आज हम बात करने जा रहे हैं बॉलीवुड की मशहूर सस्पेंस थ्रिलर फिल्म – "खिलाड़ी" (1992) की।
इस फिल्म का निर्देशन किया है अब्बास–मस्तान की जोड़ी ने, और इसे प्रोड्यूस किया था गिरीश जैन और चंपक जैन ने। यह फिल्म सिर्फ़ एक थ्रिलर ही नहीं थी, बल्कि इसने बॉलीवुड को दिया उसका असली "खिलाड़ी" – अक्षय कुमार।
फिल्म में अक्षय कुमार के साथ हैं – आयेशा जुल्का, दीपक तिजोरी और सबीहा, जबकि सपोर्टिंग रोल्स में हमें दिखते हैं प्रेम चोपड़ा, शक्ति कपूर, आनंद महादेवन और जॉनी लीवर।
तो चलिए दोस्तों, बिना वक्त गंवाए शुरू करते हैं खिलाड़ी की रोमांचक कहानी।
कहानी शुरू होती है चार कॉलेज स्टूडेंट्स से –
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राज मल्होत्रा (अक्षय कुमार)
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बोनी (दीपक तिजोरी)
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नीलम चौधरी (आयेशा जुल्का)
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शीटल (सबीहा)
ये चारों मिलकर अक्सर कॉलेज में शरारतें और प्रैंक किया करते हैं।
राज, दरअसल इंस्पेक्टर सुरेश मल्होत्रा (अनंत महादेवन) का छोटा भाई है।
बोनी
का कोई नज़दीकी रिश्तेदार नहीं है।
शीतल
एक अमीर व्यापारी कैलाशनाथ (प्रेम चोपड़ा) की बेटी है।
नीलम
एक अमीर घराने की इकलौती वारिस है, जिसके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। उसका पालन-पोषण उसके चाचा ने किया है।
धीरे-धीरे राज और नीलम एक-दूसरे को पसंद करने लगते हैं, और बोनी और शीतल भी करीब आ जाते हैं।
राज एक आदतन जुआरी है, जो अब तक कभी हारा नहीं। एक दिन वह अपने दोस्तों से शर्त लगाता है कि वह शीतल के पिता कैलाशनाथ से पैसा निकलवा कर दिखाएगा।
सभी को ये मजाक बहुत खतरनाक लगता है, लेकिन राज की जिद के आगे सब मान जाते हैं।
योजना यह बनती है कि शीतल को “किडनैप” दिखाया जाएगा, और इसके बदले कैलाशनाथ से पैसे माँगे जाएँगे।
असलियत में ये सब बस एक प्रैंक था। चारों दोस्त शीतल को लेकर बंबई से बाहर एक कॉटेज में रुकते हैं, जो पिल्लई नामक आदमी का है। राज और बोनी अपहरणकर्ता बनने का नाटक करते हैं।
कैलाशनाथ इस खबर से घबरा जाते हैं और पुलिस को भी नहीं बताते। लेकिन राज का भाई इंस्पेक्टर सुरेश इस केस को संभाल लेता है। यह जानकर चारों दोस्त घबरा जाते हैं।
कैलाशनाथ पैसा दे देते हैं और राज-बोनी पैसे लेकर कॉटेज पहुँच जाते हैं।
लेकिन तभी सबकी ज़िंदगी बदल जाती है।
जब शीतल कमरे से बाहर आती है, उसके चेहरे पर अजीब-सा डर होता है। अगले ही पल वह ज़मीन पर गिर जाती है – उसकी पीठ में चाकू घोंपा गया था।
चारों दोस्त सन्न रह जाते हैं। प्रैंक अब एक कातिलाना खेल बन चुका था।
डर के मारे वे शीतल की लाश को छिपा देते हैं ताकि पुलिस को पता न चले। आखिरकार, वे लाश को एक थिएटर की पार्किंग में खड़ी कार के डिक्की में छिपा देते हैं।
लेकिन जल्द ही पुलिस को लाश मिल जाती है, और अब सबसे बड़े संदिग्ध बन जाते हैं – वही चार दोस्त।
कहानी यहाँ से और उलझती है।
इसी बीच एक कैबरे डांसर जूली (शक्ति कपूर के साथ जुड़े किरदारों से) एंट्री करती है। जूली लंबे समय से कैलाशनाथ को ब्लैकमेल कर रही थी। वह उससे भारी रकम माँगती है और धमकी देती है कि अगर उसने पैसे नहीं दिए तो राज़ सबके सामने आ जाएगा।
जूली ने एक डांस शो रखा, जिसमें कैलाशनाथ को इनाम के रूप में पैसा देना था।
संयोग से नीलम का चाचा भी उसी शो में शामिल होने आता है। राज और बोनी भी वहाँ पहुँचते हैं।
शो के दौरान बोनी जूली के साथ डांस करता है और अचानक पहचान लेता है कि यही वही औरत है, जिसने पहले उन पर हमला करने की कोशिश की थी।
शक गहराता है कि शीतल की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि साजिश थी।
शो खत्म होने के बाद बोनी, जूली से मिलने जाता है। लेकिन उसके कमरे का दरवाज़ा बंद मिलता है। वह झरोखे से झाँकता है और देखता है कि जूली किसी आदमी से बात कर रही है।
जूली साफ कह रही होती है कि उसने राज और उसके दोस्तों को मारने की कोशिश उसी आदमी के कहने पर की थी। अब वह उसी आदमी को भी ब्लैकमेल करने लगती है।
गुस्से में वह आदमी जूली का कत्ल कर देता है।
बोनी यह सब देख लेता है और भाग जाता है। अब कातिल को भी पता चल जाता है कि बोनी ने उसे देख लिया है।
कातिल बोनी को खत्म करने के लिए गुंडे भेजता है। बोनी पर हमला होता है और वह गंभीर रूप से घायल हो जाता है।
राज और उसका भाई सुरेश उसे बचा लेते हैं। मरने से पहले बोनी कह देता है कि नीलम की जान खतरे में है।
राज तुरंत नीलम को फोन करता है, लेकिन लाइन कट जाती है। वह सुरेश के साथ हॉस्टल की ओर दौड़ता है।
नीलम हॉस्टल में अकेली होती है और पाती है कि चौकीदार की पहले ही हत्या हो चुकी है। तभी कातिल उस पर हमला करता है।
नीलम किसी तरह मुकाबला करती है और उसे खिड़की से बाहर धक्का दे देती है। लेकिन जैसे ही उसे लगता है कि सब खत्म हो गया, वह चौंक जाती है – क्योंकि असली कातिल और कोई नहीं बल्कि उसका चाचा है!
राज और सुरेश समय पर पहुँच जाते हैं और उसे गिरफ्तार कर लेते हैं।
इंटरोगेशन में सारा सच सामने आता है।
दरअसल, नीलम का चाचा उसका असली रिश्तेदार नहीं था। वह तो बस उसकी प्रॉपर्टी का मैनेजर था। नीलम के पिता की मौत के बाद उसे नीलम की देखरेख सौंपी गई थी।
उसे लगा कि नीलम की जायदाद में उसका भी हिस्सा मिलेगा। लेकिन वसीयत में लिखा था कि नीलम जब 18 साल की होगी तो सारी संपत्ति उसे मिल जाएगी।
अगर नीलम की मौत 18 साल से पहले हो जाती, तभी वह संपत्ति उसके नाम हो सकती थी।
इसलिए उसने नीलम को पढ़ाई के बहाने बंबई भेजा और जूली को काम पर रखा ताकि नीलम की मौत हादसे जैसी लगे। लेकिन जब योजना बिगड़ गई, उसने खुद शीतल की हत्या कर दी – यह सोचकर कि वह नीलम है।
सच सामने आने के बाद राज, बोनी और नीलम बेगुनाह साबित हो जाते हैं।
बोनी ठीक हो जाता है, और चारों दोस्त मिलकर कैलाशनाथ को उसका पैसा लौटा देते हैं।
कैलाशनाथ उन्हें माफ कर देते हैं और समझाते हैं कि आगे से किसी के साथ इतनी खतरनाक शरारत कभी न करें।
दोस्तों, यही थी 1992 की सुपरहिट थ्रिलर फिल्म “खिलाड़ी” की पूरी कहानी।
यह फिल्म सिर्फ़ अक्षय कुमार का ब्रेकथ्रू रोल ही नहीं थी, बल्कि इसने बॉलीवुड को “खिलाड़ी” सीरीज़ भी दी। इसके बाद तो अक्षय कुमार “खिलाड़ी कुमार” के नाम से ही मशहूर हो गए।
खिलाड़ी में कॉलेज की मस्ती, दोस्ती, सस्पेंस, मर्डर मिस्ट्री और एक बड़ा ट्विस्ट सब कुछ है। यही वजह है कि यह फिल्म आज भी दर्शकों की पसंदीदा थ्रिलर मानी जाती है।



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