"MAJHLI DIDI" - HINDI MOVIE REVIEW / HRISHIKESH MUKHERJEE / DHARMENDRA / MEENA KUMARI MOVIE



नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं एक इमोशनल और संस्कारों से भरी पुरानी फिल्म - हृषिकेश मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी 1967 की फिल्म मझली दीदी की। ये फिल्म एक मशहूर बंगाली कहानी "मेजदीदी" पर आधारित है, जिसे लिखा था शरत चंद्र चट्टोपाध्याय ने। आइए, इस कहानी को हिंदी में समझते हैं, एक यूट्यूब वॉयसओवर के लिए।*

 

इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाए हैं मीना कुमारी ने, जो बनी हैं हेमांगिनी, और धर्मेंद्र ने, जो हैं बिपिनचंद्र। साथ ही फिल्म में है ललिता पवार और सचिन पिलगांवकर एक महत्वपूर्ण भूमिका में। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कमाल ना दिखाए हो, लेकिन हृषिकेश मुखर्जी के डायरेक्शन और शानदार स्क्रीनप्ले की वजह से ये फिल्म आज भी लोगों के दिल में है।

 

फिल्म की कहानी शुरू होती है बिपिनचंद्र से, जो एक शांत और शरीफ इंसान है। वो अपने परिवार के खिलाफ जाकर एक शहर की लड़की हेमांगिनी से शादी कर लेता है। हेमांगिनी एक सुधि-संस्कारी, समझदार और दयालु महिला है।

 

बिपिन के इस फैसले से उसकी भाभी कादंबिनी और उसके पति नवीनचंद्र बिल्कुल खुश नहीं होते। उन्हें लगता है कि बिपिन ने परिवार की मर्यादा तोड़ दी है। घर का माहौल थोड़ा तनाव भरा हो जाता है, लेकिन सब लोग अपने-अपने बच्चों में बिजी हो जाते हैं।

 

एक दिन कादंबिनी का सौतेले भाई किशन, जो एक अनाथ और स्कूल जाने वाला बच्चा है, उनके घर जाता है। किशन अपने माँ-बाप को खो चुका होता है, और अब उसका कोई नहीं है। इसलिए कादम्बिनी अपने घर लाती है - लेकिन सिर्फ नाम के लिए।

 

वो ना तो उससे प्यार देती है, ना इज़्ज़त। कादंबिनी, उसका पति नवीनचंद्र और उनका मोटा बेटा, तीनो मिलकर किशन के साथ बहुत बुरा सुलूक करते हैं। दांतना, दर्द और उसका मज़ाक उड़ाना हर दिन का काम बन जाता है।

 

जब हेमांगिनी को किशन के दुख दर्द का पता चलता है, तो उसकी माँ का दिल पिघल जाता है। वो किशन के साथ प्रेम और ममता का व्यवहार करती है - उसके लिए खाना बनाती है, उसकी पढ़ाई में मदद करती है, और उसे एक माँ की तरह संभालती है।

 

लेकिन घर के लोगों को ये पसंद नहीं आता। कादंबिनी और नवीनचंद्र, बिपिन को भड़का देते हैं कि हेमांगिनी किशन के चक्कर में उनकी इज्जत गिर रही है। बिपिन, जो शुरू में न्यूट्रल था, अब अपने परिवार के पक्ष में हो जाता है।

 

एक और बड़ा मोड़ तब आता है जब हेमांगिनी कोर्ट में नवीनचंद्र के खिलाफ गवाही देती है- किसी संपत्ति मामले में। इस से परिवार में और तनाव बढ़ जाता है। घर दो हिसों में बात जाती है - एक तरफ हेमांगिनी और दूसरी तरफ बाकी लोग।

 

ये कोर्ट केस परिवार के बीच के रिश्ते और कमज़ोर कर देता है। सबको लगता है कि हेमांगिनी ने परिवार के खिलाफ जाकर बड़ी गलती की है। बिपिन भी अपनी पत्नी हेमांगिनी से नाराज़ हो जाता है।

 

इस बीच बिचारे किशन पर अत्याचार बढ़ते जाते हैं। उसे लगता है कि वो किसी का नहीं है। जब हेमांगिनी उसकी रक्षा करती है, तो बिपिन उसे धमकी देता है - या तो वह किशन को छोड़ दे, या फिर घर छोड़ दे।

 

हेमांगिनी एक मुश्किल फैसला लेती है. उसके सामने दो रास्ते हैं - एक तरफ उसका पति और घर, दूसरा तरफ एक बेसहारा बच्चा जिसने माँ का प्यार दिया है।

 

फिल्म के आखिरी हिस्सो में यहीं देखा जाता है कि मानवता, ममता और सच्चाई जीत जाती है। हेमांगिनी का सच सबके सामने जाता है, और परिवार को अपनी गलती का एहसास होता है।

 

ये फिल्म हृषिकेश मुखर्जी के बेहतरीन कामों में से एक मानी जाती है। इसने फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पटकथा और सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन जीता। साथ ही ये फिल्म भारत की आधिकारिक प्रविष्टि भी थी 41वें अकादमी पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में।

 

तो दोस्तों, *मझली दीदी* एक ऐसी कहानी है जो हमें दिखती है कि एक औरत की ममता, उसका सच और उसकी हिम्मत किस तरह एक बिखरती हुई जिंदगी को संभाल सकती है।

 

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