नमस्कार दोस्तों! आज हम लेकर आये हैं एक ज़बरदस्त 70 के दशक की मसाला फिल्म - "हम किसी से कम नहीं" का पूरा किस्सा, एक दम आसान हिंदी में।
इस फिल्म को बनाया था मशहूर फिल्म निर्माता नासिर हुसैन ने, जिन्होंने इसे प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया। फिल्म में काफी बड़े सितारे हैं जैसे ऋषि कपूर, तारिक, काजल किरण, और अमजद खान, जबकी जीनत अमान ने एक खास कैमियो किया है। क्या फिल्म ने 1977 के बॉक्स ऑफिस पर तीसरी सबसे बड़ी कमाई की थी, और इसका संगीत भी सुपरहिट रहा। सबसे खास बात ये थी कि इस फिल्म के लिए मोहम्मद रफी साहब को उनका पहला और आखिरी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था।
कहानी शुरू होती है एक अमीर आदमी से जो अफ्रीका में अपनी सारी प्रॉपर्टी बेच देता है और हमारे पैसे को हीरो में बदल देता है। ये हीरे एक बेल्ट में छुपाकर वो इंडिया के लिए फ्लाइट पकड़ता है।
लेकिन फ्लाइट में ही उस आदमी को अचानक हार्ट अटैक आ जाता है। मरने से पहले, वो एक सह-यात्री से - जिसका नाम है किशोरीलाल - कहता है कि बेल्ट को उसके बेटे राजेश को देना जो दिल्ली के अशोका होटल में गायक-नर्तक का काम करता है।
ये वही किशोरीलाल हैं जो कभी आर्थिक रूप से टूट गए थे। हमें वक्त संजय के पिता ने उसकी मदद की थी। तब किशोरीलाल ने वादा किया था कि अपनी बेटी काजल की शादी संजय से करेगी। लेकिन अब जब किशोरीलाल अमीर बन गया है, उसने अपना वादा तोड़ दिया और संजय के परिवार को नीचा दिखाया।
किशोरीलाल जैसा ही इंडिया पहुंचा, गुंडे उसका पीछा करने लगे। वो किसी तरह उनसे बचकर निकलता है और दिल्ली एयरपोर्ट के पास एक साइकिल शेड में चुप जाता है। डर के मारे वो बेल्ट में छुपे 25 करोड़ के हीरे एक साइकिल के टूलबॉक्स में छुपा देता है।
ये साइकिल किसकी थी? संजय कुमार की! जो बिना कुछ जाने अपनी साइकिल ले जाता है, और हीरे भी साथ ले जाता है - बिना किसी अंदाज़े के।
अब विलेन की एंट्री होती है - सौदागर सिंह, जिसका असली प्लान था हीरे हासिल करना। उसने राजेश के पास जाकर झूठी कहानी बनाई कि किशोरीलाल ने उसका बेटा किडनैप कर लिया है। राजेश को इमोशनल कर दिया गया, और वो किशोरीलाल से बदला लेने के लिए उसकी बेटी काजल को किडनैप करने का प्लान बना रहा है।
राजेश काजल से झूठ-मूठ का प्यार जताता है, ताकि बाद में उसे ब्लैकमेल करके हीरे ले सके।
वहीं दूसरी तरफ संजय, जो असली में काजल का बचपन का प्यार है, मंजीत के मैनेजर बन जाता है। मंजीत भी एक एक्टर है जिसे सौदागर सिंह इस्तमाल करता है। संजय भी काजल से प्यार जताता है, लेकिन सच है कि वह उससे प्यार करता है। काजल थोड़ा कन्फ्यूज हो जाती है क्योंकि दो लड़के उससे प्यार करते हैं - एक झूठा और एक असली।
राजेश को भी काजल से सच में प्यार हो जाता है। उसकी पुरानी प्रेमिका भी वापस आती है, जो अपनी शादी से भाग गई होती है सिर्फ राजेश के लिए।
क्लाइमेक्स में सौदागर सिंह, मंजीत के लिए जरूरी काजल और हीरे दोनों को लेकर आता है। लेकिन राजेश और संजय काजल को बचा लेते हैं। फिर होती है ज़बरदस्त एक्शन फाइट बॉर्डर के पास, जहां सौदागर के सब डाकू हारे जाते हैं।
फायरिंग के दौरन संजय गोली खा लेता है। काजल घबरा जाती है. सौदागर उसे धमाका लगता है, लेकिन तभी संजय उठता है - वो जिंदा होता है - और सौदागर को गोली मार देता है। पुलिस भी वहां आ जाती है और सबको बचा लेती है।
आख़िर में संजय और काजल मिल जाते हैं। राजेश भी अपनी पुरानी महबूबा के साथ जुड़ जाता है। सारे गिले-शिकवे दूर होते हैं, और फिल्म एक म्यूजिकल हैप्पी एंडिंग के साथ ख़त्म होती है।
क्या फिल्म के गाने तो सुपरहिट हैं - "बचना ऐ हसीनों", "क्या हुआ तेरा वादा", और "हम किसी से कम नहीं" जैसे गानों ने इस फिल्म को अमर बना दिया। मोहम्मद रफ़ी का गाया हुआ "क्या हुआ तेरा वादा" उनको राष्ट्रीय पुरस्कार मिलता है - उनके गायन करियर का सबसे बड़ा सम्मान।
तो दोस्तों, हम किसी से कम नहीं एक फुल-ऑन एंटरटेनर है - जिसमें ड्रामा है, एक्शन है, रोमांस है, म्यूजिक है और एक जबरदस्त क्लाइमेक्स है। यही होती है 70 के दशक की असली बॉलीवुड मसाला फिल्म!
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