CHALA MURARI HERO BANNE - HINDI MOVIE REVIEW / ASRANI / AMITABH BACHCHAN & DHARMENDRA MOVIE




 यह कहानी है एक आम लड़के की, जो बड़े सपने लेकर मायानगरी मुंबई आता है, और कैसे उसकी ज़िंदगी बदलती है।

"चला मुरारी हीरो बनने" 1977 में आई एक हिंदी कॉमेडी फिल्म है, जिसे खुद असरानी ने डायरेक्ट किया था और वो ही इसमें लीड रोल में भी हैं। उनके साथ बिंदिया गोस्वामी और अशोक कुमार जैसे दिग्गज कलाकार भी फिल्म में नजर आते हैं।

 

फिल्म की शुरुआत होती है मुरारी नाम के एक साधारण से लड़के से, जो एक छोटे शहर में अपने परिवार के साथ रहता है। मुरारी के पिता एक कपड़े की दुकान चलाते हैं और चाहते हैं कि उनका बेटा उनकी दुकान में हाथ बटाए और घर की जिम्मेदारी संभाले।

लेकिन मुरारी का सपना कुछ और होता है। उसे हीरो बनना हैफिल्मों में काम करना है, बड़े पर्दे पर नाम कमाना है। उसका सपना है, ग्लैमर की दुनिया में अपनी पहचान बनाना। लेकिन उसके पापा उसके इस सपने को 'बेकार की बात' समझते हैं।

 

एक दिन, मुरारी अपना घर छोड़ देता है और बिना किसी प्लानिंग के ट्रेन पकड़कर मुंबई पहुंच जाता है। ट्रेन में उसकी मुलाकात होती है एक स्कूल के टीचर से, जो दावा करते हैं कि वो राज कपूर को जानते हैं। मुरारी को एक उम्मीद की किरण दिखती है।

मुंबई पहुंचकर मुरारी को असल जिंदगी की सच्चाई समझ में आती है। वो एक चॉल में रहने लगता है, जहां ज़िंदगी आसान नहीं होती। कभी भूख, कभी धोखा, तो कभी अकेलापनलेकिन मुरारी हार नहीं मानता।

 

धीरे-धीरे मुरारी को छोटे-मोटे रोल मिलने लगते हैं। उसकी मेहनत रंग लाती है और फिर एक दिन वो बॉलीवुड का जाना-पहचाना चेहरा बन जाता है। उसके पास नाम, पैसा, शोहरतसब कुछ जाता है। वो सुपरस्टार मुरारी बन जाता है।

इसी दौरान उसकी ज़िंदगी में प्यार भी आता है। उसे बिंदिया गोस्वामी से प्यार हो जाता है और वो भी उससे दिल लगा बैठती हैं। दोनों के बीच प्यार बढ़ता है। 

 

लेकिन जैसा कि होता है, शोहरत के साथ-साथ मुसीबतें भी आती हैं। मुरारी पर एक बड़ा स्कैंडल लग जाता है। कुछ लोग उसके खिलाफ साजिश करते हैं, मीडिया उसे बदनाम करती है, और उसका करियर भी खतरे में पड़ जाता है। उसका प्यारयानी बिंदियाभी उस पर से भरोसा खो देती हैं और उसे छोड़ देती हैं।

मुरारी टूटने लगता है। लेकिन फिर वो खुद को समेटता है और सच का सामना करता है। वो अपनी बेकसूरी साबित करता है, सच्चाई सबके सामने लाता है और खुद को क्लीन चिट दिलवाता है। 

 

जब उसकी सच्चाई सबके सामने आती है, तो बिंदिया वापस उसकी ज़िंदगी में आती हैं। दोनों फिर से मिलते हैं और शादी कर लेते हैं। फिल्म एक प्यारे और भावुक मोड़ पर खत्म होती है।

 

"चला मुरारी हीरो बनने" सिर्फ एक लड़के की फिल्मी दुनिया में एंट्री की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो अपने सपनों का पीछा करने का साहस रखते हैं। फिल्म में हास्य, संघर्ष, इमोशन, रोमांस और एक बेहतरीन संदेश हैकि अगर आप अपने सपनों के लिए ईमानदारी से मेहनत करें, तो एक दिन जरूर सफलता मिलेगी।

 

फिल्म का संगीत, कहानी और असरानी की कॉमिक टाइमिंग काफी सराहनीय रही। बिंदिया गोस्वामी का किरदार भी सादगी और भावनाओं से भरा है। अशोक कुमार जैसे वरिष्ठ अभिनेता की मौजूदगी ने फिल्म को और मजबूत बनाया।

 

"चला मुरारी हीरो बनने" एक ऐसी फिल्म है, जिसे आप देख कर हंसेंगे, सोचेंगे और अपने अंदर के सपनों को फिर से जगाने की हिम्मत पाएंगे।

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