Vishwas is a 1969 Bollywood drama film produced by J. N. Khatri on K.P.K & Vijay Movies banner, directed by Kewal P Kashyap. Starring Jeetendra, Aparna Sen, Bharat Bhushan, Kamini Kaushal in the lead roles and music composed by Kalyanji Anandji.
विश्वास एक भावनात्मक और पारिवारिक कहानी है। यह कहानी एक ऐसे परिवार की है जिसमें प्रेम है, सम्मान है, सपने हैं, लेकिन साथ ही गलतफहमियां भी हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में सबसे बड़ी ताकत विश्वास होता है। अगर विश्वास टूट जाए तो रिश्ते बिखर जाते हैं, और अगर विश्वास बना रहे तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।
कहानी की शुरुआत एक छोटे से शहर से होती है जहां एक सम्मानित और ईमानदार व्यक्ति रहते हैं। उनका नाम रामनाथ है। वे सादगी से जीवन जीने वाले, सच्चाई पर चलने वाले और दूसरों की मदद करने वाले इंसान हैं। उनकी पत्नी सावित्री एक शांत, धैर्यवान और परिवार को जोड़कर रखने वाली स्त्री हैं। उनका एक बेटा है जिसका नाम राजू है। राजू बचपन से ही होशियार, दयालु और मेहनती लड़का है। उसके माता पिता का सपना है कि वह पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बने और परिवार का नाम रोशन करे।
रामनाथ एक छोटे से दफ्तर में काम करते हैं। उनकी आमदनी ज्यादा नहीं है, लेकिन वे कभी गलत रास्ता नहीं अपनाते। वे अपने बेटे को हमेशा सिखाते हैं कि इंसान की असली दौलत उसका चरित्र होता है। राजू अपने पिता की बातों को ध्यान से सुनता है और उन्हें अपने दिल में बसाता है। वह पढ़ाई में अच्छा है और अपने माता पिता का बहुत आदर करता है।
समय बीतता है और राजू बड़ा हो जाता है। वह पढ़ाई पूरी करके नौकरी की तलाश में शहर जाता है। उसके माता पिता उसे आशीर्वाद देकर विदा करते हैं। शहर में आकर राजू को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उसे नौकरी नहीं मिलती, पैसे कम पड़ जाते हैं, रहने की जगह छोटी और साधारण होती है। लेकिन वह हार नहीं मानता। वह अपने पिता की सीख याद करता है और मेहनत करता रहता है।
इसी शहर में एक और परिवार रहता है। उस परिवार के मुखिया का नाम हरिप्रसाद है। वे अमीर और प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उनकी एक बेटी है जिसका नाम राधा है। राधा पढ़ी लिखी, समझदार और संवेदनशील लड़की है। वह अपने पिता की तरह घमंडी नहीं है। वह सरल जीवन पसंद करती है और दूसरों की मदद करना चाहती है।
एक दिन संयोग से राजू और राधा की मुलाकात होती है। राजू एक दफ्तर में नौकरी के लिए गया होता है और वहां राधा भी किसी काम से आई होती है। दोनों की बातचीत होती है। राधा को राजू की सादगी और ईमानदारी अच्छी लगती है। राजू को राधा की नम्रता और समझदारी पसंद आती है। धीरे धीरे दोनों के बीच दोस्ती हो जाती है।
राजू को आखिरकार एक छोटी सी नौकरी मिल जाती है। वह ईमानदारी से काम करता है। उसके अधिकारी उसकी मेहनत से खुश रहते हैं। वह अपने माता पिता को पैसे भेजता है और उनका ख्याल रखता है। राधा और राजू की मुलाकातें बढ़ने लगती हैं। दोनों एक दूसरे को समझने लगते हैं। उनके बीच प्रेम की भावना जन्म लेती है।
लेकिन हरिप्रसाद को जब इस बारे में पता चलता है तो वह नाराज हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि राजू गरीब परिवार से है और उनकी बेटी के लायक नहीं है। वे राधा को समझाते हैं कि वह अपने स्तर के परिवार में शादी करे। राधा अपने पिता से कहती है कि इंसान की असली पहचान उसकी ईमानदारी और चरित्र से होती है, धन से नहीं। लेकिन हरिप्रसाद नहीं मानते।
उधर राजू के जीवन में एक और परेशानी आती है। उसके दफ्तर में कुछ लोग भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं। वे चाहते हैं कि राजू भी उनके साथ मिल जाए। लेकिन राजू साफ मना कर देता है। इससे वे लोग उससे नाराज हो जाते हैं। वे उसके खिलाफ साजिश रचते हैं। एक दिन दफ्तर में पैसे की गड़बड़ी का आरोप राजू पर लगा दिया जाता है।
राजू स्तब्ध रह जाता है। वह जानता है कि उसने कुछ गलत नहीं किया। लेकिन सबूत उसके खिलाफ बना दिए जाते हैं। अधिकारी उसे नौकरी से निकाल देते हैं। यह खबर उसके गांव तक पहुंचती है। रामनाथ और सावित्री को विश्वास नहीं होता कि उनका बेटा ऐसा कर सकता है। वे जानते हैं कि उनका बेटा ईमानदार है। लेकिन समाज के लोग बातें बनाने लगते हैं।
राधा को भी इस बात का पता चलता है। उसके पिता कहते हैं कि अब तो साफ है कि राजू भरोसे के लायक नहीं है। लेकिन राधा अपने दिल की आवाज सुनती है। उसे विश्वास है कि राजू निर्दोष है। वह उससे मिलती है और उसे हिम्मत देती है। राजू टूट चुका होता है, लेकिन राधा का विश्वास उसे ताकत देता है।
राजू सच्चाई साबित करने का फैसला करता है। वह उन लोगों के खिलाफ सबूत जुटाने लगता है जिन्होंने उसे फंसाया था। यह काम आसान नहीं है। वे लोग ताकतवर हैं और हर कदम पर उसे रोकने की कोशिश करते हैं। कई बार उसे धमकी मिलती है। लेकिन वह डरता नहीं। उसे अपने माता पिता का विश्वास याद आता है और राधा का भरोसा भी।
इसी बीच रामनाथ बीमार पड़ जाते हैं। उन्हें अपने बेटे की चिंता सताती है। राजू यह सुनकर गांव जाता है। वह अपने पिता के पास बैठकर कहता है कि उसने कुछ गलत नहीं किया। रामनाथ उसके सिर पर हाथ रखकर कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे पर पूरा विश्वास है। यह सुनकर राजू की आंखों में आंसू आ जाते हैं।
शहर लौटकर राजू अपनी जांच तेज कर देता है। उसे धीरे धीरे पता चलता है कि दफ्तर का एक बड़ा अधिकारी ही घोटाले में शामिल है। उसने अपने अपराध छिपाने के लिए राजू को फंसाया था। राजू चुपचाप उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा करता है। वह एक पुराने कर्मचारी की मदद लेता है जो सच्चाई जानता है लेकिन डर के कारण चुप था।
आखिरकार वह दिन आता है जब सच्चाई सामने लाने का मौका मिलता है। एक बड़ी बैठक में राजू सभी के सामने सबूत पेश करता है। वह बताता है कि कैसे उसे फंसाया गया। असली दोषी पकड़ा जाता है। अधिकारी और पुलिस उसकी जांच करते हैं और सच्चाई सामने आ जाती है। राजू निर्दोष साबित होता है।
यह खबर पूरे शहर में फैल जाती है। लोग जो पहले उस पर शक कर रहे थे, अब उसकी ईमानदारी की तारीफ करते हैं। दफ्तर उसे वापस नौकरी देने की पेशकश करता है और माफी मांगता है। राजू का सम्मान फिर से लौट आता है।
हरिप्रसाद भी यह सब देखते हैं। उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने केवल धन और पद देखकर राजू को गलत समझा। वे राधा से कहते हैं कि अगर वह आज भी राजू से शादी करना चाहती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। राधा खुश हो जाती है। वह जानती थी कि सच्चाई एक दिन सामने आएगी।
राजू अपने माता पिता को शहर बुलाता है। परिवार फिर से एक साथ होता है। रामनाथ अपने बेटे पर गर्व महसूस करते हैं। वे कहते हैं कि जीवन में कई बार लोग गलत समझेंगे, लेकिन अगर हम सच्चाई पर टिके रहें तो अंत में जीत हमारी होगी।
अंत में राजू और राधा की शादी होती है। शादी में दोनों परिवार शामिल होते हैं। खुशी का माहौल होता है। रामनाथ और सावित्री अपने बेटे को खुश देखकर संतुष्ट होते हैं। हरिप्रसाद भी बदल चुके होते हैं। वे समझ जाते हैं कि विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है।
कहानी का संदेश साफ है। जीवन में धन, पद और शक्ति से ज्यादा जरूरी है विश्वास। अगर परिवार में विश्वास हो, प्रेम हो और सच्चाई हो तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। अगर विश्वास टूट जाए तो रिश्ते भी टूट जाते हैं। लेकिन अगर हम एक दूसरे पर भरोसा रखें तो हर गलतफहमी दूर हो सकती है।
यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि ईमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है, लेकिन अंत में वही सही साबित होता है। जो लोग झूठ और धोखे से आगे बढ़ना चाहते हैं, वे कुछ समय के लिए सफल हो सकते हैं, लेकिन सच्चाई उन्हें पकड़ ही लेती है। राजू की तरह अगर हम धैर्य और साहस रखें तो हम अपने जीवन की हर परीक्षा में सफल हो सकते हैं।
विश्वास ही जीवन की नींव है। माता पिता का विश्वास, पति पत्नी का विश्वास, मित्रों का विश्वास और स्वयं पर विश्वास। यही विश्वास इंसान को गिरने से बचाता है और उसे आगे बढ़ने की ताकत देता है। यही इस कहानी का सार है और यही इसकी सबसे बड़ी सीख है।
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