फिल्म: बुँदल बाज़ (1976)
निर्देशक: शम्मी कपूर
मुख्य कलाकार: राजेश खन्ना, सुलक्षणा पंडित, शम्मी कपूर, रंजीत, जॉनी वॉकर, असरानी और अन्य।
कहानी की शुरुआत
कहानी है एक सपनों में खोए रहने वाले नौजवान राजाराम (राजेश खन्ना) की, जो एक छोटे से गाँव में अपनी बुआ और बहन मालती (फरीदा जलाल) के साथ गरीबी में जीवन बिता रहा है। मालती ने अपने छोटे से घर को गिरवी रख दिया है, ताकि राजाराम की पढ़ाई बंबई (मुंबई) में हो सके।
राजाराम के दिल में एक सपना है — अपनी कॉलेज की सहपाठी और प्रेमिका निशा शर्मा (सुलक्षणा पंडित) से शादी करने का। लेकिन समस्या यह है कि निशा के पिता चाहते हैं कि वह शादी करे एक बॉक्सर रंजीत गुप्ता (रंजीत) से, जो उनका दोस्त का बेटा है।
कॉलेज के दिन
कॉलेज में राजाराम गरीब है, लेकिन सबके सामने अमीर बनने का नाटक करता है। उसका सबसे अच्छा दोस्त और रूममेट गोपाल (असरानी) ही उसकी असली हालत जानता है। रंजीत कॉलेज का गुंडा और धोखेबाज़ है, और हमेशा निशा को पाने के लिए राजाराम से टक्कर लेता है।
राजाराम की पढ़ाई पूरी होती है और वह आर्ट्स की डिग्री लेकर गाँव लौटता है, लेकिन वहाँ उसका इंतज़ार कर रही होती है कर्ज़ की समस्या। वह काम ढूँढता है और मजबूरी में सूखी लाला के यहाँ मज़दूरी करता है, लेकिन आलस के कारण पिट जाता है।
मुंबई में संघर्ष
राजाराम फिर मुंबई लौटता है और सुलेमान (जॉनी वॉकर) से मिलता है, जो पुरानी बोतलें और डिब्बे खरीदकर बेचता है। वही उसे यह काम सिखाता है। धीरे-धीरे राजाराम थोड़ा कमाने लगता है और गाँव में पैसे भेजने लगता है।
निशा से मिलने की हिम्मत वह नहीं करता, लेकिन एक दिन अचानक वह उसे न्यू ईयर पार्टी के बाहर मिल जाता है। निशा सोचती है कि उसकी बोतल बेचने वाली वर्दी एक पार्टी कॉस्ट्यूम है और उसे अंदर ले जाती है। पार्टी में रंजीत फिर उसे अपमानित करता है, जिससे राजाराम और भी दुखी हो जाता है और चुपचाप निकल जाता है।
जिन्न की एंट्री
एक दिन, राजाराम बोतलों का बोरा उठाए होता है, तभी एक बोतल टूटती है और उसमें से गुलाबी धुएँ का गुबार निकलता है। और फिर — धड़ाम! —
20,000 साल पुराना जिन्न (शम्मी कपूर) सामने आ जाता है।
जिन्न बताता है कि उसे उसके शरारती स्वभाव के कारण उसके चाचा ने बोतल में कैद कर दिया था। अब उसने कसम खाई है कि जो उसे आज़ाद करेगा, उसकी एक साल तक सेवा करेगा — चाहे वह चाहे या नहीं!
मस्ती और मुसीबतें
जिन्न की मदद से राजाराम और सुलेमान की जिंदगी थोड़ी बेहतर होती है, लेकिन जिन्न की हरकतों से अक्सर मुसीबत भी आ जाती है। सुलेमान, जिन्न को निशा के बारे में बताता है और वह दोनों को मिलाने की कोशिश करता है, मगर निशा का पिता अब भी रंजीत से शादी करवाने पर अड़ा रहता है।
इस बीच, राजाराम अपनी बहन मालती को गाँव से मुंबई बुला लेता है, ताकि सूखी लाला की जबरदस्ती शादी से बचाया जा सके। वह मालती की शादी अपने दोस्त गोपाल से करवा देता है।
रंजीत की चालें
निशा और उसके पिता में रंजीत को लेकर झगड़ा होता है, लेकिन निशा तय कर लेती है कि वह केवल राजाराम से ही शादी करेगी, चाहे वह गरीब हो। रंजीत, राजाराम को सड़क पर मारने की कोशिश करता है, लेकिन जिन्न उसे उड़ने वाली कार से बचा लेता है।
जिन्न, राजाराम को एक जादुई अंगूठी देता है, जिससे एक आग उगलने वाला राक्षस बुलाया जा सकता है, जो "जुम जुम बह" चिल्लाता है। राजाराम डरकर अंगूठी फेंक देता है, और रंजीत उसे उठा लेता है।
राक्षस और अपहरण
रंजीत अपने कर्ज़ चुकाने के लिए राक्षस की मदद से अपना रूप राजाराम जैसा बना लेता है और निशा को धोखा देने की कोशिश करता है, लेकिन निशा उसकी असलियत पहचान लेती है। गुस्से में, रंजीत और राक्षस, निशा और उसके पिता का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले जाते हैं।
राजाराम और जिन्न उनका पीछा करते हैं, लेकिन पाताल लोक में जिन्न की ताकत बेकार हो जाती है। अब सवाल है — क्या राजाराम बिना जिन्न की जादुई मदद के राक्षस को हरा पाएगा? क्या वह निशा और उसके पिता को बचा पाएगा? और रंजीत का क्या होगा?
निष्कर्ष
बुँदल बाज़ सिर्फ एक फैंटेसी कॉमेडी नहीं, बल्कि इसमें प्यार, दोस्ती, बलिदान और संघर्ष का सुंदर मेल है। यह फिल्म रिलीज़ के समय भले ही हिट नहीं हुई, लेकिन आज इसे एक कल्ट क्लासिक माना जाता है।



.jpg)

0 Comments