"JOHNY MERA NAAM" - DEV ANAND HINDI MOVIE REVIEW / CRIME ACTION DRAMA / HEMA MALINI MOVIE




नमस्कार दोस्तों,
आज हम बात करेंगे 1970 की सुपरहिट एक्शन-क्राइम फिल्म “Johny Mera Naam” की,
जिसका निर्देशन किया था विजय आनंद ने, और मुख्य भूमिकाओं में थे
देव आनंद, हेमा मालिनी, प्राण, जीवन, पद्मा खन्ना और I S जौहर

यह फिल्म दो बिछड़े भाइयों, एक तेज़तर्रार CID अफसर, और एक खतरनाक अपराध सिंडिकेट की दिलचस्प कहानी है।

 

कहानी की शुरुआत होती है दो भाइयोंसोहन और मोहन से।
दोनों के पिता एक ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर होते हैं।
दोनों भाई बॉक्सिंग में माहिर होते हैं और बचपन में एक-दूसरे के बहुत क़रीब होते हैं।

लेकिन एक दिन एक खतरनाक गुंडे के हाथों उनके पिता की हत्या हो जाती है।
इस हत्या के पीछे होता है रंजीत नाम का बड़ा अपराधी।

पिता की मौत अपनी आंखों से देखने के बाद, बड़ा भाई मोहन, उस गुंडे को मार देता है और भागते-भागते रंजीत की गाड़ी के डिक्की में छुप जाता है।
उसके बाद वह गायब हो जाता है, और सोहन और उसकी माँ को लगता है कि वह मर गया।

 

अब कहानी कई साल आगे बढ़ती है।
छोटा भाई सोहन, बड़ा होकर बनता है एक तेज़ और चालाक CID अफसर
वो केस सुलझाने के लिए अलग-अलग भेष में काम करता है।

एक बड़े केस को सुलझाने के लिए वह खुद को ‘Johny’ नाम का चोर बनाकर जेल भिजवा देता है।
जेल में उसकी मुलाकात होती है हीरा, (I S जौहर) से, जो एक मज़ेदार और बातूनी इंसान होता है।

सोहन उर्फ़ जॉनी, हीरा की मदद से अपराधियों की गैंग में शामिल हो जाता है, ताकि अंदर की जानकारी हासिल कर सके।

 

इस दौरान जॉनी की मुलाकात होती है रेखा, (हेमा मालिनी) से, जो एक अमीर लड़की है लेकिन अपने पिता की गायब होने की वजह से दुखी रहती है।

जॉनी और रेखा के बीच धीरे-धीरे प्यार हो जाता है, और रेखा उसे अपनी कहानी सुनाती है कि कैसे उसके पिता को किसी ने किडनैप कर लिया था

जॉनी को शक होता है कि इसके पीछे रंजीत का ही हाथ हैवही अपराधी जिसके कारण उसका बचपन उजड़ा था।

 

जॉनी उर्फ़ सोहन को पता चलता है कि रंजीत ने रेखा के पिता को अपने बंगले में बंदी बनाकर रखा है।
अब उसका मिशन हैरेखा के पिता को आज़ाद कराना, रंजीत को गिरफ़्तार कराना, और अपने अतीत से भी जवाब लेना।

इधर, हीरा मोहन से मिलता है और उसे जॉनी की सच्चाई बताता है कि वो असल में CID अफसर सोहन है।

अब मोहन और सोहन आमने-सामने जाते हैं।

 

मोहन को लगता है कि जॉनी उसकी गैंग को बर्बाद करने आया है।
लेकिन जब दोनों भिड़ते हैं, तभी उन्हें एहसास होता है कि वे असल में सगे भाई हैंबचपन में बिछड़े हुए मोहन और सोहन!

इस इमोशनल मोड़ पर दोनों भाई गले लग जाते हैं और मिलकर रंजीत के खिलाफ आखिरी लड़ाई की तैयारी करते हैं।

 

मोहान और सोहन मिलकर रंजीत के अड्डे पर हमला करते हैं।
रेखा के पिता को सुरक्षित बाहर निकालते हैं,
और रंजीत को गिरफ़्तार करवा देते हैं

इसी के साथ राधा-कृष्ण मंदिर से चोरी हुए गहने भी वापस मिल जाते हैं।

आखिरकार, दोनों भाई अपनी माँ से मिलते हैं,
घर फिर से बस जाता है और सोहन-रेखा की मोहब्बत भी मुकम्मल होती है।

 

फिल्म की खास बातें:

  • देव आनंद का करिश्माई अभिनय और अलग-अलग रूपों में CID बनने की स्टाइल।
  • प्राण की इमोशनल परफॉर्मेंसजो विलेन नहीं, बल्कि बिछड़ा भाई निकलता है।
  • हेमा मालिनी का दिल छू लेने वाला किरदार।
  • और सबसे खासI S जौहर की तिगुनी भूमिका: फ्लाइट अटेंडेंट, अपराधी का साथी और पुलिस अफसरहँसी से भरपूर।

 

फिल्म का संगीत दिया था कल्याणजी-आनंदजी ने, और गानों को लिखा था अंजन और इंदीवर ने।
गाने आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।

 

Johny Mera Naam सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं है
यह भाईचारे, पारिवारिक इमोशन्स, और इंसाफ की जीत की कहानी है।

अगर आपको पुरानी मसाला फिल्मों का शौक है
तो ये फिल्म देखना बिल्कुल मत भूलिए।

 

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