DHARTI - HINDI MOVIE REVIEW / RAJENDRA KUMAR, WAHEEDA REHMAN, SIVAJI GANESAN & C.V. SRIDHAR MOVIE

 



"धरती" एक 1970 की भारतीय हिंदी एक्शन फिल्म है, जिसका निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर सी वी श्रीधर ने किया है। इसमें राजेन्द्र कुमार और वहीदा रहमान मुख्य भूमिकाओं में नजर आते हैं। यह फिल्म 1969 की तमिल फिल्म "सिवंधा मन्न" का हिंदी रीमेक है। दमदार कहानी, शाही माहौल, साज़िश और रोमांचक एक्शन इस फिल्म की खासियत हैं।

 


कहानी है वसंतपुर नाम के एक छोटे से रियासती राज्य की, जो भारत की सीमा से सटा हुआ है। यहां के राजा बेहद नेकदिल और जनता के हित में सोचने वाले हैं। लेकिन उनकी रियासत में एक ऐसा शख्स है, जो उनके लिए खतरा बन चुका हैराजा का सेनापति दीवान दीवान एक निर्दयी और लालची इंसान है, जिसे सत्ता का भूख है। उसका सपना है कि किसी तरह वसंतपुर के सिंहासन पर वह खुद काबिज हो जाए।

 


दीवान यह काम अकेले नहीं कर रहा। वह डच ताकतों के साथ मिलकर एक षड्यंत्र रच रहा है, जिससे वसंतपुर पर कब्ज़ा किया जा सके। राजा को इस गहरी साजिश की भनक तक नहीं है, लेकिन हालात दिन--दिन खराब होते जा रहे हैं।

 


इसी बीच, राजा के इंस्पेक्टर जनरल चन्द्रशेखर के बेटे भरत की कहानी शुरू होती है। भरत पढ़ाई के लिए स्विट्जरलैंड गया हुआ है। यहीं उसकी मुलाकात होती है राजा की बेटी ज्वाला, जिसे प्यार से चित्रलेखा भी कहा जाता है। दोनों के बीच दोस्ती होती है और जल्द ही यह दोस्ती गहरे प्यार में बदल जाती है।

 


एक दिन भरत को अपने दोस्तों से खबर मिलती है कि वसंतपुर खतरे में है और दीवान अपने षड्यंत्र में सफल होने वाला है। यह सुनते ही भरत चिंता में पड़ जाता है। वह तुरंत ज्वाला के साथ वसंतपुर लौटने का फैसला करता है।

 


वापसी के दौरान, भरत और ज्वाला कुछ रोमांचक घटनाओं में फंस जाते हैं। इस सफर में उन्हें दो नए साथी मिलते हैंडिक्की और रोसी ये दोनों सिर्फ मज़ाकिया अंदाज लाते हैं, बल्कि भरत के मिशन में भी मददगार साबित होते हैं।

 


वसंतपुर लौटकर भरत हालात देखता है। दीवान का असर बढ़ चुका है और वह लगभग सत्ता अपने हाथ में लेने वाला है। भरत और उसके साथी दीवान को खत्म करने की योजना बनाते हैं। वे दो बार कोशिश करते हैं, लेकिन दोनों बार असफल रहते हैं।

 


दीवान अब खुलकर अपना खेल खेलने लगता है। वह राजा और चन्द्रशेखर को कैद कर लेता है और खुद को वसंतपुर का नया राजा घोषित करने की तैयारी करता है। यह वह पल है जब भरत को समझ आता है कि अब कोई और रास्ता नहीं हैनिर्णायक हमला ही आखिरी उपाय है।

 


भरत, ज्वाला, डिक्की और रोसी एक साहसी योजना बनाते हैंइस बार दीवान को उसके ही महल में खत्म करना है। महल में घुसने, साज़िश को तोड़ने और राजा को बचाने का रोमांचक सिलसिला शुरू होता है। इसमें चालाकी, बहादुरी और बलिदान सब कुछ देखने को मिलता है।

 

फिल्म की प्लॉट शाही साज़िश, देशभक्ति और प्रेम कहानी का बेहतरीन मिश्रण है।

राजेन्द्र कुमार और वहीदा रहमान ने अपने किरदार में जान डाल दी है।

उस दौर के मधुर गीत और पृष्ठभूमि संगीत फिल्म को और असरदार बनाते हैं।

सी वी श्रीधर ने फिल्म में भव्य लोकेशन्स और रोमांचक घटनाओं को बेहतरीन तरीके से पेश किया है।

विदेशी लोकेशन्स, शाही महल और एक्शन सीक्वेंस देखने लायक हैं।

 


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धरती" सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि यह साज़िश, वीरता और न्याय की जीत की दास्तान है। फिल्म दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखती है, जिसमें रोमांस का जादू, एक्शन का रोमांच और देशभक्ति की भावना एक साथ मिलती है।



 

 

 

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