नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं 2005 में रिलीज़ हुई एक हिंदी क्राइम थ्रिलर फिल्म “Ek Khiladi Ek Haseena” के बारे में। इस फिल्म का निर्देशन सुपर्ण वर्मा ने किया था, और उन्होंने खुद कहा है कि ये फिल्म कई हॉलीवुड कंस फिल्मों जैसे Confidence और House of Games से प्रेरित है।
इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में हैं फरदीन खान, फिरोज खान, के के मेनन और कोएना मित्रा। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज़्यादा सफल नहीं रही, लेकिन इसकी कहानी में ट्विस्ट और टर्न्स की कोई कमी नहीं है।
फिल्म की शुरुआत होती है दो चालाक ठगों अर्जुन वर्मा और उसके सबसे अच्छे दोस्त रोहित कपूर से। ये दोनों मिलकर बड़े-बड़े अमीरों को बेवकूफ बनाकर उनका पैसा ठगते हैं। उनका तरीका काफी स्टाइलिश और स्मार्ट होता है।
एक दिन, अर्जुन और रोहित मिलकर एक खतरनाक गैंगस्टर सिकंदर के अकाउंटेंट को ठग लेते हैं। इस ठगी में उन्हें करोड़ों रुपये हाथ लगते हैं। लेकिन जैसे ही सिकंदर को इसका पता चलता है, वो गुस्से में आगबबूला हो जाता है।
इस ठगी का खामियाजा रोहित को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। खरबू नाम का सिकंदर का गुर्गा, रोहित की बेरहमी से हत्या कर देता है। अर्जुन किसी तरह अपनी जान बचाकर शहर छोड़ देता है और छुपकर रहने लगता है। लेकिन ज्यादा वक्त नहीं गुजरता कि खरबू अर्जुन का पता लगा लेता है।
अब सिकंदर की तरफ से अर्जुन को अल्टीमेटम मिलता है – या तो चोरी किए गए पैसे के साथ ब्याज भी वापस कर दो, या फिर मौत के लिए तैयार हो जाओ।
अर्जुन अब ठगी नहीं, बल्कि बदला लेने की प्लानिंग करता है। वो एक टीम बनाता है जिसमें हर शख्स की खासियत है। इसी दौरान उसकी मुलाकात होती है नताशा कपूर से, जो एक मनोचिकित्सक होती है। शुरुआत में अर्जुन और उसकी टीम नताशा को भी बेवकूफ बनाते हैं, लेकिन धीरे-धीरे नताशा को सच्चाई का पता चलता है।
नताशा को जब अहसास होता है कि अर्जुन की लड़ाई सिर्फ पैसे की नहीं, बल्कि अपने दोस्त रोहित की मौत का बदला लेने की है, तो वो भी अर्जुन का साथ देने लगती है।
फिल्म में एक और मजबूत किरदार की एंट्री होती है – जहाँगीर खान। वह एक हाई लेवल क्रिमिनल होता है और अर्जुन के रास्ते में कई रुकावटें डालता है। अर्जुन के लिए अब सिर्फ सिकंदर से ही नहीं, बल्कि जहाँगीर से भी निपटना जरूरी हो जाता है।
जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, दर्शकों को पता चलता है कि अर्जुन ने बहुत सोच-समझकर एक बड़ी साज़िश रची थी। उसने पूरे खेल की प्लानिंग की थी – सिकंदर को फंसाना, पुलिस से गिरफ्तार करवाना और जहाँगीर का पैसा हासिल करना।
आखिरकार अर्जुन अपने प्लान में कामयाब हो जाता है। सिकंदर एक ड्रग केस में पुलिस द्वारा पकड़ा जाता है। और फिल्म के अंत में अर्जुन अपने दोस्तों और अपनी प्रेमिका नताशा के साथ न सिर्फ बदला ले चुका होता है, बल्कि जहाँगीर का पैसा लेकर नए जीवन की ओर बढ़ जाता है।
फिल्म का संगीत लालिट सेन और अनु मलिक ने दिया है, और इसमें कुछ पेपी गाने हैं जो उस समय युवाओं के बीच खासे पॉपुलर हुए थे। निर्देशन की बात करें तो सुपर्ण वर्मा ने फिल्म को स्टाइलिश अंदाज में पेश किया है, लेकिन फिल्म की धीमी गति और कुछ कमज़ोर स्क्रिप्ट पॉइंट्स की वजह से ये बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई।
“Ek
Khiladi Ek Haseena” एक टिपिकल कंस फिल्म है जिसमें चालाकी, बदला, और बहुत सारा दिमागी खेल देखने को मिलता है। फरदीन खान और फिरोज खान की केमिस्ट्री दिलचस्प है, वहीं कोएना मित्रा ने भी एक सशक्त किरदार निभाया है।
अगर आपको थ्रिलर और ट्विस्ट से भरी हुई कहानियां पसंद हैं, तो एक बार इस फिल्म को देखना दिलचस्प हो सकता है।
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