यह कहानी एक ईमानदार और शिक्षित युवक आकाश की है जो बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में एक क्लर्क के रूप में काम करता है। आकाश का जीवन सादगी और सिद्धांतों से भरा है। वह अपने बड़े भाई दीनानाथ, अपनी भाभी, अपनी भतीजी शारदा और अपने भतीजे के साथ एक सुखी और संयुक्त परिवार में रहता है। दीनानाथ भी आकाश की तरह ही एक बेहद ईमानदार इंसान हैं और पूरा परिवार नैतिक मूल्यों को सबसे ऊपर रखता है। आकाश का मानना है कि ईमानदारी ही इंसान की सबसे बड़ी पूंजी है और इसी सोच के साथ वह अपना काम करता है। लेकिन जिस विभाग में आकाश काम करता है, वहां भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। उसके वरिष्ठ अधिकारी और सहकर्मी मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग करते हैं और आम जनता को लूटते हैं। आकाश की ईमानदारी इन भ्रष्ट लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन जाती है क्योंकि वह उनके गलत कामों में उनका साथ देने से साफ इनकार कर देता है।
शहर का एक प्रभावशाली और भ्रष्ट व्यक्ति धरमदास आकाश को अपने वश में करने की कोशिश करता है। धरमदास जानता है कि अगर आकाश उसके रास्ते से हट जाए या उसके साथ मिल जाए, तो वह म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के जरिए करोड़ों रुपये कमा सकता है। एक दिन धरमदास आकाश को अकेले में बुलाता है और उसे भारी रिश्वत देने की पेशकश करता है। वह आकाश से कहता है कि एक मामूली क्लर्क की तनख्वाह में वह कभी अमीर नहीं बन पाएगा और अगर वह थोड़ा सा समझौता कर ले, तो उसका पूरा जीवन ऐशो-आराम में बीतेगा। लेकिन आकाश का जमीर उसे ऐसा करने की इजाजत नहीं देता। वह धरमदास की रिश्वत को ठुकरा देता है और उसे चेतावनी देता है कि वह अपनी ईमानदारी से कभी समझौता नहीं करेगा। यह इनकार धरमदास के अहंकार को चोट पहुँचाता है और वह आकाश को बर्बाद करने की कसम खा लेता है।
इसी बीच चंदा नाम की एक लड़की आकाश के जीवन में आती है। चंदा और आकाश एक-दूसरे से प्यार करते हैं और दोनों का रिश्ता बहुत पवित्र है। चंदा आकाश की ईमानदारी और उसके साहस की प्रशंसा करती है और हर मुश्किल घड़ी में उसके साथ खड़े रहने का वादा करती है। आकाश भी चंदा को बहुत चाहता है और दोनों जल्द ही शादी करने का सपना देखते हैं। लेकिन धरमदास की काली छाया उनके खुशहाल जीवन पर मंडराने लगती है। धरमदास को जब पता चलता है कि वह आकाश को सीधे तौर पर नहीं झुका सकता, तो वह उसके परिवार को निशाना बनाने की योजना बनाता है। धरमदास एक चाल चलता है और दीनानाथ को बैंक में पैसे जमा करने का काम सौंपता है। धरमदास अपने सहायकों को निर्देश देता है कि रास्ते में गुंडों के जरिए दीनानाथ से वह पैसे छीन लिए जाएं ताकि दीनानाथ पर चोरी और धोखाधड़ी का आरोप लग सके।
दीनानाथ को किसी तरह धरमदास की इस साजिश की भनक लग जाती है। वह समझ जाता है कि अगर वह सामान्य रास्ते से गया तो गुंडे उसे लूट लेंगे और वह निर्दोष होकर भी अपराधी बन जाएगा। अपनी और अपने परिवार की इज्जत बचाने के लिए दीनानाथ लॉकर से पैसे निकालता है और भाग जाता है ताकि वह सुरक्षित स्थान पर जाकर सच्चाई साबित कर सके। जब धरमदास को पता चलता है कि दीनानाथ पैसे लेकर भाग गया है, तो वह इसे एक बड़ा मुद्दा बना देता है और पुलिस में रिपोर्ट कर देता है कि दीनानाथ ने कंपनी के पैसे चुराए हैं। इधर ऑफिस में भी आकाश के खिलाफ साजिशें तेज हो जाती हैं। उसके वरिष्ठ अधिकारी उसके काम में कमियां ढूंढने लगते हैं और एक बोर्ड मीटिंग बुलाई जाती है। इस मीटिंग में आकाश पर झूठा आरोप लगाया जाता है कि उसने धरमदास से रिश्वत मांगी थी। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि बोर्ड के अधिकांश सदस्य धरमदास के खरीदे हुए होते हैं और वे सब मिलकर आकाश के खिलाफ वोट देते हैं। परिणामस्वरूप आकाश को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है।
नौकरी जाने और भाई पर लगे झूठे आरोपों के बाद आकाश टूटता नहीं है, बल्कि उसके अंदर का गुस्सा एक ज्वाला बन जाता है। उसे समझ आ जाता है कि केवल ईमानदारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन भेड़ियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना होगा। आकाश को पता चलता है कि धरमदास एक बड़ी नीलामी में हिस्सा लेने वाला है। आकाश अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है और अलीबाबा नाम के एक व्यक्ति की मदद लेता है। अलीबाबा और आकाश मिलकर एक ऐसी योजना बनाते हैं जिससे धरमदास को नीचा दिखाया जा सके। आकाश वेश बदलकर और अलग पहचान बनाकर नीलामी में शामिल होता है और अपनी चतुराई से धरमदास को पछाड़ देता है। वह धरमदास और उसकी टीम को बुरी तरह से बेवकूफ बनाता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होता है।
जब आकाश कानूनी रूप से अपना हक मांगने और अपने भाई को बेगुनाह साबित करने की कोशिश करता है, तो उसे अहसास होता है कि सिस्टम पूरी तरह से सड़ा हुआ है। पुलिस से लेकर अदालत के बाबुओं तक हर जगह भ्रष्टाचार व्याप्त है। धरमदास अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके दीनानाथ को एक गंभीर अपराध में फंसा देता है और उसे गिरफ्तार करवा देता है। जेल की सलाखों के पीछे दीनानाथ अपनी बेगुनाही की गुहार लगाता है लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं है। अब आकाश के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली अपने भाई को जेल से बाहर निकालना और दूसरी धरमदास और उसके भ्रष्ट तंत्र का पर्दाफाश करना।
आकाश अब "अपना देश" की असली स्थिति को समझ चुका है। वह देखता है कि कैसे कुछ मुट्ठी भर लोग पूरे देश के संसाधनों को लूट रहे हैं और गरीब जनता न्याय के लिए तरस रही है। वह एक क्रांतिकारी रास्ता अपनाता है। वह छिपकर साक्ष्य जुटाना शुरू करता है। वह धरमदास के गोदामों और गुप्त ठिकानों पर नजर रखता है जहाँ गैरकानूनी गतिविधियां चलती हैं। चंदा भी इस मिशन में आकाश की पूरी मदद करती है। वह अपनी जान जोखिम में डालकर धरमदास के दफ्तर से कुछ जरूरी दस्तावेज निकालती है जो भ्रष्टाचार के बड़े खेल को उजागर कर सकते थे।
कहानी के चरमोत्कर्ष में आकाश एक बहुत बड़ा जोखिम उठाता है। वह धरमदास के सामने एक ऐसी स्थिति पैदा करता है जहाँ धरमदास खुद अपने अपराध कबूल करने पर मजबूर हो जाता है। एक हाई-वोल्टेज एक्शन ड्रामे के बाद जिसमें काफी भाग-दौड़ और संघर्ष होता है, आकाश सच्चाई को सबके सामने लाने में सफल होता है। वह उन सभी सबूतों को पेश करता है जिनसे साबित होता है कि दीनानाथ निर्दोष है और असली अपराधी धरमदास और उसके सहयोगी हैं। पुलिस को अंततः धरमदास को गिरफ्तार करना पड़ता है और दीनानाथ सम्मान के साथ रिहा हो जाता है। आकाश न केवल अपने परिवार की गरिमा वापस लाता है बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि अगर एक आम आदमी ठान ले तो वह बड़े से बड़े भ्रष्ट साम्राज्य को हिला सकता है। फिल्म का अंत इस आशा के साथ होता है कि देश के युवा भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होंगे और एक बेहतर "अपना देश" बनाएंगे।
Credits:
Producer: A.V. Subramaniam and T.M. Kittu
Director: Jambu
Cast: Rajesh Khanna, Mumtaz, Om Prakash, Jagdeep, Mukkamala, Madan Puri, Roja Ramani
Music: R. D. Burman
Lyrics: Anand Bakshi



.jpg)

0 Comments