाकात होती है पूनम नाम की एक खूबसूरत कॉलेज गर्ल से। धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब जाते हैं और प्यार में पड़ जाते हैं।

 

सब कुछ ठीक चल रहा होता है, लेकिन तभी अर्जुन को एक खौफनाक खबर मिलती है।

 

अर्जुन को पता चलता है कि उसकी मां शारदा यादव अब इस दुनिया में नहीं रहीं। वह तुरंत गांव लौटता है, लेकिन गांव पहुंचकर उसे एक और भयानक सच पता चलता हैउसका बड़ा भाई कृष्णा जेल में है।

 

आरोप है कि कृष्णा ने एक स्कूल टीचर और विधवा महिला मीरा के साथ पहले बलात्कार किया और फिर उसकी हत्या कर दी। इस कलंक और दुख को शारदा सह नहीं पाई और दिल का दौरा पड़ने से चल बसीं।

 

अर्जुन सदमे में है। उसे यकीन नहीं होता कि उसका भाई ऐसा जघन्य अपराध कर सकता है। वो तय करता है कि वो सच्चाई का पता लगाएगा।

 

अब फिल्म का असली मोड़ शुरू होता है। अर्जुन अपने भाई से जेल में मिलता है और उससे पूरी कहानी जानने की कोशिश करता है। कृष्णा कहता है कि उसने ऐसा कोई अपराध नहीं किया। वो निर्दोष है और उसे फंसाया गया है।

 

अर्जुन को अब सच्चाई का पता लगाने के लिए पूरे गांव, पुलिस और मीरा के केस की जांच करनी पड़ती है। धीरे-धीरे अर्जुन को कुछ ऐसे सुराग मिलते हैं जिससे लगता है कि कृष्णा को झूठे आरोप में फंसाया गया है।

 

कौन है असली कातिल? क्यों मीरा की हत्या हुई? क्या अर्जुन अपने भाई को बचा पाएगा? और क्या वो अपनी मां की आत्मा को शांति दे पाएगा?

 

इन सवालों के जवाब आपको फिल्म देखने पर ही मिलेंगे, लेकिन कहानी में कई भावुक, रहस्यमयी और थ्रिलिंग मोड़ आते हैं जो दर्शकों को आखिरी सीन तक बांधे रखते हैं।

 

जीतेन्द्र ने फिल्म में छोटे लेकिन दमदार रोल में माता-पिता की इज्ज़तदार छवि को बखूबी निभाया है। विवेक मुश्रान ने अर्जुन के किरदार को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाया है। कोएना ग्रोवर ने पूनम के रूप में अच्छी परफॉर्मेंस दी है, और शारदा यादव के रूप में उपासना सिंह ने मां की ममता को बहुत भावुक तरीके से दर्शाया है।

 

फिल्म का संगीत अरुप-प्रणय ने दिया है, और इसमें कुछ भावुक गाने हैं जो कहानी की गहराई को और बढ़ा देते हैं। गाने भले ही सुपरहिट रहे हों, लेकिन फिल्म की भावनात्मकता को मजबूत करते हैं।

 

"Krishna Arjun" एक ऐसा फिल्म है जिसमें पारिवारिक रिश्ते, त्याग, सच्चाई की खोज और न्याय की लड़ाई को बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है। अगर आप इमोशनल ड्रामा और थ्रिलर फिल्में पसंद करते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए ज़रूर देखने लायक है।

 

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