आज हम बात करेंगे 1992 में आई सलमान खान की फिल्म सूर्यवंशी की। ये फिल्म एक रोमांटिक फैंटेसी हॉरर मूवी थी, जिसका निर्देशन किया था राकेश कुमार ने और इसे प्रोड्यूस किया था विजय कुमार गलानी और किन्नी गलानी ने। फिल्म में मुख्य किरदार निभाए हैं सलमान खान, शीबा और अमृता सिंह ने।
फिल्म रिलीज़ के समय ज्यादा चली नहीं, लेकिन इसकी कहानी आज भी कई दर्शकों के लिए दिलचस्प और अलग किस्म की लगती है। चलिए, इसकी पूरी कहानी जानते हैं।
कहानी की शुरुआत होती है DD से, जो कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के सीनियर ऑफिसर हैं। उनका दोस्त है JB, जो अब अमेरिका में रहता है। बचपन से दोनों की दोस्ती गहरी है।
कई सालों बाद जब JB इंडिया वापस आता है, तो वह चाहता है कि उसकी बेटे विकी की शादी DD की बेटी सोनिया से हो जाए।
लेकिन जब विकी इंडिया आता है, तो वह सोनिया से साफ कह देता है कि उसे शादी में कोई दिलचस्पी नहीं है। सोनिया समझदार है। वह कहती है कि वे शादी कर सकते हैं, लेकिन वह उसके सपनों और आज़ादी के बीच कभी नहीं आएगी। इस समझौते के बाद दोनों की शादी हो जाती है।
इसी दौरान DD को खबर मिलती है कि किशोर, जो उनकी टीम का आर्कियोलॉजिस्ट
था और संग्रामगढ़ नाम के गाँव में खुदाई कर रहा था, रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है।
DD अपने
ऑफिसर महेष को जांच के लिए भेजता है। महेश को किशोर की डायरी मिलती है, जिसमें संग्रामगढ़ गाँव के बारे में लिखा होता है। गाँव का एक बूढ़ा बाबा भी इस राज़ को जानता है।
बाबा को शहर लाकर उससे पूछताछ की जाती है। बाबा बताता है कि संग्रामगढ़ कभी समृद्ध राज्य था, लेकिन अब यह श्रापित भूमि बन चुका है। गाँव की फसलें खुद-ब-खुद जल जाती हैं, बाहर जाने वाले लोग बरबाद हो जाते हैं, और गाँव वाले हमेशा दुखी रहते हैं।
इस सबके पीछे है एक राजकुमारी की भटकती आत्मा – सूर्यलेखा। बाबा बताता है कि उसकी आत्मा तभी मुक्त होगी जब कोई सूर्यवंशी राजकुमार उसे मिले।
इसी बीच बाबा को विकी की तस्वीर दिखाई जाती है। तस्वीर देखकर बाबा घबरा जाता है क्योंकि विकी हू-ब-हू उस पुराने सूर्यवंशी राजकुमार जैसा दिखता है।
DD, JB, विकी,
सोनिया और पूरी टीम संग्रामगढ़ पहुँचते हैं। महल के खंडहर पथरीली चट्टानों के नीचे दबे हुए होते हैं। एक छोटे भूकंप के बाद रास्ता खुलता है और सभी महल में उतरते हैं। वहाँ उन्हें किशोर की लाश मिलती है, जो फंदे से लटक रही होती है।
साथ ही, एक पुराना संस्कृत पांडुलिपि (मैन्युस्क्रिप्ट) भी मिलती है, जिसमें सूर्यलेखा की कहानी लिखी होती है।
हजार साल पहले, सूर्यलेखा राजकुमारी थी। उसे पुरुषों से नफरत थी और वह शादी नहीं करना चाहती थी। लेकिन उसकी माँ चाहती थी कि वह विवाह करे। जो भी राजकुमार उससे शादी करने आता, उसे वह खतरनाक इम्तिहान देती – खूंखार योद्धाओं से लड़ाई, खूनी तेंदुए और नरभक्षी राक्षस से सामना।
एक दिन राजकुमार अमर सिंह उसका इम्तिहान पास कर लेता है, लेकिन नरभक्षी उसे मार डालता है। इसके बाद आता है सूर्यवंशी विक्रम सिंह। वह सभी राक्षसों और योद्धाओं को हरा देता है।
सूर्यलेखा पहली बार किसी राजकुमार से प्रभावित होती है और उससे संबंध बनाती है। लेकिन विक्रम सिंह उसे बताता है कि उसका मकसद सिर्फ अमर सिंह की मौत का बदला लेना था, शादी में उसे दिलचस्पी नहीं। यह सुनकर सूर्यलेखा टूट जाती है और विनती करती है कि वह उसे छोड़कर न जाए।
लेकिन विक्रम सिंह मना कर देता है। जब वह जाने लगता है, तो राजगुरु उससे लड़ाई करता है। तभी सूर्यलेखा महल से कूदकर आत्महत्या कर लेती है।
राजगुरु पीछे से वार करके विक्रम सिंह को भी मार देता है। अपराधबोध में राजगुरु अंधे कुएँ में चला जाता है। रानी माँ सूर्यलेखा की आत्मा को श्राप देती है कि वह कभी मोक्ष नहीं पाएगी और हमेशा महल में भटकती रहेगी।
अब विकी समझ जाता है कि वही सूर्यवंशी राजकुमार का पुनर्जन्म है। उस रात वह और सोनिया महल में जाते हैं।
वहाँ सूर्यलेखा आईने से निकलकर विकी का स्वागत करती है। लेकिन जब वह सोनिया को देखती है तो गुस्से में आग उगल देती है और विकी को अपने वश में कर लेती है।
सोनिया को तभी राजगुरु की पांडुलिपि का आखिरी पन्ना मिलता है। उसमें लिखा होता है कि सूर्यलेखा अपनी सुंदरता और आईने की दीवानी है। वह सूर्यास्त के बाद आईने से बाहर आती है और सूर्योदय से पहले लौटती है। अगर उसका आईना तोड़ दिया जाए, तो उसकी आत्मा मुक्त हो जाएगी।
सोनिया रानी माँ की तस्वीर और आईना बाहर लाती है। आखिरकार आईना टूट जाता है और सूर्यलेखा की आत्मा तड़पने लगती है। मरने से पहले वह अपने पाप स्वीकार करती है और माफी मांगती है।
सुबह होते ही विकी और सोनिया महल से बाहर निकलते हैं। विकी अब सोनिया से अपने प्यार का इज़हार करता है और साथ निभाने का वादा करता है।
फिल्म का अंत होता है जब दोनों अपने माता-पिता की बाहों में लौट जाते हैं।
तो दोस्तों, ये थी 1992 की फिल्म सूर्यवंशी की पूरी कहानी। भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन इसमें हॉरर, फैंटेसी और रोमांस का ऐसा मिक्स था जो इसे अलग बनाता है।



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